रिफॉर्म उत्सव: गांवों के लिए बड़ा बदलाव, ग्राम सभा तय करेगी विकास का दमदार रोडमैप
रायपुर, 30 सितंबर 2026। गांव के विकास की योजना अब सिर्फ पंचायत कार्यालय की फाइलों में तैयार होने वाली कवायद नहीं रहेगी। छत्तीसगढ़ में 2 अक्टूबर से शुरू होने वाली नई प्रक्रिया का जोर इस बात पर है कि गांव की प्राथमिकताएं गांव के लोग खुद तय करें।
इसके तहत ग्राम सभाओं को रोजगार, पानी, आजीविका, सड़क-संपर्क, सामुदायिक परिसंपत्तियों और दूसरी स्थानीय जरूरतों पर सीधे चर्चा करने का मंच बनाया जाएगा। इसी आधार पर विकसित ग्राम पंचायत प्लान यानी VGPP तैयार होगा, जिसे आगे विकासखंड और जिला स्तर की योजनाओं से जोड़ा जाएगा।
यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी गांव की वास्तविक समस्या हमेशा सरकारी आंकड़ों में दिखाई नहीं देती। कहीं पानी की उपलब्धता समस्या है, कहीं खेत तक पहुंच, कहीं रोजगार के लिए स्थानीय परिसंपत्तियों की कमी और कहीं पुरानी बनी परिसंपत्तियों का रिकॉर्ड ही डिजिटल सिस्टम में मौजूद नहीं है। नई प्रक्रिया का उद्देश्य इन अंतरालों को योजना का हिस्सा बनाना है।
अब सवाल यह नहीं कि योजना क्या है, बल्कि गांव को चाहिए क्या?
ग्राम पंचायतों में अक्सर विकास योजनाएं उपलब्ध योजनाओं और बजट के आधार पर बनती हैं। नई व्यवस्था में कोशिश इसके उलट दिशा में जाने की है—पहले जरूरत पहचानी जाए और फिर उपलब्ध सरकारी योजनाओं को उस जरूरत से जोड़ा जाए।
2 अक्टूबर की ग्राम सभा में ग्रामीणों को पंचायत के आधारभूत आंकड़ों, आधार मानचित्र और उपलब्ध कार्यों की जानकारी दी जाएगी। इसके बाद बस्ती और वार्ड स्तर पर स्थानीय लोगों के साथ चर्चा तथा स्थल सत्यापन किया जाएगा।
यानी किसी सड़क, तालाब, जल संरक्षण संरचना, आजीविका से जुड़ी परिसंपत्ति या दूसरे काम को केवल कागज पर प्रस्तावित करने के बजाय यह देखने की कोशिश होगी कि उसकी जरूरत वास्तव में कहां है।
यही सहभागी योजना की सबसे बड़ी ताकत हो सकती है।
पुराने रिकॉर्ड और जमीन की हकीकत के बीच की दूरी होगी कम
ग्रामीण विकास में एक व्यावहारिक समस्या यह रही है कि जमीन पर मौजूद हर परिसंपत्ति जरूरी नहीं कि डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज हो।
नई योजना प्रक्रिया में ऐसी परिसंपत्तियों की पहचान का प्रावधान किया गया है। इसका महत्व भविष्य में और बढ़ सकता है, क्योंकि डिजिटल रिकॉर्ड केवल निगरानी का साधन नहीं है; वही आगे की योजना, बजट और प्राथमिकता तय करने में भी उपयोगी होता है।
यदि किसी गांव का वास्तविक संसाधन मानचित्र तैयार हो जाता है, तो आने वाले वर्षों में एक ही जगह पर बार-बार सर्वे कराने की जरूरत कम हो सकती है और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल संभव हो सकता है।
रोजगार योजना को गांव के विकास से जोड़ने की कोशिश
इस पूरी कवायद का एक अहम हिस्सा VB-G RAM G है। केंद्र सरकार के अनुसार यह कानून 1 जुलाई 2026 से लागू हुआ और पात्र ग्रामीण परिवारों के लिए साल में 125 दिनों के वैधानिक रोजगार की गारंटी देता है। इसके साथ समय पर मजदूरी भुगतान, रोजगार नहीं मिलने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता और टिकाऊ ग्रामीण परिसंपत्तियों के निर्माण पर भी जोर है।
यहीं VGPP जैसी योजना महत्वपूर्ण हो जाती है।
अगर रोजगार से जुड़े काम केवल मजदूरी उपलब्ध कराने तक सीमित न रहकर गांव की वास्तविक जरूरत के अनुरूप परिसंपत्तियां बनाएं, तो एक ही सरकारी खर्च से दो लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं—परिवार को रोजगार और गांव को उपयोगी संपत्ति।
केंद्र के आधिकारिक विवरण में भी VB-G RAM G के तहत जल संबंधी कार्य, ग्रामीण अधोसंरचना, आजीविका से जुड़ी परिसंपत्तियों और चरम मौसम के प्रभाव को कम करने वाले कामों पर जोर दिया गया है।
अक्टूबर से दिसंबर तक चलेगी असली पड़ताल
2 अक्टूबर की ग्राम सभा सिर्फ शुरुआत होगी। इसके बाद अक्टूबर और नवंबर में बस्ती तथा वार्ड स्तर पर सहभागी मूल्यांकन, स्थल सत्यापन और सामुदायिक परामर्श के जरिए जरूरतों को चिह्नित किया जाएगा।
दिसंबर में तैयार योजना का प्रारूप वापस ग्राम सभा के सामने आएगा।
यह चरण बेहद महत्वपूर्ण है। क्योंकि यहीं ग्रामीणों को यह देखने का मौका मिलेगा कि चर्चा के दौरान सामने आई उनकी प्राथमिकताएं अंतिम मसौदे में शामिल हुईं या नहीं।
इसके बाद ग्राम सभा की स्वीकृति से योजना आगे बढ़ेगी और विकासखंड तथा जिला स्तर पर योजनाओं का समेकन किया जाएगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार यह प्रक्रिया 15 जनवरी तक पूरी की जानी है।
इस तरह योजना का रास्ता गांव → ग्राम सभा → विकासखंड → जिला के क्रम में आगे बढ़ेगा।
महिलाओं और युवाओं की भागीदारी क्यों अहम?
