बीजिंग: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस हफ्ते चीन की ऐतिहासिक यात्रा पर जाने वाले हैं। यह सात साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की चीन यात्रा होगी और इसे भारत-चीन संबंधों में नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मुलाकात की पृष्ठभूमि में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का एक सीक्रेट लेटर अहम कड़ी साबित हुआ है।

ब्लूमबर्ग रिपोर्ट का बड़ा दावा
ब्लूमबर्ग ने भारतीय अधिकारियों के हवाले से खुलासा किया कि मार्च 2025 में जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव चरम पर था, उसी दौरान शी जिनपिंग ने भारत से संपर्क साधा। बताया जाता है कि राष्ट्रपति जिनपिंग ने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक निजी पत्र भेजकर दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत करने का प्रस्ताव रखा।
अमेरिका को लेकर जताई चिंता
रिपोर्ट के मुताबिक, इस पत्र में बेहद सावधानी से शब्दों का चयन किया गया था। जिनपिंग ने अमेरिका की आर्थिक नीतियों और समझौतों पर गहरी चिंता जताई, जिन्हें चीन के हितों के लिए नुकसानदायक बताया गया। साथ ही, भारत और चीन के बीच नई कूटनीतिक पहल और सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
पीएम मोदी तक पहुंचा संदेश
सूत्रों का कहना है कि यह पत्र सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचाया गया और इसमें उन सभी अमेरिकी समझौतों का जिक्र था, जो बीजिंग के लिए चुनौती बन सकते थे। रिपोर्ट में दावा किया गया कि चीन ने इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए एक वरिष्ठ क्षेत्रीय प्रशासक को नियुक्त करने का भी प्रस्ताव रखा था।
भारत-चीन रिश्तों में निर्णायक मोड़
विशेषज्ञों का मानना है कि शी जिनपिंग का यह गुप्त पत्र दोनों देशों के रिश्तों में निर्णायक मोड़ साबित हुआ। यही वजह है कि मोदी की आगामी चीन यात्रा को सिर्फ एक कूटनीतिक दौरा नहीं, बल्कि भारत-चीन संबंधों की नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

