बिलासपुर सेंट्रल जेल में बड़ा बवाल: वीडियो बनाने से रोकने पर प्रहरी से मारपीट, 2 पर केस
बिलासपुर: जेल परिसर में सुरक्षा नियमों का पालन कराने की कोशिश उस वक्त विवाद में बदल गई, जब बिलासपुर सेंट्रल जेल में कैदियों का कथित तौर पर मोबाइल से वीडियो बना रहे दो युवकों ने ड्यूटी पर तैनात जेल प्रहरी के साथ मारपीट कर दी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर दोनों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
घटना 1 अक्टूबर की बताई जा रही है। पुलिस के अनुसार केंद्रीय जेल में घर मुलाकाती ड्यूटी पर तैनात प्रहरी पुरुषोत्तम सिंह पोटाम ने दो युवकों को जेल परिसर में वीडियो बनाने से रोका था। इसके बाद विवाद बढ़ गया और आरोप है कि दोनों ने प्रहरी के साथ गाली-गलौज, धक्कामुक्की और मारपीट की।
वीडियो बनाने से शुरू हुआ विवाद
जेल परिसर में मुलाकातियों और आगंतुकों की गतिविधियां सामान्य सार्वजनिक स्थानों जैसी नहीं होतीं। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए वहां मोबाइल फोन और रिकॉर्डिंग पर प्रतिबंध महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पुलिस शिकायत के मुताबिक, श्रीयांश सिंह और शंभू यादव नाम के दो व्यक्ति केंद्रीय जेल पहुंचे थे। आरोप है कि वे अपने मोबाइल फोन से कैदियों का वीडियो बना रहे थे। प्रहरी ने उन्हें ऐसा करने से मना किया और जेल परिसर में मोबाइल के इस्तेमाल से जुड़े नियमों की जानकारी दी।
इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद हो गया। आरोप है कि युवकों ने प्रहरी से गाली-गलौज और मारपीट की। इस दौरान प्रहरी को चोटें आईं और उनका ऑन-ड्यूटी बैच भी खींचकर तोड़ दिया गया।
मामला सिर्फ एक झगड़े तक सीमित नहीं
जेल में किसी कैदी की तस्वीर या वीडियो बनाना सामान्य सोशल मीडिया कंटेंट तैयार करने जैसा मामला नहीं है। वीडियो में कैदी, मुलाकाती क्षेत्र, सुरक्षा व्यवस्था या जेल परिसर की संरचना से जुड़ी ऐसी जानकारी दिखाई दे सकती है, जिसका सार्वजनिक प्रसार सुरक्षा व्यवस्था के लिए परेशानी पैदा कर सकता है।
इसी वजह से जेल प्रशासन के लिए मोबाइल नियंत्रण केवल अनुशासन का विषय नहीं, बल्कि सुरक्षा प्रोटोकॉल का हिस्सा है। खासकर तब, जब रिकॉर्ड किए गए वीडियो कुछ ही मिनटों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच सकते हैं।
वायरल रील्स के बाद बदले नियम
जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी के मुताबिक, केंद्रीय जेल परिसर में मोबाइल फोन प्रतिबंधित है और कैदियों से मुलाकात के लिए आने वाले परिजन भी मोबाइल अंदर नहीं ले जा सकते।
प्रशासन के अनुसार पहले जेल परिसर में मोबाइल को लेकर ऐसी सख्ती नहीं थी। इस दौरान कैदियों के साथ बातचीत और जन्मदिन मनाने से जुड़े वीडियो बनाए गए, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। इसके बाद जेल प्रशासन ने परिसर में मोबाइल पर प्रतिबंध लागू किया।
यह बदलाव बताता है कि सोशल मीडिया ने जेल प्रशासन के सामने सुरक्षा की एक नई चुनौती खड़ी की है। किसी घटना का वीडियो एक बार ऑनलाइन आने के बाद उसके प्रसार को पूरी तरह नियंत्रित करना मुश्किल होता है।
प्रहरी की शिकायत पर पुलिस की कार्रवाई
प्रहरी ने आरोप लगाया कि दोनों युवकों ने सरकारी ड्यूटी में बाधा डालने के उद्देश्य से उनके साथ मारपीट और दुर्व्यवहार किया। शिकायत मिलने के बाद सिविल लाइन पुलिस ने मामले की जांच की और श्रीयांश सिंह तथा शंभू यादव के खिलाफ अपराध दर्ज किया है।
आगे की कानूनी कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।
जेल सुरक्षा के लिए आगे क्या चुनौती?
इस घटना से जेल प्रशासन के सामने दो स्तर की चुनौती स्पष्ट होती है—पहली, मुलाकातियों और आगंतुकों से सुरक्षा नियमों का पालन कराना; दूसरी, मोबाइल कैमरे और सोशल मीडिया के दौर में संवेदनशील सामग्री की रिकॉर्डिंग को रोकना।
विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे स्थानों पर स्पष्ट नियम, प्रवेश से पहले प्रभावी जांच और नियम तोड़ने पर तत्काल कार्रवाई व्यवस्था को मजबूत कर सकती है। साथ ही मुलाकातियों को पहले से यह स्पष्ट जानकारी देना भी जरूरी है कि किन वस्तुओं और गतिविधियों की अनुमति नहीं है।
बिलासपुर की यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां विवाद की शुरुआत एक वीडियो रिकॉर्डिंग से हुई, लेकिन मामला ड्यूटी पर तैनात प्रहरी से कथित मारपीट और सरकारी कार्य में बाधा तक पहुंच गया। अब जांच का केंद्र यह रहेगा कि घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ और जेल परिसर में मोबाइल इस्तेमाल करने की कोशिश के पीछे केवल वीडियो बनाना था या इसके पीछे कोई अन्य उद्देश्य भी था।



