हार्ट के लिए खतरनाक हो सकती हैं मीठी ड्रिंक्स? Zero Sugar को लेकर डॉक्टर ने खोला बड़ा राज
कोल्ड ड्रिंक, एनर्जी ड्रिंक या पैकेट वाला जूस—कुछ मिनटों की ताजगी देने वाली ये चीजें अगर रोज की आदत बन जाएं, तो सवाल सिर्फ वजन बढ़ने का नहीं रहता। लंबे समय में ज्यादा चीनी और अतिरिक्त कैलोरी का सेवन मोटापा, ब्लड शुगर और ट्राइग्लिसराइड्स जैसे जोखिमों से जुड़ सकता है, जिनका संबंध हृदय रोग से है।
लेकिन इसके साथ एक दूसरा भ्रम भी तेजी से बढ़ा है—अगर ड्रिंक पर Zero Sugar लिखा है, तो क्या उसे दिल के लिए पूरी तरह सुरक्षित मान लिया जाए?
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अमित कुमार मलिक के मुताबिक, तस्वीर इतनी सीधी नहीं है। जीरो-शुगर विकल्पों में सामान्य मीठे पेय की तुलना में चीनी और कैलोरी कम हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उन्हें रोजाना का ‘हेल्दी ड्रिंक’ मान लिया जाए।
असली समस्या सिर्फ चीनी नहीं, रोज की आदत है
मीठे पेय का नुकसान समझने के लिए एक बार की खपत और रोजाना की आदत में अंतर करना जरूरी है।
जब कोई व्यक्ति नियमित रूप से ज्यादा कैलोरी वाले पेय लेता है, तो कुल कैलोरी सेवन बढ़ सकता है। यदि शारीरिक गतिविधि उस अतिरिक्त ऊर्जा की भरपाई नहीं करती, तो वजन बढ़ने की संभावना बढ़ती है। मोटापा और उससे जुड़े मेटाबॉलिक बदलाव आगे चलकर डायबिटीज और हृदय संबंधी जोखिमों को प्रभावित कर सकते हैं।
यानी समस्या सिर्फ एक बोतल या एक गिलास की नहीं, बल्कि उस पैटर्न की है जिसमें पानी की जगह लगातार मीठे या फ्लेवर्ड पेय लेने की आदत बन जाती है।
Zero Sugar का मतलब ‘पूरी तरह हेल्दी’ नहीं
यहीं सबसे ज्यादा भ्रम पैदा होता है।
Zero Sugar या शुगर-फ्री पेय में आम तौर पर चीनी की जगह कम या बिना कैलोरी वाले स्वीटनर का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए सामान्य शुगरी ड्रिंक की तुलना में इनसे चीनी और कैलोरी का सेवन कम हो सकता है।
लेकिन किसी उत्पाद में चीनी कम होना और उसका स्वास्थ्यवर्धक होना—दो अलग बातें हैं।
डॉ. मलिक के अनुसार, ऐसे पेय को कभी-कभार पसंद के तौर पर लिया जा सकता है, लेकिन इसे रोजमर्रा की जरूरत या पानी का विकल्प बनाना उचित नहीं माना जाना चाहिए।
विशेष रूप से उन लोगों के लिए जो पहले से वजन, ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर या हृदय स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं, पूरे खान-पान के पैटर्न को देखना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
दिल की सेहत के लिए सबसे आसान बदलाव क्या है?
प्यास बुझाने के लिए सबसे सरल विकल्प आज भी पानी है।
यह बात मामूली लग सकती है, लेकिन व्यवहार में यही सबसे बड़ा बदलाव हो सकता है। यदि किसी व्यक्ति की दिनचर्या में नियमित रूप से सॉफ्ट ड्रिंक, एनर्जी ड्रिंक या मीठे पैकेट वाले पेय शामिल हैं, तो उनकी जगह पानी को प्राथमिक पेय बनाना अतिरिक्त चीनी और कैलोरी कम करने का सीधा तरीका है।
इसके साथ संतुलित भोजन, पर्याप्त शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और धूम्रपान से दूरी जैसे कारक भी हृदय स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
‘डाइट’ देखकर मात्रा बढ़ाना भी गलती
एक और व्यवहारिक गलती यह है कि लोग किसी पेय को Zero Sugar देखकर उसकी मात्रा बढ़ा देते हैं।
अगर कोई व्यक्ति सामान्य शुगरी ड्रिंक की जगह कभी-कभार Zero Sugar विकल्प चुनता है, तो चीनी और कैलोरी कम करने का फायदा मिल सकता है। लेकिन यदि वह पूरे दिन ऐसे पेय पीता रहे और पानी, पौष्टिक भोजन तथा नियमित गतिविधि को नजरअंदाज कर दे, तो केवल लेबल बदलने से स्वस्थ जीवनशैली नहीं बनती।
स्वास्थ्य का आकलन किसी एक उत्पाद के लेबल से नहीं, बल्कि पूरे दैनिक व्यवहार से किया जाना चाहिए।
किन लोगों को ज्यादा सावधानी रखनी चाहिए?
जिन लोगों को पहले से डायबिटीज, मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, असामान्य लिपिड प्रोफाइल या हृदय संबंधी बीमारी है, उन्हें अपने पेय पदार्थों की आदतों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
ऐसे मामलों में किसी एक ड्रिंक को ‘सुरक्षित’ या ‘खतरनाक’ घोषित करने के बजाय व्यक्ति की पूरी डाइट, मेडिकल हिस्ट्री और डॉक्टर की सलाह को ध्यान में रखना बेहतर है।
खासकर एनर्जी ड्रिंक्स को सामान्य पानी या सॉफ्ट ड्रिंक के समान समझना ठीक नहीं है, क्योंकि उनमें कैफीन और अन्य उत्तेजक घटक भी हो सकते हैं।
निष्कर्ष: लेबल से ज्यादा जरूरी है आदत
Zero Sugar Drinks और हार्ट हेल्थ को लेकर सबसे जरूरी बात यही है कि चीनी कम होना अपने आप में किसी पेय को स्वास्थ्यवर्धक साबित नहीं करता।
अगर विकल्प सामान्य शुगरी ड्रिंक और Zero Sugar ड्रिंक के बीच हो, तो चीनी और कैलोरी के लिहाज से दूसरा विकल्प अलग स्थिति में हो सकता है। लेकिन रोजाना की प्यास के लिए पानी को प्राथमिकता देना ज्यादा सीधा और व्यावहारिक रास्ता है।
दिल की सुरक्षा किसी एक ‘मैजिक’ ड्रिंक से नहीं होती। यह लंबे समय तक अपनाई गई आदतों का परिणाम होती है—कम अतिरिक्त चीनी, संतुलित भोजन, नियमित गतिविधि और जरूरत पड़ने पर समय पर मेडिकल जांच।



