छत्तीसगढ़ के एक गांव में आजादी के 75 साल बाद भी सड़क नहीं बनने का मामला अब न्यायालय तक पहुंच गया है। ग्रामीणों की लगातार शिकायतों और याचिका के बाद छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने इस गंभीर मुद्दे पर संज्ञान लेते हुए लोक निर्माण विभाग (PWD) से जवाब तलब किया है। बताया जा रहा है कि गांव तक पहुंचने के लिए आज भी लोगों को कच्चे रास्तों और खेतों के बीच से गुजरना पड़ता है, जिससे बारिश के मौसम में हालात और भी बदतर हो जाते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क न होने की वजह से बच्चों की पढ़ाई, मरीजों की अस्पताल तक पहुंच और रोजमर्रा की जरूरतों पर बड़ा असर पड़ता है। कई बार आपातकालीन स्थिति में मरीजों को चारपाई या मोटरसाइकिल के सहारे मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है। ग्रामीणों ने प्रशासन पर कई बार गुहार लगाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई न होने का आरोप लगाया है।
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मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने इसे बुनियादी सुविधाओं से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए PWD से विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। अदालत ने पूछा है कि आखिर इतने वर्षों बाद भी सड़क निर्माण क्यों नहीं हुआ और अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। इस मामले ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में बुनियादी ढांचे की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।


