रात की नींद से समझौता पड़ सकता है दिल पर भारी, सिर्फ 7 घंटे नहीं… नींद की क्वालिटी भी है जरूरी
नई दिल्ली। देर रात तक मोबाइल चलाना, काम का दबाव, पढ़ाई और बदलती दिनचर्या ने नींद को ऐसी चीज बना दिया है जिसे लोग अक्सर सबसे पहले नजरअंदाज कर देते हैं। कई लोगों के लिए रोज 5-6 घंटे सोना सामान्य दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। लेकिन विशेषज्ञों और वैज्ञानिक शोधों के मुताबिक नींद को केवल थकान मिटाने का समय समझना सही नहीं है। नींद की अवधि, उसकी नियमितता, निरंतरता और गुणवत्ता—सभी का संबंध हृदय और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य से है।
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) ने 2025 के अपने वैज्ञानिक बयान में नींद को हृदय स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण हिस्सों में शामिल किया है। रिपोर्ट के अनुसार अपर्याप्त या खराब नींद का संबंध हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, स्ट्रोक, मोटापा, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल से जुड़े जोखिम कारकों से पाया गया है। हालांकि शोध अभी यह साबित नहीं करता कि हर व्यक्ति में कम नींद सीधे तौर पर बीमारी का कारण बनेगी।
सिर्फ घंटे गिनना काफी नहीं
स्वस्थ वयस्कों के लिए आम तौर पर हर रात 7 से 9 घंटे की नींद का लक्ष्य रखा जाता है। AHA के अनुसार अधिकांश वयस्कों के लिए 7-9 घंटे उपयुक्त हैं, जबकि American Academy of Sleep Medicine नियमित रूप से कम से कम 7 घंटे सोने की सलाह देती है।
लेकिन नींद की सेहत का सवाल केवल यह नहीं है कि व्यक्ति कितने घंटे बिस्तर पर रहा। अगर कोई व्यक्ति आठ घंटे बिस्तर पर रहने के बावजूद बार-बार जागता है, सोने में बहुत समय लगता है या सुबह उठकर भी लगातार थका हुआ महसूस करता है, तो नींद की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
AHA ने नींद के कई पहलुओं—अवधि, नियमितता, समय, लगातार नींद, संतुष्टि और दिन के समय जागरूकता—को हृदय एवं मेटाबॉलिक स्वास्थ्य से जोड़कर देखा है।
नींद के दौरान ब्लड प्रेशर में क्या होता है?
सामान्य नींद के दौरान रक्तचाप दिन की तुलना में नीचे जाता है। इसे शरीर की सामान्य रात्रिकालीन प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता है। लेकिन नींद में लगातार खलल या नींद की कमी इस प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।
CDC के अनुसार नींद की समस्या में रक्तचाप अधिक समय तक ऊंचा रह सकता है और हाई ब्लड प्रेशर आगे चलकर हृदय रोग तथा स्ट्रोक के जोखिम से जुड़ा है।
यही वजह है कि लगातार खराब नींद को केवल “सुबह थकान” के रूप में देखना पर्याप्त नहीं है। अगर नींद की समस्या लंबे समय तक बनी हुई है, तो उसके पीछे मौजूद कारण को समझना जरूरी है।
रोज अलग-अलग समय पर सोना भी बन सकता है समस्या
मान लीजिए कोई व्यक्ति सोमवार से शुक्रवार तक रात 1 बजे सोता है और सुबह जल्दी उठता है, लेकिन सप्ताहांत में कई घंटे देर से सोकर दोपहर तक सोता रहता है। इस तरह की अनियमितता शरीर की जैविक घड़ी को प्रभावित कर सकती है।
AHA के वैज्ञानिक बयान में sleep regularity यानी रोज लगभग एक समान समय पर सोने-जागने को भी महत्वपूर्ण माना गया है। अनियमित नींद के पैटर्न को हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा और सूजन जैसे जोखिम कारकों से जोड़ा गया है।
इसका मतलब यह नहीं कि कभी-कभार देर तक सोने से बीमारी हो जाएगी। चिंता तब अधिक महत्वपूर्ण होती है जब अनियमित नींद लंबे समय तक रोजमर्रा की आदत बन जाए।
तेज खर्राटे को सामान्य समझकर न टालें
अगर किसी व्यक्ति को बहुत तेज खर्राटे आते हैं, रात में सांस रुकने या घुटन जैसी स्थिति महसूस होती है, बार-बार नींद खुलती है या दिन में असामान्य रूप से बहुत नींद आती है, तो स्लीप एपनिया जैसी समस्या की जांच की जरूरत हो सकती है।
स्लीप एपनिया में सोते समय सांस बार-बार बाधित हो सकती है। CDC के अनुसार यह स्थिति शरीर में ऑक्सीजन की उपलब्धता को प्रभावित कर सकती है और हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक तथा स्ट्रोक जैसे जोखिमों से जुड़ी है।
इसलिए लंबे समय से खर्राटे, सांस रुकने के एपिसोड या अत्यधिक दिन की नींद को केवल थकान मानकर छोड़ना उचित नहीं है।
क्या सप्ताहांत की ज्यादा नींद पूरी कमी की भरपाई कर देती है?
कई लोग पूरे सप्ताह कम सोने के बाद शनिवार या रविवार को लंबी नींद लेकर इसे “कवर” करने की कोशिश करते हैं। लेकिन नियमित स्वस्थ नींद का विकल्प केवल सप्ताहांत में अतिरिक्त घंटे सोना नहीं माना जा सकता। AHA नियमित sleep-wake schedule बनाए रखने पर जोर देता है।
इसलिए बेहतर रणनीति यह है कि नींद की कमी को लगातार जमा होने देने के बजाय रोज की दिनचर्या को अधिक नियमित बनाया जाए।
नींद सुधारने के लिए किन बातों पर ध्यान दें?
नींद बेहतर करने के लिए बहुत बड़े बदलाव की जरूरत हमेशा नहीं होती। कुछ व्यावहारिक आदतें मदद कर सकती हैं—
- रोज लगभग एक ही समय पर सोने और जागने की कोशिश करें।
- सोने से पहले मोबाइल और अन्य स्क्रीन का इस्तेमाल कम करें।
- दिन में नियमित शारीरिक गतिविधि करें।
- सुबह या दिन के समय प्राकृतिक रोशनी में कुछ समय बिताएं।
- सोने की जगह को शांत, अंधेरा और आरामदायक रखें।
- रात में ऐसे भोजन या पेय से बचें जो आपकी नींद को प्रभावित करते हों।
- सप्ताहांत में भी सोने-जागने के समय में बहुत बड़ा अंतर न रखें।
कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है?
अगर कई सप्ताह से लगातार नींद आने, सोने या नींद बनाए रखने में परेशानी हो रही है, रात में बार-बार नींद टूटती है, तेज खर्राटे आते हैं, सोते समय सांस रुकती महसूस होती है या दिन में अत्यधिक नींद आती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना उचित है।
खास तौर पर अगर पहले से हाई ब्लड प्रेशर या हृदय संबंधी समस्या है और नींद लगातार खराब चल रही है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। AHA भी लगातार नींद की समस्या या अत्यधिक दिन की नींद होने पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ से चर्चा करने की सलाह देता है।



