जब हमारे शरीर के अंगों में वॉटर रिटेंशन होता है तो हमारे शरीर के कुछ हिस्सों जैसे हाथ, पैर, चेहरे और पेट की मांसपेशियों में सूजन हो जाती है। आयुर्वेदिक डॉक्टर कहती हैं कि जब हमारा शरीर मिनिरल्स के लेवल को बैलेंस नहीं कर पाता है तो इसकी वजह से शरीर के टिशूज़ में पानी जमा होने लगता है और शरीर के अंग फूलने लगते हैं। ये स्थिति आपके पैरों, एड़ियों और टखनों में भी भयंकर दर्द का कारण बन सकती है।
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वाटर रिटेंशन क्या है?
वॉटर रिटेंशन का मतलब है शरीर के अंदरूनी हिस्सों में तरल पदार्थ का जमा होना। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर के ऊतकों यानि टिशूज में जरूरत से ज़्यादा पानी जमा हो जाता है। इससे शरीर के कुछ खास हिस्सों, जैसे पैरों, टखनों, हाथों या चेहरे पर सूजन आ जाती है। यह समस्या महिलाओं में ज्यादा आम है, खासकर हार्मोनल बदलावों के कारण जैसे कि पीरियड्स से पहले या प्रेगनेंसी के दौरान ऐसा अधिक होता है। इसके अलावा, ज़्यादा नमक खाना, कम पानी पीना, लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहना और दिल, किडनी या लिवर से जुड़ी बीमारियां भी इस समस्या का कारण बन सकती हैं।
वॉटर रिटेंशन शरीर में क्या होता है?
- शरीर में भारीपन महसूस होना
- जोड़ों में अकड़न होना
- तेज़ी से वज़न का बढ़ना
अगर इसका इलाज न किया जाए, तो इससे हाई ब्लड प्रेशर, किडनी की समस्या या दिल की बीमारी जैसी गंभीर स्थितियां पैदा हो सकती हैं।
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वॉटर रिटेंशन से बचने के उपाय?
इससे बचने के लिए नमक का सेवन कम करें, खूब पानी पिएं, रोज़ाना हल्की-फुल्की कसरत करें और लंबे समय तक एक ही जगह पर एक ही स्थिति में बैठने से बचें। अगर सूजन बनी रहती है, तो डॉक्टर से ज़रूर सलाह लें, क्योंकि यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। स्वस्थ दिनचर्या और खान-पान अपनाकर शरीर में पानी जमा होने की समस्या से बचा जा सकता है।



