बिलासपुर में जेल से बाहर आते ही फिर भिड़े दो गुट, 22 वर्षीय युवक की चाकू से हत्या; बाइपास पर मिला शव
बिलासपुर: सिरगिट्टी थाना क्षेत्र का फदहाखार इलाका रविवार रात एक हिंसक वारदात से दहल उठा। पुरानी रंजिश और इलाके में वर्चस्व को लेकर हुए विवाद ने 22 वर्षीय ओम लहरे की जान ले ली। पुलिस के मुताबिक फदहाखार गेट के पास विवाद के बाद युवक पर धारदार हथियार से हमला किया गया। गंभीर रूप से घायल होने के बाद उसे कुछ दूर तक ले जाया गया और उसका शव फदहाखार-महमंद बाइपास के पास छोड़ दिया गया।
घटना की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपित सुनील निर्मलकर उर्फ कल्लू टाइगर समेत चार लोगों को हिरासत में लिया है। पूछताछ के आधार पर पुलिस अन्य संभावित आरोपितों की भूमिका भी खंगाल रही है। घटनास्थल पर फोरेंसिक टीम ने पहुंचकर जरूरी साक्ष्य जुटाए हैं।
पुरानी रंजिश ने फिर पकड़ा हिंसक रूप
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि मृतक ओम लहरे और मुख्य आरोपित के बीच पहले से विवाद चला आ रहा था। दोनों के खिलाफ पूर्व में आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस के अनुसार दोनों कुछ दिन पहले ही जेल से बाहर आए थे और इसके बाद पुरानी दुश्मनी को लेकर तनाव बना हुआ था।
यही पहलू इस मामले को सामान्य आपसी विवाद से अलग बनाता है। यदि किसी इलाके में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के बीच पुरानी रंजिश लगातार बनी रहे और जेल से बाहर आने के बाद भी विवाद दोबारा शुरू हो जाए, तो पुलिस की निगरानी और संभावित हिंसा की पूर्व सूचना पर कार्रवाई महत्वपूर्ण हो जाती है।
रात करीब नौ बजे शुरू हुआ विवाद
पुलिस के अनुसार रविवार रात करीब नौ बजे फदहाखार गेट के पास ओम का सुनील निर्मलकर उर्फ कल्लू टाइगर से विवाद हुआ। इसके बाद उस पर चाकू से हमला किए जाने की बात सामने आई है। गंभीर चोट लगने के बाद उसे घसीटकर बाइपास की तरफ ले जाने और वहां शव छोड़ने की जानकारी पुलिस जांच में सामने आई है।
घटना की सूचना मिलते ही सिरगिट्टी पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया। फोरेंसिक टीम द्वारा जुटाए गए साक्ष्य अब जांच में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
चार संदिग्ध हिरासत में, आगे की जांच जारी
मुख्य आरोपित से पूछताछ के बाद पुलिस ने राजेश यादव, आदि ध्रुव और रोहित ध्रुव को भी हिरासत में लिया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि वारदात में किसकी क्या भूमिका थी और घटना के पीछे तत्काल विवाद किस बात को लेकर शुरू हुआ था।
ऐसे मामलों में केवल पुराने विवाद की जानकारी पर्याप्त नहीं होती। जांच एजेंसी को यह भी स्थापित करना होता है कि घटना के समय कौन-कौन मौजूद था, हमला किस परिस्थिति में हुआ और बाद में शव को दूसरी जगह ले जाने में किन लोगों की भूमिका रही। बरामद साक्ष्य, पूछताछ और अन्य तकनीकी जांच से इन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं।
जेल से छूटने के बाद फिर आमना-सामना बना अहम कड़ी
मामले में सामने आया है कि ओम लहरे और सुनील निर्मलकर दोनों को पहले धारदार हथियार रखने के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। जेल से बाहर आने के कुछ समय बाद ही दोनों के बीच पुरानी रंजिश फिर सामने आई।
यह पहलू जांच के साथ-साथ स्थानीय कानून-व्यवस्था के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। किसी पुराने विवाद से जुड़े लोगों की गतिविधियों पर निगरानी, संभावित टकराव की सूचना मिलने पर समय रहते हस्तक्षेप और संवेदनशील इलाकों में पुलिस की मौजूदगी ऐसी घटनाओं को रोकने में अहम हो सकती है।
पुलिस के सामने अब इन सवालों के जवाब तलाशना चुनौती
फिलहाल पुलिस की जांच तीन प्रमुख बिंदुओं पर आगे बढ़ रही है—हत्या की तत्काल वजह क्या थी, वारदात में कितने लोग शामिल थे और घटना के बाद शव को बाइपास तक ले जाने में किसकी भूमिका रही।



