छत्तीसगढ़ में बड़ा रोजगार बदलाव: पूर्व अग्निवीरों और गेस्ट लेक्चरर्स के लिए सरकार का अहम फैसला
रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार की कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों का सीधा असर राज्य में रोजगार और सरकारी सेवाओं से जुड़े कई वर्गों पर पड़ सकता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई बैठक में अतिथि व्याख्याता नीति-2026 और पूर्व अग्निवीर सैनिक भर्ती नियम-2026 को मंजूरी दी गई।
इन फैसलों में दो अलग-अलग क्षेत्रों की तस्वीर दिखाई देती है। एक तरफ सरकारी कॉलेजों में अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति, अनुभव और मानदेय से जुड़े नियमों को व्यवस्थित करने की कोशिश है, वहीं दूसरी तरफ अग्निवीर योजना से सेवा पूरी कर चुके युवाओं के लिए राज्य की तृतीय श्रेणी सरकारी नौकरियों में आरक्षण को लागू करने का रास्ता साफ किया गया है।
पूर्व अग्निवीरों के लिए अब भर्ती प्रक्रिया ज्यादा स्पष्ट
छत्तीसगढ़ सरकार पहले ही पूर्व अग्निवीर सैनिकों को राज्य की सिविल सेवाओं के तृतीय श्रेणी पदों में 10 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान कर चुकी है। अब इसके क्रियान्वयन के लिए अलग भर्ती नियमों को मंजूरी दी गई है।
इसका लाभ पुलिस विभाग में आरक्षक, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में वनरक्षक और जेल विभाग में जेल प्रहरी जैसे पदों पर मिलने का प्रावधान है।
नए नियम केवल आरक्षण की बात तक सीमित नहीं हैं। इनमें नियुक्ति की शर्तें, भर्ती के मापदंड, चयन प्रक्रिया और आरक्षण लागू करने की व्यवस्था को निर्धारित किया गया है।
इसका व्यावहारिक महत्व इसलिए है क्योंकि किसी आरक्षण की घोषणा और उसके आधार पर वास्तविक भर्ती प्रक्रिया शुरू होना दो अलग चरण हैं। नियम स्पष्ट होने से भर्ती विज्ञापन जारी होने के बाद पात्रता और चयन को लेकर प्रशासनिक अस्पष्टता कम हो सकती है।
अग्निवीरों के लिए इसका मतलब क्या है?
अग्निवीर व्यवस्था के तहत सैन्य सेवा से बाहर आने वाले युवाओं के सामने आगे के करियर को लेकर एक महत्वपूर्ण संक्रमण का चरण आता है। ऐसे में राज्य पुलिस, वन और जेल विभाग जैसे क्षेत्रों में अवसर उनके प्रशिक्षण और अनुशासन से जुड़े अनुभव को दूसरे सरकारी क्षेत्र में इस्तेमाल करने का रास्ता प्रदान कर सकते हैं।
हालांकि आरक्षण का लाभ मिलना अपने आप नियुक्ति की गारंटी नहीं है। उम्मीदवारों को संबंधित भर्ती नियमों में निर्धारित पात्रता और चयन प्रक्रिया को पूरा करना होगा।
आगे इसका वास्तविक प्रभाव इस बात से भी तय होगा कि इन पदों पर कितनी रिक्तियां निकलती हैं और भर्ती प्रक्रिया किस गति से आगे बढ़ती है।
गेस्ट लेक्चरर्स के लिए नीति में महत्वपूर्ण बदलाव
कैबिनेट ने शासकीय महाविद्यालयों में लागू अतिथि व्याख्याता नीति-2024 में संशोधित नीति-2026 को मंजूरी दी है।
नई व्यवस्था में मेरिट सूची में यदि एक ही श्रेणी के दो उम्मीदवारों के अंक समान होते हैं, तो छत्तीसगढ़ के मूल निवासी उम्मीदवार को वरीयता देने का प्रावधान किया गया है।
यह बदलाव टाई-ब्रेक की स्थिति को स्पष्ट करता है। यानी समान अंक आने पर चयन प्रक्रिया में स्थानीय निवास को एक निर्धारित आधार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा।
पांच महीने का अनुभव भी अब मायने रखेगा
अतिथि व्याख्याताओं के लिए अनुभव के अधिकतम 30 अंकों की व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है।
अब किसी राजकीय विश्वविद्यालय में एक शैक्षणिक सत्र के दौरान कम से कम पांच महीने अध्यापन कार्य पूरा करने वाले उम्मीदवार को अनुभव के लिए पांच अंक देने का प्रावधान किया गया है।
इस बदलाव का महत्व उन शिक्षकों के लिए है जिन्होंने सरकारी कॉलेज के बजाय राज्य विश्वविद्यालय में पढ़ाने का अनुभव हासिल किया है। नई व्यवस्था उस अनुभव को चयन प्रक्रिया में स्पष्ट रूप से जगह देती है।
मानदेय में कालखंड की जगह काम के दिनों पर जोर
अतिथि व्याख्याताओं के मानदेय को लेकर भी व्यवस्था बदली गई है। सरकार ने कालखंड आधारित व्यवस्था के स्थान पर कार्य-दिवस आधारित मानदेय प्रणाली लागू करने का फैसला किया है।
यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अतिथि शिक्षकों का भुगतान उनके वास्तविक कार्य-दिवस से जोड़ने की कोशिश की गई है। साथ ही कार्य-दायित्व, काम की अवधि और आकस्मिक अवकाश जैसे मुद्दों को भी नीति में स्पष्ट किया गया है।
विस्थापित अतिथि व्याख्याताओं के अनुभव का उपयोग करते हुए रिक्त पदों पर पुनर्नियोजन का अवसर देने का फैसला भी किया गया है।
इसका अगला महत्वपूर्ण सवाल अब यही होगा कि उपलब्ध रिक्तियों की संख्या कितनी है और पुनर्नियोजन की प्रक्रिया किस तरीके से लागू की जाती है।
फिल्म ‘हनुमान अंश’ को टैक्स राहत
कैबिनेट ने फिल्म ‘हनुमान अंश’ को टैक्स फ्री करने के फैसले पर भी मुहर लगा दी है। मुख्यमंत्री ने 10 सितंबर 2026 को इसकी घोषणा की थी।
सरकार के अनुसार, सिनेमाघरों को राज्य GST के बराबर राशि की भरपाई राज्य सरकार करेगी। इसका उद्देश्य दर्शकों के लिए फिल्म की टिकट लागत को कम करना है।
यह फैसला रोजगार या सरकारी भर्ती से अलग है, लेकिन राज्य सरकार द्वारा मनोरंजन क्षेत्र में किसी फिल्म को कर राहत देने के उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है।
अब असली परीक्षा फैसलों के क्रियान्वयन की
कैबिनेट की मंजूरी किसी नीति की शुरुआत का महत्वपूर्ण चरण है, लेकिन उसके बाद नियमों को जमीन पर लागू करना उतना ही महत्वपूर्ण होता है।
पूर्व अग्निवीरों के मामले में भर्ती विज्ञापन, रिक्तियों और चयन प्रक्रिया पर नजर रहेगी। वहीं अतिथि व्याख्याताओं के मामले में स्थानीय वरीयता, अनुभव के अंक, पुनर्नियोजन और कार्य-दिवस आधारित मानदेय को किस तरह लागू किया जाता है, यह शिक्षकों के लिए सबसे अहम होगा।



