दुर्ग में सिंचाई ढांचे को मिलेगी नई मजबूती, 40.85 करोड़ रुपये के कार्य स्वीकृत
रायपुर, 22 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जल संसाधन विभाग ने विभिन्न योजनाओं के लिए 40 करोड़ 85 लाख 2 हजार रुपये की स्वीकृति दी है। प्रस्तावित कार्यों का बड़ा हिस्सा पुराने जलाशयों, व्यपवर्तन योजनाओं और नहर प्रणालियों के जीर्णोद्धार, रिमॉडलिंग तथा लाइनिंग से जुड़ा है। यानी सरकार का फोकस केवल नए निर्माण पर नहीं, बल्कि पहले से मौजूद सिंचाई ढांचे की क्षमता और उपयोगिता को बनाए रखने पर भी है।
इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद विभाग द्वारा जारी विवरण के अनुसार, जिन योजनाओं में सिंचाई क्षेत्र का स्पष्ट उल्लेख है, उनसे कुल 883 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलने की संभावना है। हालांकि स्वीकृत राशि में ऐसे कार्य भी शामिल हैं जिनका लाभ केवल खेतों तक सीमित नहीं है, जैसे दुर्ग निगम क्षेत्र के तालाबों में निस्तारी जल पहुंचाने के लिए चैनल निर्माण और शिवनाथ मंडल कार्यालय का जीर्णोद्धार एवं नव निर्माण।
पुरानी नहरों की लाइनिंग पर क्यों है जोर?
सिंचाई परियोजनाओं में नहरों की लाइनिंग को महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि बिना पक्की लाइनिंग वाली या क्षतिग्रस्त नहरों में पानी का रिसाव बढ़ सकता है। इससे जलाशय से छोड़ा गया पानी निर्धारित खेतों तक अपेक्षित मात्रा में नहीं पहुंच पाता। जीर्णोद्धार और लाइनिंग का उद्देश्य उपलब्ध जल को अधिक प्रभावी ढंग से सिंचाई नेटवर्क तक पहुंचाना होता है।
दुर्ग जिले के लिए यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां कई सिंचाई संरचनाएं पुरानी हैं और समय के साथ उनकी क्षमता पर रखरखाव का असर पड़ सकता है। राज्य के 2026-27 के बजट दस्तावेज में भी दुर्ग जिले की तिरगा, गणियारी, निगम क्षेत्र के तालाबों के लिए चैनल निर्माण सहित कई सिंचाई संबंधी कार्यों का उल्लेख किया गया है।
किन परियोजनाओं को मिली राशि?
स्वीकृत राशि के तहत सुरपा व्यपवर्तन योजना के जीर्णोद्धार, नहर प्रणाली की रिमॉडलिंग और लाइनिंग के लिए 2.23 करोड़ रुपये से अधिक मंजूर किए गए हैं। विभाग के अनुसार इससे 121 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी।
मोहंदी जलाशय के जीर्णोद्धार और नहर लाइनिंग के लिए करीब 4.97 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। इससे 100 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलने की बात कही गई है।
तिरगा जलाशय के जीर्णोद्धार एवं लाइनिंग के लिए करीब 4.71 करोड़ रुपये तथा गणियारी जलाशय के समान कार्यों के लिए करीब 4.71 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इन दोनों योजनाओं से क्रमशः 107 और 254 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलने का अनुमान है।
इसी तरह रिसाली उमरपोटी जलाशय के जीर्णोद्धार और नहर लाइनिंग के लिए करीब 4.98 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। इससे 162 हेक्टेयर क्षेत्र को लाभ मिलने की जानकारी दी गई है।
कपसदा जलाशय के लिए करीब 4.57 करोड़ रुपये और नंदौरी जलाशय के लिए करीब 4.78 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इनके कार्य पूरे होने पर क्रमशः 90 और 49 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने की बात कही गई है।
इसके अलावा दुर्ग निगम क्षेत्र के तालाबों में निस्तारी जल भरने के लिए चैनल निर्माण पर करीब 4.94 करोड़ रुपये और शिवनाथ मंडल कार्यालय दुर्ग के जीर्णोद्धार एवं नव निर्माण के लिए करीब 4.96 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।
किसानों के लिए क्या बदल सकता है?
सिंचाई ढांचे में सुधार का सीधा संबंध खेतों तक पानी की उपलब्धता से है। यदि नहरों में रिसाव कम होता है और जल वितरण प्रणाली बेहतर तरीके से काम करती है, तो उपलब्ध जल का उपयोग अधिक व्यवस्थित ढंग से किया जा सकता है। इससे उन किसानों को विशेष लाभ मिल सकता है जिनकी खेती वर्षा पर अधिक निर्भर रहती है।
हालांकि केवल राशि स्वीकृत होना और जमीन पर सिंचाई सुविधा पहुंच जाना एक ही बात नहीं है। वास्तविक लाभ के लिए निर्माण कार्य की गुणवत्ता, समय पर पूरा होना, नहरों की नियमित सफाई और जल वितरण व्यवस्था का संचालन भी उतना ही महत्वपूर्ण रहेगा।
आगे की चुनौती सिर्फ निर्माण नहीं, रखरखाव भी
दुर्ग की इन परियोजनाओं में एक बड़ा हिस्सा मौजूदा जलाशयों और नहर प्रणालियों के जीर्णोद्धार से जुड़ा है। इससे यह संकेत मिलता है कि सिंचाई क्षमता बनाए रखने के लिए पुराने ढांचे की नियमित मरम्मत भी जरूरी है।
सरकार के लिए अगला महत्वपूर्ण चरण स्वीकृत कार्यों को समय पर जमीन पर उतारना होगा। किसानों के दृष्टिकोण से परियोजना की सफलता का वास्तविक पैमाना यह होगा कि नहर में पानी कब पहुंचता है, कितने खेतों तक नियमित रूप से पहुंचता है और कितने समय तक यह व्यवस्था प्रभावी रहती है।



