Chhattisgarh Next Youth Conclave: CM साय का युवाओं को संदेश- अपनी बात बेझिझक रखें, नई सोच को काम में बदलें
रायपुर: छत्तीसगढ़ में युवा शक्ति को विकास और बदलाव से जोड़ने की चर्चा के बीच राजधानी रायपुर में आयोजित ‘छत्तीसगढ़ नेक्स्ट यूथ कॉन्क्लेव’ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने युवाओं से संवाद किया। कार्यक्रम में अलग-अलग क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाली युवा प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। साथ ही ‘आज की जनधारा’ की 36वीं वर्षगांठ के अवसर पर प्रकाशित साहित्यिक वार्षिकी-2026 का विमोचन भी हुआ।
कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री का संदेश केवल सफलता हासिल करने तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने युवाओं से अपनी बात सीधी, सच्ची और साहस के साथ रखने, अपनी क्षमता पहचानने और नई सोच को रचनात्मक काम में बदलने की बात कही। उनके अनुसार प्रदेश की युवा आबादी की ऊर्जा, रचनात्मकता और नवाचार की क्षमता आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के विकास की महत्वपूर्ण ताकत बन सकती है।
नौकरी की तलाश से आगे, अवसर पैदा करने की चुनौती
आज के दौर में युवाओं के लिए अवसरों का अर्थ केवल सरकारी या निजी नौकरी तक सीमित नहीं है। तकनीक, स्टार्टअप, डिजिटल सेवाएं, खेल, कला, पर्यटन और स्थानीय उत्पादों के क्षेत्र में नई संभावनाएं तेजी से बन रही हैं।
ऐसे में किसी युवा की सफलता का पैमाना केवल उसकी डिग्री नहीं, बल्कि वह अपने ज्ञान और कौशल को वास्तविक समस्या के समाधान में कितना बदल पाता है, यह भी है। छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में कृषि, वन उत्पाद, पर्यटन, हस्तशिल्प, स्थानीय खाद्य पदार्थ और संस्कृति से जुड़े क्षेत्रों में युवा उद्यमिता के लिए संभावनाएं मौजूद हैं।
मुख्यमंत्री साय ने भी युवाओं को बड़े लक्ष्य तय करने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया। उन्होंने नवाचार, स्टार्टअप, विज्ञान, तकनीक, खेल और कला-संस्कृति जैसे क्षेत्रों में युवाओं की भूमिका का उल्लेख किया।
विकास के साथ अपनी जड़ों से जुड़े रहने पर जोर
कॉन्क्लेव में छत्तीसगढ़ की पहचान को केवल आर्थिक विकास के नजरिए से नहीं, बल्कि प्रकृति और संस्कृति के साथ जोड़कर भी देखा गया। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के जंगलों, पहाड़ों, जलप्रपातों, ग्रामीण जीवन और लोक परंपराओं को इसकी विशिष्ट पहचान बताया।
उन्होंने मधेश्वर पहाड़ जैसे प्राकृतिक स्थलों का उल्लेख करते हुए पर्यटन की संभावनाओं की बात कही। यह क्षेत्र युवाओं के लिए इसलिए महत्वपूर्ण हो सकता है क्योंकि पर्यटन के विकास से सिर्फ पर्यटकों की संख्या नहीं बढ़ती, बल्कि स्थानीय परिवहन, होमस्टे, हस्तशिल्प, खान-पान और गाइड जैसी कई गतिविधियों में रोजगार के अवसर बन सकते हैं।
उन्होंने युवाओं से आधुनिकता अपनाने के साथ अपनी भाषा, बोली और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहने का भी आग्रह किया। छत्तीसगढ़ी सहित विभिन्न स्थानीय बोलियों, लोकगीतों और लोककलाओं को नई पीढ़ी के माध्यम से आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
संघर्ष की कहानी से युवाओं को मिला अलग संदेश
मुख्यमंत्री ने अपने व्यक्तिगत जीवन के संघर्ष का उल्लेख भी किया। उन्होंने बताया कि कम उम्र में पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारियां उनके कंधों पर आ गई थीं। खेती-बाड़ी के साथ पारिवारिक जिम्मेदारियां संभालने और छोटे भाइयों की शिक्षा की व्यवस्था करने का अनुभव उन्होंने युवाओं से साझा किया।
इस हिस्से का संदेश यह था कि कठिन परिस्थितियां किसी व्यक्ति की यात्रा को रोकने के बजाय कई बार उसे जिम्मेदारी और धैर्य सीखने का अवसर भी देती हैं। हालांकि हर युवा की परिस्थितियां अलग होती हैं, लेकिन किसी लक्ष्य के लिए लगातार प्रयास, कौशल विकास और कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होती है।
‘हर घर मुनगा’ से स्थानीय समाधान की चर्चा
कार्यक्रम में पोषण और जनभागीदारी से जुड़े ‘हर घर मुनगा, घर-घर मुनगा’ अभियान का भी उल्लेख हुआ। मुख्यमंत्री ने मुनगा को स्थानीय और आसानी से उपलब्ध पोषण स्रोत बताते हुए इसे घर-घर पहुंचाने की बात कही।
इस तरह के अभियानों में युवाओं की भूमिका केवल भागीदारी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। कृषि, पोषण, स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग और डिजिटल जागरूकता को जोड़कर युवा इससे नए सामाजिक और कारोबारी मॉडल भी विकसित कर सकते हैं।
मंच पर संस्कृति और युवाओं का उत्साह
कार्यक्रम में प्रसिद्ध कलाकार पीयूष मिश्रा ने छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति की सराहना की और पद्म विभूषण स्वर्गीय तीजन बाई के योगदान को याद किया। पंडवानी को व्यापक पहचान दिलाने में तीजन बाई की भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने उनकी कला को नई पीढ़ी के लिए महत्वपूर्ण विरासत बताया। कार्यक्रम में उन्होंने अपने चर्चित गीत ‘आरंभ है प्रचंड’ की प्रस्तुति भी दी।
यह पहलू भी महत्वपूर्ण है क्योंकि संस्कृति और युवा पीढ़ी का संबंध केवल विरासत बचाने तक सीमित नहीं है। लोककला, संगीत और स्थानीय कहानियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म, फिल्म, पर्यटन और रचनात्मक उद्योगों से जोड़कर नई आर्थिक संभावनाएं भी बनाई जा सकती हैं।
अब चुनौती संदेश को अवसर में बदलने की
यूथ कॉन्क्लेव जैसे आयोजन युवाओं को मंच और पहचान जरूर देते हैं, लेकिन इसका वास्तविक असर तब दिखाई देगा जब प्रतिभा को प्रशिक्षण, बाजार, पूंजी, तकनीक और रोजगार के अवसरों से जोड़ा जाए।
छत्तीसगढ़ के युवाओं के सामने आने वाले वर्षों में दोहरी चुनौती होगी—एक तरफ तेजी से बदलती तकनीक के अनुरूप खुद को तैयार करना और दूसरी तरफ अपनी स्थानीय पहचान तथा संसाधनों को नई अर्थव्यवस्था से जोड़ना।



