शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भारत की भागीदारी केवल कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की रणनीतिक सोच का भी हिस्सा है। सवाल यह है कि क्या भारत इस मंच पर चीन के दबाव में समर्पण करेगा या फिर रणनीतिक चाल चलते हुए दुनिया को नया संदेश देगा।

India की कूटनीतिक रणनीति
भारत लगातार यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि उसकी विदेश नीति स्वतंत्र और बहुस्तरीय है। चीन और रूस के साथ संबंध बनाए रखते हुए भारत पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका के साथ भी अपने रिश्ते मजबूत कर रहा है।
US के लिए संदेश
एक्सपर्ट्स का मानना है कि SCO शिखर सम्मेलन में भारत का रुख अमेरिका के लिए एक परोक्ष संदेश होगा कि भारत किसी एक खेमे पर निर्भर नहीं है। इस कदम से भारत यह भी संकेत देगा कि वह अपनी शर्तों पर साझेदारी करता है, चाहे वह चीन और रूस हों या फिर अमेरिका और यूरोप।
चीन के साथ जटिल संबंध
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद अभी भी सुलझा नहीं है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत व्यावहारिक रणनीति अपनाता रहा है। SCO में भारत की मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि वह कूटनीतिक स्तर पर चीन को पूरी तरह अलग-थलग नहीं करना चाहता।
SCO के मंच से मोदी दुनिया को क्या संदेश देंगे?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में मौजूदगी को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई कयास लगाए जा रहे हैं। सवाल यह है कि मोदी इस मंच से दुनिया को क्या संदेश देंगे और भारत किस रणनीतिक चाल के साथ आगे बढ़ेगा।
चीन की ताकत और भारत का रुख
विदेश नीति विशेषज्ञ रोबिन्दर सचदेव का कहना है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग SCO के मंच से शक्ति प्रदर्शन की कोशिश करेंगे। हालांकि, भारत यह कतई नहीं दिखने देगा कि वह चीन की “छतरी” के नीचे काम कर रहा है।
उन्होंने कहा कि,
“भारत चीन के लाभ वाले किसी भी डॉक्यूमेंट पर साइन नहीं करेगा। हाल ही में चीन में हुई SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक इसका उदाहरण है, जहां रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कई बिंदुओं पर मतभेद के कारण दस्तावेजों पर हस्ताक्षर नहीं किए थे।”
क्यों भारत के लिए SCO महत्वपूर्ण है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि SCO में भारत की भूमिका बेहद अहम है। चीन इस संगठन में सूत्रधार की भूमिका निभाना चाहता है, लेकिन भारत भी “को-डायरेक्टर” की तरह सक्रिय भूमिका निभा रहा है। भले ही चीन के पास बढ़त हो, लेकिन भारत भी इस मंच पर अपनी उपस्थिति को और मजबूत करने के लिए तैयार है।
आर्थिक फायदे की उम्मीद
भारत के लिए SCO केवल कूटनीति का मंच नहीं, बल्कि आर्थिक लाभ का अवसर भी है। इस संगठन से भारत को व्यापार, ऊर्जा और क्षेत्रीय सहयोग के नए रास्ते मिल सकते हैं। यही कारण है कि भारत इस मंच पर ज्यादा फोकस करने जा रहा है। (PM Modi China Visit 2025)
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