Dengue Symptoms: बदलते मौसम का खतरनाक संकेत, बुखार उतरने के बाद भी इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
मौसम बदलते ही बुखार को सामान्य वायरल समझ लेना आसान है। लेकिन बरसात और उसके बाद के उमस भरे दिनों में एक ऐसा संक्रमण भी सक्रिय रहता है जिसके शुरुआती लक्षण आम बुखार जैसे ही हो सकते हैं। यही वजह है कि डेंगू की पहचान में केवल तापमान देखना पर्याप्त नहीं है।
डेंगू संक्रमित Aedes मच्छर के काटने से फैलने वाला वायरल संक्रमण है। WHO के मुताबिक इसके लक्षण आमतौर पर संक्रमण के 4 से 10 दिन बाद सामने आ सकते हैं और इनमें तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों व जोड़ों में दर्द, मतली, उल्टी और कभी-कभी त्वचा पर चकत्ते शामिल हैं।
डेंगू में सबसे बड़ी गलती सिर्फ बुखार को देखना है
डेंगू का शुरुआती चरण कई दूसरे वायरल संक्रमणों जैसा लग सकता है। इसलिए 102°F या उससे अधिक बुखार अपने आप में डेंगू की पुष्टि नहीं करता।
लेकिन अगर बुखार के साथ तेज सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर या जोड़ों में तेज दर्द, उल्टी अथवा असामान्य कमजोरी जुड़ जाए, तो डॉक्टर से संपर्क करना उचित है। डेंगू की पुष्टि लक्षणों के साथ चिकित्सकीय जांच और जरूरत के अनुसार रक्त परीक्षण से की जाती है।
सबसे जरूरी बात: बुखार उतरना हमेशा राहत की खबर नहीं
डेंगू को लेकर सबसे कम समझी जाने वाली बात बीमारी का वह चरण है जब तापमान नीचे आने लगता है।
WHO के अनुसार गंभीर डेंगू के चेतावनी संकेत बीमारी के शुरुआती लक्षणों के करीब 3 से 7 दिन बाद सामने आ सकते हैं और यह उस समय भी हो सकता है जब बुखार कम हो रहा हो। इसलिए केवल यह देखकर निश्चिंत होना कि तापमान सामान्य होने लगा है, सही नहीं है।
इन संकेतों पर तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत हो सकती है:
- तेज या लगातार पेट दर्द
- बार-बार उल्टी
- नाक या मसूड़ों से खून आना
- उल्टी या मल में खून
- तेज सांस चलना
- अत्यधिक कमजोरी या बेचैनी
- बहुत ज्यादा प्यास लगना
- त्वचा का पीला, ठंडा या चिपचिपा होना
ऐसे लक्षणों में घर पर इंतजार करने के बजाय तुरंत स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल जाना चाहिए।
डेंगू के मच्छर को रोकना सिर्फ शाम का काम नहीं
Aedes मच्छर की एक खास बात यह है कि यह दिन में भी काटता है। इसलिए केवल रात में मच्छरदानी लगाने या रात के समय मच्छर भगाने पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। WHO दिन के समय भी रिपेलेंट, शरीर को ढकने वाले कपड़े और घर में स्क्रीन जैसे उपायों की सलाह देता है।
घर के आसपास पानी जमा होने वाले छोटे स्थान भी महत्वपूर्ण हैं। कूलर, गमले, बाल्टी, पुराने टायर, बोतल या अन्य कंटेनर में जमा पानी मच्छरों के प्रजनन का स्थान बन सकता है।
सप्ताह में कम से कम एक बार पानी रखने वाले कंटेनरों को खाली और साफ करना तथा उन्हें ढककर रखना बचाव की बुनियादी रणनीति है।
प्लेटलेट्स को लेकर हर वायरल मैसेज पर भरोसा न करें
डेंगू के दौरान प्लेटलेट काउंट की चर्चा बहुत होती है, लेकिन मरीज की स्थिति का फैसला केवल एक प्लेटलेट संख्या देखकर नहीं किया जाता। बीमारी के चरण, रक्तस्राव, शरीर में तरल पदार्थ की स्थिति और दूसरे चिकित्सकीय संकेत भी महत्वपूर्ण होते हैं।
इसी तरह पपीते के पत्तों के रस को प्लेटलेट बढ़ाने का पक्का इलाज मानकर डॉक्टर की निगरानी छोड़ना उचित नहीं है। डेंगू का कोई विशिष्ट एंटीवायरल इलाज उपलब्ध नहीं है; उपचार मुख्यतः निगरानी, पर्याप्त तरल, आराम और लक्षणों के प्रबंधन पर आधारित होता है।
एक दवा ऐसी है जिसे खुद से लेना नुकसानदायक हो सकता है
बुखार में लोग अक्सर अपनी तरफ से दर्द की दवा ले लेते हैं। डेंगू का संदेह होने पर यह आदत जोखिम बढ़ा सकती है।
WHO के अनुसार डेंगू में aspirin और ibuprofen जैसी NSAID दवाओं से बचना चाहिए, क्योंकि ये रक्तस्राव का जोखिम बढ़ा सकती हैं। बुखार और दर्द के लिए पैरासिटामोल का इस्तेमाल चिकित्सकीय सलाह के अनुसार किया जा सकता है।
इसलिए तेज बुखार में दवा लेने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्यकर्मी की सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित है।
डेंगू से बचाव की असली शुरुआत घर से होती है
डेंगू के मामले बढ़ने के बाद सिर्फ अस्पतालों पर निर्भर रहना प्रभावी रणनीति नहीं है। मच्छरों के प्रजनन स्थल खत्म करना सामुदायिक स्तर पर सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक है।
घर में जमा पानी की नियमित जांच, पानी के बर्तनों को ढककर रखना, बेकार कंटेनरों को हटाना और दिन में भी मच्छरों से बचाव करना बीमारी के जोखिम को कम करने में मदद करता है। WHO भी डेंगू नियंत्रण में मच्छर के प्रजनन स्थलों को खत्म करने और व्यक्तिगत सुरक्षा को महत्वपूर्ण मानता है।



