ग्रीन फ्यूल के तौर पर तेजी से बढ़ रहे इथेनॉल उत्पादन को लेकर नई चिंता सामने आई है। भारत समेत कई देशों में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसके उत्पादन में पानी की भारी खपत हो रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1 लीटर इथेनॉल बनाने में करीब 10,000 लीटर पानी खर्च होता है, जिससे जल संसाधनों पर दबाव बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ना और मक्का जैसी फसलों से तैयार किया जाता है, जो पहले ही ज्यादा पानी मांगने वाली फसलें हैं। ऐसे में बड़े पैमाने पर इथेनॉल उत्पादन से भूजल स्तर गिरने और कृषि क्षेत्र में पानी की कमी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। यह स्थिति खासतौर पर उन राज्यों के लिए चिंता का विषय है जहां पहले से ही जल संकट गहरा रहा है।
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हालांकि सरकार इसे ऊर्जा आत्मनिर्भरता और प्रदूषण कम करने की दिशा में अहम कदम मानती है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रीन फ्यूल के साथ जल संरक्षण की रणनीति भी उतनी ही जरूरी है। भविष्य में संतुलित नीति और वैकल्पिक तकनीकों पर जोर नहीं दिया गया, तो इथेनॉल मिशन पर्यावरण के लिए नई चुनौती बन सकता है।


