डेंगू में प्लेटलेट्स बढ़ाने के नाम पर क्या खाएं? इन चीजों से रिकवरी में मिलेगी मदद, लेकिन एक गलती पड़ सकती है भारी
नई दिल्ली: डेंगू का नाम सामने आते ही सबसे बड़ी चिंता अक्सर प्लेटलेट काउंट को लेकर होती है। रिपोर्ट में संख्या कम होते ही मरीज और परिवार तुरंत ऐसे खाद्य पदार्थ या घरेलू उपाय खोजने लगते हैं, जिनसे प्लेटलेट्स तेजी से बढ़ सकें। लेकिन डेंगू की देखभाल का सबसे अहम हिस्सा केवल प्लेटलेट नंबर बढ़ाना नहीं, बल्कि शरीर में पर्याप्त पानी बनाए रखना, लक्षणों की निगरानी करना और गंभीर स्थिति के संकेतों पर तुरंत चिकित्सा लेना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और अमेरिकी CDC के अनुसार डेंगू के लिए फिलहाल कोई विशिष्ट एंटीवायरल उपचार उपलब्ध नहीं है; इलाज मुख्यतः supportive care पर आधारित होता है।
डेंगू में खान-पान का असली उद्देश्य क्या होना चाहिए?
तेज बुखार, उल्टी, पसीना और भूख कम होने के कारण डेंगू के दौरान शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है। इसलिए पर्याप्त तरल लेना बेहद जरूरी है। पानी, इलेक्ट्रोलाइट वाले पेय और मरीज की स्थिति के अनुसार ORS जैसे विकल्प हाइड्रेशन बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। WHO भी डेंगू में पर्याप्त तरल लेने पर जोर देता है।
भोजन में ऐसी चीजें रखी जा सकती हैं जो आसानी से पचें और शरीर को ऊर्जा तथा पोषण दें। फल, हल्का घर का भोजन और पर्याप्त तरल रिकवरी के दौरान उपयोगी हो सकते हैं। हालांकि इनमें से किसी एक चीज को डेंगू का इलाज मानना सही नहीं होगा।
नारियल पानी और फलों का क्या फायदा?
नारियल पानी में पानी और कुछ इलेक्ट्रोलाइट्स होते हैं, इसलिए यह शरीर में तरल की जरूरत पूरी करने का एक विकल्प हो सकता है। इसी तरह कीवी जैसे फल विटामिन और अन्य पोषक तत्व देते हैं। लेकिन इनका मुख्य लाभ पोषण और हाइड्रेशन से जुड़ा है, न कि यह साबित करना कि वे कुछ घंटों में प्लेटलेट काउंट को तेजी से बढ़ा देंगे।
डेंगू के मरीज को क्या और कितनी मात्रा में देना है, यह उसकी उम्र, उल्टी, कमजोरी, दूसरी बीमारियों और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर कर सकता है।
पपीते के पत्ते का जूस: चर्चा बहुत, लेकिन सबूत अभी सीमित
डेंगू में पपीते के पत्ते के अर्क को प्लेटलेट बढ़ाने वाले घरेलू उपाय के रूप में लंबे समय से इस्तेमाल किया जाता रहा है। कुछ clinical studies और systematic reviews में platelet count बढ़ने का संकेत मिला है, लेकिन उपलब्ध शोध की गुणवत्ता और clinical benefits को लेकर अभी भी सीमाएं हैं। एक systematic review ने भी निष्कर्ष दिया कि प्लेटलेट बढ़ने के बावजूद डेंगू के गंभीर परिणामों पर पर्याप्त मजबूत प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
इसलिए पपीते के पत्ते के जूस को डॉक्टर की निगरानी और standard treatment का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी herbal extract का सेवन करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है, खासकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं या दूसरी बीमारी से जूझ रहे मरीजों के मामले में।
बकरी का दूध भी कोई “प्लेटलेट बूस्टर” नहीं
बकरी के दूध को लेकर भी डेंगू में कई दावे किए जाते हैं, लेकिन इसे तेजी से प्लेटलेट बढ़ाने का प्रमाणित उपचार मानने के लिए पर्याप्त विश्वसनीय evidence नहीं है। मरीज को दूध आसानी से पचता है या नहीं, यह व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करता है। इसलिए केवल प्लेटलेट बढ़ाने के उद्देश्य से बकरी का दूध शुरू करना जरूरी नहीं है।
प्लेटलेट कम होना दिखे तो सिर्फ खाने पर निर्भर रहना खतरनाक हो सकता है
डेंगू में प्लेटलेट काउंट कम हो सकता है, लेकिन बीमारी की गंभीरता का आकलन केवल एक संख्या देखकर नहीं किया जाता। डॉक्टर मरीज की हालत, रक्त जांच, हेमाटोक्रिट, तरल संतुलन और warning signs को मिलाकर निर्णय लेते हैं। WHO और CDC के अनुसार बुखार उतरने के आसपास का समय विशेष निगरानी वाला हो सकता है और कुछ मरीजों में इसी दौरान गंभीर dengue विकसित हो सकता है।
पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, नाक या मसूड़ों से खून आना, खून की उल्टी या मल में खून, अत्यधिक कमजोरी, बेचैनी या सांस लेने में परेशानी जैसे संकेत दिखें तो घर पर प्लेटलेट बढ़ाने के उपाय आजमाने के बजाय तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
दवा के मामले में भी सावधानी जरूरी
डेंगू में बुखार और दर्द के लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार पैरासिटामोल का इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं aspirin और ibuprofen जैसी NSAIDs दवाओं से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इनसे bleeding का खतरा बढ़ सकता है।



