सोने-चांदी का हंडा दिखाकर 6 लाख की ठगी, 6 आरोपी गिरफ्तार; फर्जी पुलिस चेकिंग से खुला खेल, पुलिसकर्मी की भूमिका पर भी सवाल
बिलासपुर: सोना-चांदी मिलने का लालच देकर लोगों को ठगने वाले गिरोह का मामला सामने आने के बाद बेलगहना पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि गिरोह ने मुंगेली के विष्णु बघेल को कथित तौर पर सोने-चांदी से भरा हंडा दिखाकर छह लाख रुपये देने के लिए तैयार किया और रकम लेने के बाद रास्ते में फर्जी पुलिस चेकिंग कर उसी हंडे को वापस अपने कब्जे में ले लिया।
पुलिस की कार्रवाई में कोटा और मुंगेली क्षेत्र से छह संदिग्धों को पकड़ा गया है। आरोपियों के कब्जे से ठगी की रकम में से उपलब्ध राशि और घटना में इस्तेमाल मोटरसाइकिल जब्त किए जाने की बात पुलिस ने कही है। मामले में कुछ अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
पहले लालच, फिर पुलिस का डर—ठगी का पूरा खेल
मामले की कहानी में ठगी का तरीका सबसे ज्यादा ध्यान खींचता है। मुंगेली जिले के सेतगंगा थाना क्षेत्र के गाड़ाघाट निवासी विष्णु बघेल के अनुसार, 31 अगस्त की रात करीब 11 बजे उसे कुछ लोगों ने सोने-चांदी का हंडा दिखाया। कथित तौर पर उसे यह विश्वास दिलाया गया कि हंडे में कीमती धातु है और इसके बदले छह लाख रुपये देने पर उसे बड़ा फायदा हो सकता है।
रकम देने के बाद कहानी का दूसरा हिस्सा शुरू हुआ। शिकायत के अनुसार, रास्ते में कुछ लोगों ने खुद को पुलिसकर्मी बताकर वाहन रोका और जांच के नाम पर हंडा अपने कब्जे में ले लिया। इस तरह पीड़ित के सामने ऐसा माहौल बनाया गया कि वह न तो रकम वापस पा सका और न ही कथित कीमती हंडा।
यही तरीका इस मामले को सामान्य ठगी से अलग बनाता है। गिरोह ने कथित तौर पर लालच के साथ सरकारी कार्रवाई का डर भी इस्तेमाल किया।
22 सितंबर को शिकायत, चार दिन बाद मिली अहम सूचना
घटना 31 अगस्त की बताई गई है, जबकि पीड़ित ने 22 सितंबर को बेलगहना चौकी में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज करने के बाद आरोपियों की तलाश शुरू की और वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी दी।
जांच के दौरान 26 सितंबर को पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि मामले से जुड़े कुछ लोग मुंगेली और कोटा क्षेत्र में मौजूद हैं। इसके बाद अलग-अलग स्थानों पर दबिश देकर छह लोगों को हिरासत में लिया गया।
पुलिस के अनुसार पूछताछ के दौरान आरोपियों ने ठगी की रकम आपस में बांटने की बात बताई। उनके कथित मेमोरेंडम के आधार पर कुछ रकम बरामद की गई है। हालांकि पूरी रकम की बरामदगी और अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच अभी जारी है।
कौन-कौन पकड़े गए?
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान किशन साहू उर्फ पसउ बैगा (35), संजय पनिक (58), प्रताप श्रीवास (40), अजय हठिले (24), रामप्रकाश जायसवाल उर्फ छोटू (26) और अभय बंजारे (21) के रूप में हुई है। ये आरोपी कोटा, मुंगेली और आसपास के इलाकों के निवासी बताए गए हैं।
पुलिस अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि गिरोह में और कितने लोग शामिल थे और क्या इसी तरीके से पहले भी किसी अन्य व्यक्ति को निशाना बनाया गया था।
पुलिसकर्मी के नाम ने बढ़ाई जांच की गंभीरता
मामले का सबसे संवेदनशील पहलू एक पुलिसकर्मी की कथित भूमिका से जुड़ा है। पीड़ित ने आरोप लगाया है कि मुंगेली जिले में पदस्थ एक पुलिसकर्मी भी इस पूरे घटनाक्रम में शामिल था और उसी ने कथित तौर पर फर्जी पुलिस चेकिंग की भूमिका निभाई।
पीड़ित के अनुसार उसने संबंधित पुलिसकर्मी को मुंगेली कलेक्टोरेट के सामने पहचान लिया और पुलिस को इसकी जानकारी दी। आरोप यह भी लगाया जा रहा है कि उक्त पुलिसकर्मी को अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया, जिसके चलते उसे बचाने के सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। कोटा एसडीओपी नूपुर उपाध्याय के अनुसार, पीड़ित ने एक पुलिसकर्मी पर आरोप लगाए हैं और मामले की जांच की जा रही है। पुलिस के मुताबिक, संबंधित व्यक्ति की भूमिका स्पष्ट होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सिर्फ ठगी नहीं, पुलिस की विश्वसनीयता का भी सवाल
अगर जांच में पुलिसकर्मी की कथित भूमिका साबित होती है तो मामला केवल छह लाख रुपये की ठगी तक सीमित नहीं रहेगा। पुलिस की वर्दी या पहचान का इस्तेमाल कर किसी अपराध को अंजाम देना आम नागरिक के भरोसे पर सीधा असर डालता है।
इसी कारण इस मामले में बरामदगी और गिरफ्तारियों के साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस कथित पुलिसकर्मी की भूमिका की निष्पक्ष जांच कैसे करती है। जांच में कॉल डिटेल, मोबाइल लोकेशन, आपसी संपर्क, घटना के समय मौजूद लोगों की पहचान, रकम के लेन-देन और कथित फर्जी चेकिंग में इस्तेमाल साधनों जैसे साक्ष्य अहम हो सकते हैं।
लालच के साथ सरकारी डर का इस्तेमाल बना बड़ा सबक
ऐसे मामलों में ठगी करने वाले सिर्फ पैसे का लालच नहीं देते, बल्कि पीड़ित को ऐसी परिस्थितियों में डालने की कोशिश कर सकते हैं जहां वह बाद में शिकायत करने से भी डर जाए। इस घटना में कथित तौर पर पहले कीमती धातु का लालच और फिर पुलिस जांच का भय इस्तेमाल किया गया।
किसी भी व्यक्ति को सड़क किनारे अचानक सोना, चांदी या कीमती धातु मिलने और कम कीमत में देने की कहानी सुनाई जाए तो बिना प्रमाण के पैसे देना जोखिम भरा है। इसी तरह कोई व्यक्ति पुलिस अधिकारी होने का दावा करे तो उसकी पहचान और कार्रवाई की वैधता की पुष्टि करना जरूरी है।



