चेक बाउंस मामले में कंपनी की ओर से दायर माफी अर्जी मंजूर; अदालत ने पहले लगाए गए ₹50 हजार के खर्च को हटाते हुए अलग शर्त तय की
नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने चेक बाउंस से जुड़े एक मामले में कंपनी पर पहले लगाए गए ₹50 हजार के खर्च को माफ कर दिया। हालांकि, राहत देते हुए अदालत ने कंपनी के वकील को एक सप्ताह के भीतर दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) के सभी कर्मचारियों को चाय और समोसे वितरित करने का निर्देश दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी ने 17 सितंबर 2026 को पारित किया था, जिसकी जानकारी हाल में सामने आई है।
मामला इंडस बिर्रा बेवरेजेज और अन्य बनाम इशान एसोसिएट्स से जुड़ा है। कंपनी ने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक शिकायत को रद्द करने के लिए हाई कोर्ट का रुख किया था। यह शिकायत चेक बाउंस से संबंधित थी और नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के प्रावधानों के तहत मामला चल रहा था।
अदालत ने पहले क्यों लगाया था ₹50 हजार का खर्च?
20 अगस्त 2026 को मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कंपनी की याचिका पर सख्त टिप्पणी करते हुए ₹50 हजार का खर्च लगाया था। अदालत के अनुसार, याचिकाकर्ताओं ने निचली अदालत से संबंधित एक आदेश को हाई कोर्ट के समक्ष पूरी तरह सामने नहीं रखा था। अदालत ने यह भी पाया कि अलग-अलग अदालतों के समक्ष कंपनी की ओर से दिए गए बयानों में अंतर था।
इसके बाद कंपनी ने पहले लगाए गए ₹50 हजार के खर्च को माफ करने के लिए अलग आवेदन दाखिल किया। 17 सितंबर को न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी ने परिस्थितियों को देखते हुए माफी की अर्जी स्वीकार कर ली। इसके साथ ही अदालत ने कंपनी के वकील को DHCBA के सभी कर्मचारियों के लिए एक सप्ताह के भीतर चाय और समोसे की व्यवस्था करने का निर्देश दिया।
अदालत के आदेश की चर्चा क्यों हो रही है?
अदालत के इस निर्देश ने इसलिए ध्यान खींचा क्योंकि सामान्य तौर पर अदालतों द्वारा लगाए गए मौद्रिक खर्च के मामलों में भुगतान की व्यवस्था की जाती है, जबकि इस मामले में पहले लगाए गए ₹50 हजार के खर्च को माफ करते हुए बार एसोसिएशन के कर्मचारियों के लिए चाय-समोसे की व्यवस्था करने को कहा गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, यह निर्देश कंपनी के वकील को दिया गया था।
पत्रकार उमर राशिद की याचिका पर भी सुनवाई
इसी बीच दिल्ली हाई कोर्ट में पत्रकार उमर राशिद से जुड़े एक अलग मामले की भी सुनवाई हुई। राशिद ने सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ किए गए गुमनाम पोस्ट हटाने की मांग करते हुए मानहानि की याचिका दाखिल की है। रिपोर्टों के अनुसार, इन पोस्ट में उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न संबंधी आरोप लगाए गए थे। अदालत ने इन आरोपों की सत्यता पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।
न्यायमूर्ति मनोज जैन की पीठ ने अंतरिम राहत की मांग पर संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों के बीच आपसी समाधान की संभावना के बारे में भी पूछा। मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।
इस तरह दिल्ली हाई कोर्ट से जुड़े दोनों मामलों में फिलहाल अलग-अलग न्यायिक कार्यवाही जारी है। चाय-समोसे वाला मामला 20 अगस्त को लगाए गए ₹50 हजार के खर्च की माफी से संबंधित है, जबकि उमर राशिद का मामला सोशल मीडिया पोस्ट हटाने और मानहानि की अंतरिम राहत से जुड़ा अलग मुकदमा है।



