देश में खाने के तेल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार आने वाले समय में खाद्य तेल 5-6% तक महंगे हो सकते हैं, जिससे घरेलू रसोई का बजट प्रभावित होने की संभावना है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम ऑयल, सोयाबीन ऑयल और सूरजमुखी तेल की कीमतों में तेजी, शिपिंग लागत और सप्लाई में अनिश्चितता इसके मुख्य कारण हैं। यदि आयात लागत बढ़ती है, तो कंपनियां इसका बोझ खुद नहीं उठा पातीं और कीमतों में वृद्धि करनी पड़ती है, जिसका असर सीधे उपभोक्ताओं पर पड़ता है।
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माना जा रहा है कि कीमतों में बढ़ोतरी से खासतौर पर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर असर पड़ेगा। अगर वैश्विक बाजार में स्थिति सामान्य नहीं हुई, तो आने वाले महीनों में खाद्य तेल की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।


