मसूद अजहर पर पाकिस्तान ने बढ़ाई
इस्लामाबाद/नई दिल्ली। जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर को लेकर पाकिस्तान के रुख में एक बार फिर ऐसा बदलाव दिखाई दिया है, जिसने भारत समेत अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा हलकों का ध्यान खींचा है। पाकिस्तान की Federal Investigation Agency (FIA) ने 2026 की अपनी Red Book of Most Wanted High Profile Terrorists में मसूद अजहर को भगोड़े आतंकियों की सूची में रखा है और उसकी गिरफ्तारी में मदद करने वाली सूचना के लिए इनामी राशि बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये कर दी है।
यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अजहर पर पाकिस्तान की ओर से लंबे समय से जो स्थिति बताई जाती रही है, उसमें और भारत के आरोपों में बड़ा अंतर रहा है। नई सूची में उसका नाम बनाए रखना और इनाम को 50 लाख से बढ़ाकर 70 लाख रुपये करना एक तरफ पाकिस्तान की आधिकारिक कार्रवाई का संकेत देता है, तो दूसरी तरफ यह सवाल भी उठाता है कि क्या यह कदम वास्तविक गिरफ्तारी की दिशा में है या अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच अनुपालन दिखाने की कोशिश।
70 लाख का इनाम क्यों महत्वपूर्ण है?
FIA की Red Book सामान्य अपराधियों की सूची नहीं है। पाकिस्तान की एजेंसी के मुताबिक उसका Counter Terrorism Wing हाई-प्रोफाइल आतंकवाद और आतंकवादी वित्तपोषण से जुड़े मामलों पर काम करता है और Most Wanted Terrorists की Red Book तैयार व प्रकाशित करता है।
मसूद अजहर के मामले में इनामी राशि बढ़ने का सीधा अर्थ यह है कि पाकिस्तान की अपनी संघीय जांच एजेंसी अब भी उसे आधिकारिक तौर पर वांछित व्यक्ति मान रही है। 2021 में उसकी तलाश के लिए 50 लाख पाकिस्तानी रुपये का इनाम रखा गया था। अब पांच साल बाद यह रकम बढ़ाकर 70 लाख की गई है।
हालांकि, केवल इनाम बढ़ जाना इस बात का प्रमाण नहीं है कि पाकिस्तान ने अजहर की गिरफ्तारी के लिए कोई नया अभियान शुरू कर दिया है। असली महत्व इस बात का होगा कि उसके बाद पाकिस्तान की एजेंसियां क्या ठोस कार्रवाई करती हैं।
मसूद अजहर भारत के लिए इतना महत्वपूर्ण नाम क्यों है?
मसूद अजहर का नाम भारत में कई बड़े आतंकी मामलों से जुड़ा रहा है। उसे 2001 के संसद हमले के मामले में भारत लंबे समय से वांछित बताता रहा है। जैश-ए-मोहम्मद पर इसके अलावा पठानकोट एयरबेस हमले और 2019 के पुलवामा हमले से जुड़े होने के भी भारतीय आरोप रहे हैं।
यही वजह है कि अजहर को लेकर पाकिस्तान का कोई भी आधिकारिक कदम केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी से जुड़ा मामला नहीं माना जाता। यह भारत-पाकिस्तान संबंधों, सीमा पार आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी व्यवस्था के संदर्भ में भी देखा जाता है।
पाकिस्तान के दावे और भारत के आरोपों में बड़ा अंतर
मसूद अजहर को लेकर पाकिस्तान का दावा रहा है कि वह 2021 के बाद देश में नहीं था और अफगानिस्तान चला गया था। दूसरी ओर, भारतीय सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से इसके विपरीत दावा करती रही हैं।
ताजा रिपोर्ट में भारतीय खुफिया सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि पिछले छह महीनों के तकनीकी विश्लेषण में अजहर के पाकिस्तान के सिंध प्रांत के नवाबशाह में छिपे होने की जानकारी सामने आई है। यह एक खुफिया दावा है और इसे पाकिस्तान की ओर से स्वतंत्र रूप से स्वीकार किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है।
यही विरोधाभास इस पूरे घटनाक्रम को ज्यादा महत्वपूर्ण बनाता है। यदि कोई व्यक्ति पाकिस्तान की आधिकारिक सूची में वांछित है, लेकिन उसकी वास्तविक मौजूदगी को लेकर दोनों देशों के दावे अलग-अलग हैं, तो अगला सवाल स्वाभाविक रूप से यही बनता है कि सूची में नाम होने के बाद वास्तविक कार्रवाई कितनी आगे बढ़ती है।
FATF की बैठक से पहले उठाया गया कदम?
