कोरबा में खतरनाक ठगी का जाल: दिनदहाड़े बुजुर्ग से ₹80 हजार का सोना उड़ाया, महिला से चेन लूट की कोशिश
कोरबा। शहर में सामने आई दो घटनाओं ने सड़क पर होने वाले अपराध के बदलते तरीके को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। एक मामले में बाइक सवार युवकों ने पुलिस चेकिंग का डर दिखाकर 65 वर्षीय बुजुर्ग से सोने की दो अंगूठियां उतरवा लीं और करीब 80 हजार रुपये का सामान लेकर फरार हो गए। दूसरी घटना में मॉर्निंग वॉक पर निकली महिला के गले से चेन खींचने की कोशिश की गई।
दोनों घटनाओं में तरीका अलग दिखाई देता है, लेकिन एक समानता साफ है—अपराधियों ने अचानक पैदा होने वाली घबराहट और कुछ सेकेंड के भ्रम का फायदा उठाने की कोशिश की।
पुलिस चेकिंग के नाम पर बुजुर्ग को बनाया निशाना
दर्री थाना क्षेत्र के प्रगति नगर रोड पर भागीराम कर्म के साथ हुई घटना इस नए तरीके की गंभीरता को सामने लाती है। 65 वर्षीय भागीराम CISF क्वार्टर ऑफिस के सामने से गुजर रहे थे, तभी बाइक पर सवार दो युवकों ने उन्हें रोक लिया।
आरोपियों ने खुद को पुलिस कार्रवाई से जोड़ते हुए आगे चेकिंग चलने की बात कही और उनसे पहने हुए सोने-चांदी के सामान को उतारने के लिए कहा। इसी दबाव में बुजुर्ग ने अपनी दो सोने की अंगूठियां उतार दीं।
इसके बाद आरोपी अंगूठियां लेकर बाइक से निकल गए। उनकी अनुमानित कीमत करीब 80 हजार रुपये बताई गई है। पुलिस ने मामले में अपराध क्रमांक 360/26 के तहत BNS की संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है।
इस घटना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आरोपियों ने कथित तौर पर किसी हथियार या बल का इस्तेमाल किए बिना अधिकार और डर की मनोवैज्ञानिक छवि का इस्तेमाल किया।
दूसरी घटना में चेन बची, लेकिन खतरा टला नहीं
सिविल लाइन रामपुर थाना क्षेत्र में सामने आई दूसरी घटना सीधे झपटमारी के प्रयास से जुड़ी है।
शिवाजी नगर की रहने वाली कांता बनवाल अपनी बेटी के साथ सुबह टहलने निकली थीं। घंटाघर की ओर जाते समय बाइक सवार दो युवकों ने कथित तौर पर उनके गले से चेन खींचने की कोशिश की।
अचानक हुए इस प्रयास में महिला सड़क पर गिर गईं। हालांकि चेन नहीं टूटी और आरोपी सफल नहीं हो सके। घटना के बाद दोनों युवक मौके से भाग निकले।
सूचना मिलने पर पुलिस टीम ने घटनास्थल पहुंचकर जांच शुरू की। पुलिस आसपास के CCTV कैमरों से संदिग्ध बाइक और आरोपियों की पहचान करने की कोशिश कर रही है।
एक महीने में तीसरी घटना ने बढ़ाई चिंता
इन घटनाओं का एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक लगभग एक महीने पहले निहारिका टॉकीज के पास भी इसी तरह पुलिस चेकिंग का हवाला देकर एक बुजुर्ग को निशाना बनाया गया था। उस घटना में भी सोने की चेन लेकर आरोपी फरार होने की बात सामने आई थी।
अगर अलग-अलग घटनाओं में एक जैसा तरीका दोहराया जाता है, तो जांच एजेंसियों के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण हो जाता है कि इनके पीछे एक ही गिरोह है या अलग-अलग अपराधी एक समान तरीके अपना रहे हैं।
