स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार आंतों की सेहत बिगड़ना कई गंभीर ऑटोइम्यून बीमारियों की शुरुआत हो सकता है। जब आंतों का माइक्रोबायोम असंतुलित हो जाता है, तो शरीर की इम्यून सिस्टम गलत तरीके से काम करने लगती है और खुद के ऊतकों पर हमला करने लगती है। World Health Organization से जुड़े स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी लंबे समय से गट हेल्थ और इम्युनिटी के बीच मजबूत संबंध पर जोर देते रहे हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि लगातार थकान, जोड़ों में दर्द, पेट फूलना, गैस, बार-बार दस्त या कब्ज जैसी समस्याएं शुरुआती संकेत हो सकते हैं। अगर इन लक्षणों को लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाए, तो यह रूमेटाइड आर्थराइटिस, थायरॉयड और अन्य ऑटोइम्यून बीमारियों का रूप ले सकते हैं। आधुनिक जीवनशैली, प्रोसेस्ड फूड, नींद की कमी और तनाव को इसके मुख्य कारणों में माना जा रहा है।
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विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि संतुलित आहार, फाइबर-युक्त भोजन, प्रोबायोटिक्स, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद से आंतों को स्वस्थ रखा जा सकता है। समय रहते गट हेल्थ पर ध्यान देना न केवल पाचन सुधारता है बल्कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत बनाता है।