इस फैसले का समय भी ध्यान देने योग्य है। अक्टूबर के अंत में Financial Action Task Force (FATF) की प्लेनरी बैठक प्रस्तावित है। FATF का काम देशों की मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी वित्तपोषण से निपटने वाली व्यवस्थाओं का आकलन करना है। पाकिस्तान पहले भी FATF की निगरानी व्यवस्था के केंद्र में रहा है।
ताजा रिपोर्टों में भारतीय सूत्रों ने मसूद अजहर पर इनाम बढ़ाने को FATF के संदर्भ में पाकिस्तान की रणनीति से जोड़कर देखा है। लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है—किसी आतंकी को वांछित सूची में डालना और वास्तव में उसके खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई करना दो अलग बातें हैं।
अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के लिए भी केवल कागजी कार्रवाई से ज्यादा महत्वपूर्ण यह होता है कि किसी देश की कार्रवाई कितनी प्रभावी, सत्यापन योग्य और लगातार लागू की जा रही है।
Red Book में आतंकियों की संख्या भी बढ़ी
2026 की नई सूची को लेकर सामने आई रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान की FIA Red Book में मोस्ट वांटेड आतंकियों की संख्या 2021 के मुकाबले करीब 35 प्रतिशत बढ़कर 1,804 हो गई है। 2021 में यह संख्या 1,330 बताई गई थी।
नई सूची में 26/11 मुंबई हमलों से जुड़े कई नाम भी शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे 19 लोगों के नाम सूची में हैं, जिन पर हमले की साजिश में मदद, वित्तीय सहयोग या हमलावरों की समुद्री आवाजाही से जुड़ी भूमिकाओं के आरोप हैं।
यह आंकड़ा पाकिस्तान के सामने मौजूद आतंकवाद-रोधी चुनौती की व्यापकता को भी दिखाता है। हालांकि किसी सूची में नाम होना अपने आप में किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी या दोषसिद्धि के बराबर नहीं है।
अब असली परीक्षा कार्रवाई की होगी
मसूद अजहर पर इनाम को 70 लाख रुपये तक बढ़ाना राजनीतिक और कूटनीतिक संदेश जरूर देता है, लेकिन इसकी विश्वसनीयता का पैमाना आगे की कार्रवाई होगी।
यदि पाकिस्तान वास्तव में अजहर को पकड़ने या उसके खिलाफ प्रभावी कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाने में सक्षम होता है, तो यह उसके आतंकवाद-रोधी दावों को मजबूत कर सकता है। इसके विपरीत, यदि Red Book में नाम और इनाम बढ़ाने तक ही कार्रवाई सीमित रहती है, तो भारत और अन्य देशों के लिए इस कदम की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
आने वाले समय में खास नजर FATF की अक्टूबर बैठक, पाकिस्तान की आतंकवाद-रोधी कार्रवाई और मसूद अजहर की वास्तविक स्थिति पर रहेगी। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि 50 लाख से 70 लाख रुपये तक बढ़ा इनाम केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं है; इसके पीछे पाकिस्तान की सुरक्षा नीति और अंतरराष्ट्रीय दबाव से जुड़े बड़े सवाल भी खड़े होते हैं।
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