यह अंतर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अपराध के पैटर्न की पहचान होने पर संदिग्ध वाहनों, रूट, CCTV फुटेज और पुराने मामलों के रिकॉर्ड को आपस में जोड़कर जांच को दिशा दी जा सकती है।
‘पुलिस’ शब्द सुनते ही भरोसा नहीं, सत्यापन जरूरी
इन घटनाओं से आम नागरिक के लिए एक व्यावहारिक सबक भी निकलता है। कोई व्यक्ति सड़क पर खुद को पुलिसकर्मी बताकर आभूषण उतारने को कहे तो घबराकर तुरंत उसकी बात मानना सुरक्षित तरीका नहीं है।
वास्तविक पुलिस कार्रवाई के नाम पर किसी अनजान व्यक्ति को अपने कीमती सामान सौंपने से पहले उसकी पहचान और अधिकार की पुष्टि करना जरूरी है। संदेह होने पर नजदीकी पुलिस थाना या आधिकारिक पुलिस सहायता नंबर से संपर्क किया जा सकता है।
खासकर बुजुर्गों को परिवार के सदस्य पहले से यह समझा सकते हैं कि सड़क पर अचानक रोककर सोना उतारने को कहने वाला व्यक्ति विश्वसनीय है या नहीं, इसकी पुष्टि किए बिना कोई आभूषण न उतारें।
CCTV जांच अब सबसे महत्वपूर्ण कड़ी
दोनों ताजा मामलों में पुलिस CCTV फुटेज खंगाल रही है। ऐसे मामलों में कैमरों की रिकॉर्डिंग सिर्फ आरोपी का चेहरा तलाशने तक सीमित नहीं रहती। बाइक का मॉडल, नंबर प्लेट का कोई हिस्सा, कपड़ों का रंग, भागने की दिशा और घटना से पहले संदिग्धों की गतिविधियां भी जांच के लिए महत्वपूर्ण सुराग बन सकती हैं।
अलग-अलग कैमरों की रिकॉर्डिंग को समय के हिसाब से जोड़ना भी जांच में मदद कर सकता है। यदि पुलिस को एक ही बाइक या संदिग्धों की आवाजाही कई स्थानों पर दिखाई देती है, तो घटनाओं के बीच संबंध स्थापित करने में मदद मिल सकती है।
दिनदहाड़े वारदातें पुलिसिंग के लिए भी चुनौती
इन घटनाओं का होना यह सवाल भी उठाता है कि व्यस्त इलाकों में दृश्य पुलिसिंग और संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी को कितना प्रभावी बनाया जा सकता है।
मॉर्निंग वॉक के समय सड़क पर लोगों की आवाजाही रहती है। इसी तरह प्रमुख मार्गों पर CCTV और यातायात गतिविधियां भी मौजूद रहती हैं। ऐसे स्थानों पर होने वाली वारदातों में अपराधियों की पहचान के लिए तकनीकी निगरानी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
लेकिन केवल कैमरे लगा देना पर्याप्त नहीं है। फुटेज की गुणवत्ता, रिकॉर्डिंग का सुरक्षित रहना, समय पर विश्लेषण और अलग-अलग कैमरों के डेटा को जोड़ना जांच की सफलता के लिए उतना ही जरूरी है।
अब पुलिस के सामने दोहरी चुनौती
पुलिस के सामने तत्काल चुनौती आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी की है, लेकिन उससे आगे भी काम जरूरी है। यदि जांच में यह सामने आता है कि घटनाएं किसी संगठित गिरोह से जुड़ी हैं, तो पुराने मामलों और समान अपराध पद्धति वाले प्रकरणों की समीक्षा उपयोगी हो सकती है।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटले के अनुसार दोनों मामलों में शिकायत के आधार पर कार्रवाई शुरू की गई है और CCTV समेत उपलब्ध जानकारियों के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है।



