सरगुजा में हाथियों का खौफनाक कहर: 26 हाथियों से सहमे गांव, फसल और घरों का भारी नुकसान
सरगुजा: उदयपुर क्षेत्र में जंगली हाथियों की मौजूदगी ने ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। करमकठरा जंगल से निकलकर हाथियों का दल शाम होते ही गांवों की ओर पहुंच रहा है। इससे जहां धान और दूसरी फसलों को नुकसान हो रहा है, वहीं ग्रामीणों को रातभर जागकर अपने घर और परिवार की सुरक्षा करनी पड़ रही है। इलाके में करीब 26 हाथियों की मौजूदगी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
लक्ष्मणगढ़ और रामनगर में पहुंचे सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। ग्रामीणों ने बताया कि हाथियों के गांव में पहुंचते ही उन्हें घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ता है। रामनगर में हाथी एक घर को क्षतिग्रस्त कर चुका है, जबकि कई किसानों की फसल बर्बाद हुई है।
फसल बचाने की कोशिश में जान जोखिम में डाल रहे ग्रामीण
हाथियों और ग्रामीणों के बीच बढ़ता टकराव केवल फसल के नुकसान का मामला नहीं है। खेतों में खड़ी फसल ग्रामीण परिवारों की आय और खाद्य सुरक्षा से सीधे जुड़ी होती है। ऐसे में किसान अपनी मेहनत बचाने के लिए कई बार हाथियों को भगाने की कोशिश करते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष में जान का खतरा बढ़ जाता है।
वन विभाग और सांसद ने ग्रामीणों से ऐसी कोशिशों से बचने की अपील की है। अधिकारियों के मुताबिक फसल और मकान के नुकसान का आकलन कर मुआवजा देने की प्रक्रिया की जा रही है। एसडीओ फॉरेस्ट सपना मुखर्जी के अनुसार, प्रभावित ग्रामीणों को करीब एक सप्ताह के भीतर मुआवजा उपलब्ध कराया जा रहा है।
शावक की मौत के बाद बढ़ी चिंता
इस क्षेत्र में हाल ही में हाथियों के एक शावक की करंट लगने से मौत हुई थी। सांसद चिंतामणि महाराज ने घटनास्थल पर पहुंचकर मामले की जानकारी ली। उन्होंने फसलों की सुरक्षा के लिए लगाए गए तरंगित तारों को हटाने के निर्देश दिए।
यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि खेतों की सुरक्षा के लिए लगाए गए असुरक्षित विद्युत तार केवल वन्यजीवों के लिए ही नहीं, बल्कि ग्रामीणों के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं। मानव-वन्यजीव संघर्ष वाले इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो फसल की रक्षा करे, लेकिन हाथियों और इंसानों दोनों की जान को जोखिम में न डाले।
आठ पंडो परिवारों की अलग समस्या भी सामने आई
ग्रामीणों से बातचीत के दौरान केवल हाथियों से जुड़ी परेशानी ही सामने नहीं आई। रामनगर में बस्ती से अलग रह रहे आठ पंडो परिवारों के बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र तक पहुंचने के लिए एक किलोमीटर से अधिक दूरी तय करनी पड़ती है।
सांसद ने इन परिवारों के लिए स्थानीय स्तर पर आंगनबाड़ी सुविधा उपलब्ध कराने की पहल का भरोसा दिया है। ग्रामीणों ने बारिश के दौरान नाले पर पुलिया नहीं होने से होने वाली परेशानी भी बताई। पुलिया निर्माण की मांग पर भी संबंधित स्तर पर पहल का आश्वासन दिया गया।
सिर्फ मुआवजा नहीं, स्थायी समाधान की जरूरत
सरगुजा की मौजूदा स्थिति यह सवाल भी उठाती है कि हाथियों के बार-बार गांवों की ओर आने की समस्या का दीर्घकालिक समाधान कैसे निकले। तत्काल राहत के तौर पर मुआवजा जरूरी है, लेकिन लगातार फसल नुकसान होने पर ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है।
ऐसे इलाकों में हाथियों की आवाजाही के रास्तों की नियमित निगरानी, समय रहते ग्रामीणों को चेतावनी, सुरक्षित फसल सुरक्षा उपाय और वन विभाग की त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था महत्वपूर्ण हो जाती है। स्थानीय समुदाय को भी वन विभाग की निगरानी व्यवस्था से जोड़ना संघर्ष की स्थिति को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।