योजना बनाते समय पंचायत प्रतिनिधियों के अलावा स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं, युवाओं और आम ग्रामीणों की भागीदारी पर जोर दिया गया है।
इसका व्यावहारिक महत्व है। गांव की जरूरतों का अनुभव हर समूह का अलग होता है।
महिलाएं पानी, ईंधन, घरेलू आय और आजीविका से जुड़ी समस्याओं को अलग नजरिए से देख सकती हैं। युवा रोजगार, कौशल, डिजिटल सुविधाओं और स्थानीय उद्यम की जरूरत सामने ला सकते हैं। किसान और मजदूर खेती, जल और रोजगार की मौसमी जरूरतों को बेहतर तरीके से बता सकते हैं।
इसलिए अधिक भागीदारी केवल बैठक में भीड़ बढ़ाने का विषय नहीं है; सही तरीके से किया जाए तो यह योजना की प्राथमिकताओं को अधिक वास्तविक बना सकती है।
QR Code से सूचना देना छोटा कदम, असर बड़ा हो सकता है
ग्राम पंचायतों में QR Code के जरिए VB-G RAM G से जुड़े प्रमुख संवाद बिंदुओं की जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जा रही है।
डिजिटल सूचना की उपयोगिता तभी होगी जब ग्रामीणों को यह समझ में आए कि वे किस काम के लिए आवेदन कर सकते हैं, रोजगार की मांग कैसे रख सकते हैं, मजदूरी भुगतान की स्थिति क्या है और पंचायत स्तर पर कौन-से काम प्रस्तावित किए जा रहे हैं।
इसलिए QR Code को केवल सूचना बोर्ड का डिजिटल विकल्प नहीं, बल्कि सूचना और जवाबदेही के बीच एक कड़ी के रूप में देखना ज्यादा उपयोगी होगा।
हालांकि इसका असर डिजिटल पहुंच और ग्रामीणों की वास्तविक डिजिटल साक्षरता पर भी निर्भर करेगा।
सबसे बड़ी परीक्षा: योजना बने नहीं, जमीन पर दिखे
कागज पर अच्छी ग्राम विकास योजना बनाना पहला चरण है। असली चुनौती उसके बाद शुरू होती है।
यदि ग्राम सभा ने जल संरक्षण को प्राथमिकता दी है, तो उसका परिणाम भूजल, सिंचाई या पेयजल उपलब्धता में दिखना चाहिए। यदि आजीविका को प्राथमिकता मिली है, तो परिसंपत्ति का संबंध स्थानीय आय से होना चाहिए। अगर सड़क या अन्य अधोसंरचना को प्राथमिकता मिली है, तो उसका उपयोग ग्रामीणों की वास्तविक जरूरत से जुड़ना चाहिए।
केंद्र के 29 सितंबर के आधिकारिक विवरण में भी VGPP को रोजगार से जुड़ी परिसंपत्ति निर्माण, बेहतर अधोसंरचना और सरकारी योजनाओं के अभिसरण के साथ जोड़ने की बात कही गई है।
यानी सफलता का पैमाना सिर्फ यह नहीं होगा कि कितनी ग्राम पंचायतों ने प्लान तैयार किया। ज्यादा महत्वपूर्ण यह होगा कि उन योजनाओं से कितना रोजगार, कितनी उपयोगी परिसंपत्तियां और कितना टिकाऊ ग्रामीण विकास पैदा हुआ।
आगे क्या बदलेगा?
अगर ग्राम सभा की प्राथमिकताओं को वास्तव में बजट और विभागीय योजनाओं से जोड़ा गया, तो गांवों में विकास कार्यों की दिशा अधिक स्थानीय जरूरतों के अनुरूप हो सकती है।
जल संकट वाले गांव में पानी प्राथमिकता बन सकता है, कृषि प्रधान क्षेत्र में सिंचाई और खेत से जुड़ी परिसंपत्तियां, जबकि रोजगार की कमी वाले इलाकों में आजीविका आधारित कामों पर अधिक ध्यान दिया जा सकता है।
इसके अलावा पंचायतों के पास स्थानीय संसाधनों और समस्याओं का बेहतर रिकॉर्ड तैयार होने से भविष्य की योजनाओं की गुणवत्ता भी सुधर सकती है।
लेकिन इसके लिए तीन चीजें निर्णायक रहेंगी—ग्राम सभा की वास्तविक भागीदारी, स्थानीय जरूरतों का सही सत्यापन और स्वीकृत योजना पर समयबद्ध अमल।



