दुनियाभर में जंगलों से जुड़ा कारोबार तेजी से बढ़ रहा है और इसका आकार अब करीब 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। लकड़ी, औषधीय पौधों, बांस, रेजिन और अन्य वन उत्पादों की मांग बढ़ने से इस क्षेत्र में कारोबारियों और कंपनियों को बड़ा मुनाफा हो रहा है। वैश्विक स्तर पर वन आधारित उद्योग अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा बन चुके हैं और कई देशों के निर्यात में भी इसका बड़ा योगदान है।
हालांकि इस तेजी से बढ़ती वन अर्थव्यवस्था का लाभ जंगलों में रहने वाले वनवासियों तक पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच पा रहा है। जंगलों पर निर्भर समुदाय आज भी बुनियादी सुविधाओं, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी से जूझ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सप्लाई चेन में वनवासियों की हिस्सेदारी कम होने और उचित मूल्य न मिलने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो पा रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक यदि वन उत्पादों की वैल्यू चेन में स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाई जाए और उन्हें उचित बाजार व तकनीकी सहायता मिले, तो यह क्षेत्र न केवल अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा बल्कि वनवासियों के जीवन स्तर को भी बेहतर बना सकता है।


