उच्चतम न्यायालय ने देश में हवाई किराए में होने वाले अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव को रोकने से संबंधित याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि एयरलाइंस त्योहारों, छुट्टियों या आपात परिस्थितियों में किराए को मनमाने ढंग से बढ़ा देती हैं, जिससे आम यात्रियों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है। अदालत ने कहा कि यह मुद्दा सीधे उपभोक्ता अधिकारों और सार्वजनिक हित से जुड़ा है, इसलिए सरकार का रुख जानना आवश्यक है।
पीठ ने केंद्र से पूछा है कि क्या यात्रियों के हितों की रक्षा के लिए हवाई किरायों को नियंत्रित करने, पारदर्शिता बढ़ाने और मूल्य निर्धारण की स्पष्ट नीति बनाने पर विचार किया जा रहा है। साथ ही एयरलाइंस द्वारा ‘सर्ज प्राइसिंग’ के नाम पर अत्यधिक किराए वसूलने पर भी न्यायालय ने चिंता जताई।
याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि कई रूटों पर एयरलाइंस प्रतिस्पर्धा के अभाव का फायदा उठाकर टिकट कीमतें असामान्य रूप से बढ़ा देती हैं। अदालत ने केंद्र को निर्धारित समय सीमा में विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
अब सभी की नजर केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पर है, जिसके बाद इस मामले में आगे की सुनवाई होगी और संभव है कि हवाई किराया नीति में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलें।


