बस्तर में नशे के कारोबार पर कड़ा शिकंजा, 56 कैप्सूल के साथ युवक गिरफ्तार
जगदलपुर: बस्तर में नशीली दवाओं की अवैध बिक्री पर पुलिस की कार्रवाई लगातार तेज होती दिख रही है। जगदलपुर के कोतवाली थाना क्षेत्र में पुलिस ने कथित तौर पर नशीली कैप्सूल बेचने की तैयारी कर रहे एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 56 कैप्सूल बरामद किए गए, जिन्हें सात पत्तों में रखा गया था। पुलिस के अनुसार जब्त कैप्सूल की अनुमानित कीमत करीब 2,800 रुपये है।
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार युवक की पहचान डोंगाघाट निवासी 28 वर्षीय संदीप नाग के रूप में हुई है। कार्रवाई मगडूं कचौरा रोड पर गोयल बाड़ी के पास की गई।
सूचना से शुरू हुई कार्रवाई, घेराबंदी में पकड़ा गया युवक
पुलिस को सूचना मिली थी कि गोयल बाड़ी के आसपास एक युवक नशीली कैप्सूल बेचने के लिए मौजूद है। सूचना की पुष्टि के बाद कोतवाली पुलिस की टीम ने मौके पर पहुंचकर निगरानी और घेराबंदी की।
मुखबिर द्वारा बताए गए हुलिए के आधार पर पुलिस ने संदीप नाग को पकड़ा। तलाशी के दौरान उसके पास से Dicyclomine HCl, Tramadol HCl और Acetaminophen युक्त Pyeevon Spas Plus कैप्सूल के सात पत्ते बरामद किए गए। इनमें कुल 56 कैप्सूल बताए गए हैं।
पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान आरोपी इन कैप्सूल को रखने के संबंध में वैध दस्तावेज या संतोषजनक जानकारी प्रस्तुत नहीं कर सका। पुलिस के अनुसार उसने कैप्सूल बेचने की बात स्वीकार की, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
छोटी बरामदगी, लेकिन जांच का दायरा बड़ा
ऐसे मामलों में बरामद दवाओं की संख्या से ज्यादा महत्वपूर्ण यह पता लगाना होता है कि वे कहां से आईं और किसे बेची जानी थीं। नशीली दवाओं की अवैध बिक्री का नेटवर्क अक्सर खुदरा स्तर से दिखाई देता है, जबकि उसके पीछे सप्लाई चैन, खरीदारों और स्थानीय संपर्कों की भूमिका की जांच जरूरी होती है।
यही वजह है कि इस मामले में पुलिस की अगली जांच केवल 56 कैप्सूल की बरामदगी तक सीमित नहीं रहेगी। यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि आरोपी को कैप्सूल की आपूर्ति किसने की, पहले भी ऐसी बिक्री हुई थी या नहीं और संभावित खरीदार कौन थे।
कानूनी कार्रवाई के साथ नेटवर्क की जांच अहम
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ NDPS एक्ट की धारा 21(B) के तहत कार्रवाई की है। उसे न्यायिक रिमांड पर विशेष न्यायालय NDPS, जगदलपुर भेजे जाने की जानकारी दी गई है। आगे की कानूनी प्रक्रिया अदालत और जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों पर निर्भर करेगी।
विशेषज्ञों के नजरिए से देखें तो दवाओं के दुरुपयोग से जुड़े मामलों में प्रवर्तन के साथ-साथ मेडिकल सप्लाई चैन की निगरानी भी महत्वपूर्ण है। वैध दवा और उसके अवैध इस्तेमाल के बीच अंतर स्पष्ट करने के लिए खरीद-बिक्री के दस्तावेज, स्रोत और वितरण व्यवस्था की जांच अहम साक्ष्य बन सकती है।
बस्तर में नशे के खिलाफ कार्रवाई क्यों मायने रखती है?
बस्तर में नशीली कैप्सूल की कार्रवाई सिर्फ एक गिरफ्तारी की खबर नहीं है। यह इस बात की ओर भी ध्यान खींचती है कि प्रतिबंधित या नियंत्रित दवाओं की अवैध बिक्री को रोकने के लिए पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और दवा विक्रेताओं के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत है।
अगर जांच में किसी संगठित सप्लाई चैन के संकेत मिलते हैं, तो कार्रवाई को केवल स्थानीय स्तर के आरोपी तक सीमित रखने के बजाय पूरे नेटवर्क तक पहुंचाना अधिक महत्वपूर्ण होगा। इससे अवैध दवा कारोबार की जड़ तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल आरोपी न्यायिक रिमांड पर है और पुलिस की जांच आगे जारी है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि पूछताछ और जांच से इस कथित अवैध कारोबार से जुड़े और कौन से तथ्य सामने आते हैं।



