Chhattisgarh Rajyotsav 2026: बड़ा संकल्प, नई उम्मीदें और विकसित छत्तीसगढ़ की चुनौती
रायपुर। छत्तीसगढ़ का स्थापना दिवस केवल एक राज्य के गठन की वर्षगांठ नहीं, बल्कि उन उम्मीदों को याद करने का अवसर है जिनके आधार पर एक अलग राज्य की मांग ने आकार लिया था। 1 नवंबर 2026 को छत्तीसगढ़ अपनी स्थापना के 26 वर्ष पूरे कर रहा है। इस मौके पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए वर्ष 2047 तक समृद्ध, सशक्त और विकसित छत्तीसगढ़ बनाने का आह्वान किया है।
मुख्यमंत्री के संदेश में तीन प्रमुख बातें उभरकर सामने आती हैं—राज्य निर्माण की ऐतिहासिक विरासत, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति की उम्मीद और विकास का लाभ प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का संकल्प। इन तीनों लक्ष्यों को एक साथ पूरा करना ही आने वाले वर्षों में राज्य की प्रगति की असली कसौटी होगा।
अटल बिहारी वाजपेयी के फैसले ने दी अलग पहचान
छत्तीसगढ़ का गठन 1 नवंबर 2000 को हुआ था। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में अलग राज्य का सपना साकार हुआ। इसके पीछे केवल प्रशासनिक सीमाओं का पुनर्गठन नहीं था, बल्कि क्षेत्र की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान, संसाधनों और स्थानीय आकांक्षाओं को अलग मंच देने की सोच भी शामिल थी।
राज्य बनने के बाद छत्तीसगढ़ के सामने अपनी अलग विकास नीति तैयार करने, ग्रामीण क्षेत्रों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने और खनिज संपदा का बेहतर उपयोग करने जैसी बड़ी जिम्मेदारियां थीं। आज 26 वर्ष बाद राज्य ने कई क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाई है, लेकिन क्षेत्रीय असमानता, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण बुनियादी ढांचे से जुड़ी चुनौतियां अब भी महत्वपूर्ण हैं।
नक्सलवाद से शांति की ओर बढ़ना, लेकिन असली परीक्षा विकास की
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस वर्ष के राज्योत्सव को विशेष बताते हुए कहा है कि छत्तीसगढ़ लाल आतंक से मुक्त होकर शांति, विश्वास और विकास के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, सुरक्षा बलों और राज्य सरकार के प्रयासों को दिया है।
बस्तर और अन्य प्रभावित इलाकों में सुरक्षा की स्थिति बेहतर होना स्थानीय जीवन के लिए बड़ा बदलाव ला सकता है। जिन क्षेत्रों में लंबे समय तक हिंसा और भय के कारण विकास कार्य प्रभावित हुए, वहां अब सड़क, स्कूल, अस्पताल, संचार सुविधा और रोजगार के अवसर पहुंचाने की जरूरत और बढ़ गई है।
हालांकि, किसी क्षेत्र में शांति की स्थायी सफलता केवल सुरक्षा अभियानों से नहीं मापी जा सकती। इसके लिए स्थानीय लोगों का भरोसा, युवाओं को शिक्षा और रोजगार, आदिवासी समुदायों के अधिकारों का सम्मान तथा प्रशासन तक आसान पहुंच भी जरूरी है। आने वाले समय में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती शांति के माहौल को टिकाऊ सामाजिक और आर्थिक बदलाव में बदलने की होगी।
2047 का लक्ष्य: घोषणा से आगे बढ़कर जमीन पर बदलाव जरूरी
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ बनाने का संकल्प दोहराया है। यह लक्ष्य तभी सार्थक होगा जब विकास का असर केवल बड़े शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों तक सीमित न रहे।
राज्य की अर्थव्यवस्था में कृषि, वन उपज, खनिज, ऊर्जा और उद्योग की अहम भूमिका है। इन क्षेत्रों में स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाना जरूरी होगा। किसानों को बेहतर बाजार और प्रसंस्करण सुविधाएं, युवाओं को कौशल आधारित रोजगार, महिलाओं को आर्थिक अवसर और आदिवासी क्षेत्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना विकास की प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए।
विशेषज्ञ दृष्टि से देखें तो किसी राज्य की प्रगति का आकलन केवल निवेश, उत्पादन या निर्माण कार्यों से नहीं होता। यह भी देखना पड़ता है कि आम परिवार की आय कितनी बढ़ी, बच्चों को कैसी शिक्षा मिली, इलाज कितनी आसानी से उपलब्ध हुआ और युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार के कितने अवसर मिले।
राज्योत्सव पर गर्व के साथ जवाबदेही का भी अवसर
छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक संपदा और सांस्कृतिक विविधता उसकी बड़ी ताकत है। लेकिन संसाधनों की उपलब्धता अपने आप समृद्धि की गारंटी नहीं देती। इनके उपयोग से स्थानीय समुदायों को कितना लाभ मिलता है, पर्यावरण पर क्या असर पड़ता है और रोजगार के अवसर कितने पैदा होते हैं—इन सवालों पर लगातार ध्यान देना होगा।
राज्य स्थापना दिवस इस बात की समीक्षा का अवसर भी है कि पिछले 26 वर्षों में कौन-से लक्ष्य पूरे हुए और किन क्षेत्रों में अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है। सरकार की योजनाओं का वास्तविक लाभ गांवों, दूरस्थ बस्तियों और जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचे, इसके लिए पारदर्शिता और जवाबदेही महत्वपूर्ण रहेंगी।
मुख्यमंत्री का 2047 का आह्वान तभी जनभागीदारी का अभियान बन सकेगा, जब इसमें सरकार के साथ किसान, युवा, महिलाएं, उद्यमी, कर्मचारी और स्थानीय समुदाय भी सक्रिय भूमिका निभाएं।
छत्तीसगढ़ के 26 वर्ष एक महत्वपूर्ण पड़ाव हैं, लेकिन राज्य का भविष्य आने वाले फैसलों से तय होगा। राज्योत्सव का वास्तविक उत्सव तब होगा जब शांति के साथ हर गांव में अवसर पहुंचे, हर युवा को आगे बढ़ने का रास्ता मिले और विकास की रोशनी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।




