तारिक रहमान की भारत यात्रा पर अब तक तारीख तय नहीं, रिश्तों की गर्माहट के बीच गंगा जल और शेख हसीना मुद्दा बना अहम
नई दिल्ली। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत यात्रा को लेकर कूटनीतिक गतिविधियां जारी हैं, लेकिन नई दिल्ली दौरे की अंतिम तारीख पर अभी सहमति नहीं बन पाई है। सितंबर में नई दिल्ली में हुए BRICS शिखर सम्मेलन में तारिक रहमान शामिल नहीं हुए और अब दोनों देशों के अधिकारी द्विपक्षीय यात्रा के लिए नवंबर के दूसरे हिस्से में संभावित तारीखों पर काम कर रहे हैं।
यह दौरा इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि फरवरी 2026 में तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत ने नई सरकार के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने का संकेत दिया था। उनके शपथ ग्रहण समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला भारत के प्रतिनिधि के तौर पर ढाका पहुंचे थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भारत आने का निमंत्रण भी सौंपा था।
BRICS से अलग है द्विपक्षीय भारत यात्रा
तारिक रहमान के भारत दौरे को लेकर सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि BRICS शिखर सम्मेलन का निमंत्रण और द्विपक्षीय यात्रा का निमंत्रण दो अलग-अलग प्रस्ताव थे।
भारत ने तारिक रहमान को BRICS के आउटरीच सत्र में BIMSTEC के वर्तमान अध्यक्ष के रूप में आमंत्रित किया था। इसके अलावा प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें अलग से भारत की द्विपक्षीय यात्रा का निमंत्रण भी दिया गया था। भारतीय विदेश मंत्रालय ने सितंबर में इस स्थिति को स्पष्ट किया था।
बांग्लादेश ने BRICS निमंत्रण को लेकर अलग रुख अपनाया और तारिक रहमान नई दिल्ली में आयोजित सम्मेलन में नहीं पहुंचे। हालांकि, इससे द्विपक्षीय भारत यात्रा का रास्ता औपचारिक रूप से बंद नहीं हुआ। बांग्लादेशी पक्ष ने भी संकेत दिया है कि अनुकूल माहौल बनने पर अलग द्विपक्षीय दौरा संभव है।
असली चुनौती तारीख से ज्यादा एजेंडे की है
भारत और बांग्लादेश के बीच बातचीत केवल एक औपचारिक मुलाकात तक सीमित नहीं रहने वाली। दोनों देशों के सामने ऐसे मुद्दे हैं जिनका असर सीमा, व्यापार, जल संसाधन और क्षेत्रीय संपर्क पर पड़ता है।
इनमें सबसे संवेदनशील मुद्दों में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की भारत में मौजूदगी और उनके प्रत्यर्पण की बांग्लादेश की मांग शामिल है। हालिया रिपोर्टों में इसे दोनों देशों के रिश्तों में एक प्रमुख अड़चन के रूप में बताया गया है।
ऐसे में तारिक रहमान की नई दिल्ली यात्रा तभी अधिक सार्थक हो सकती है जब दोनों पक्ष पहले से यह तय करें कि बैठक में किन मुद्दों पर बातचीत होगी और किन विषयों पर आगे की प्रक्रिया तय की जा सकती है।
गंगा जल संधि पर बढ़ती समय की चिंता
भारत-बांग्लादेश संबंधों में सबसे बड़ा दीर्घकालिक मुद्दा 1996 की गंगा जल बंटवारा संधि है। यह 30 वर्ष के लिए हुई थी और दिसंबर 2026 में इसकी अवधि समाप्त हो रही है। बांग्लादेश की संयुक्त नदी आयोग की आधिकारिक जानकारी भी इसकी 2026 में समाप्ति की पुष्टि करती है।
भारत के इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स के विश्लेषण के मुताबिक, मौजूदा संधि जिस जल-विज्ञान संबंधी परिस्थितियों पर आधारित थी, उनमें समय के साथ बदलाव आया है। जलवायु परिवर्तन, वर्षा के बदलते पैटर्न और नदी के प्रवाह में बदलाव भविष्य की जल कूटनीति को और जटिल बना सकते हैं।
यही कारण है कि इस संधि का नवीनीकरण सिर्फ दो सरकारों के बीच कागजी समझौते का विषय नहीं है। इसका संबंध कृषि, सिंचाई, नदी पारिस्थितिकी और दोनों देशों की करोड़ों आबादी की जल जरूरतों से जुड़ा हुआ है।
व्यापार और कनेक्टिविटी भी बातचीत के केंद्र में
जल बंटवारे के साथ व्यापार और कनेक्टिविटी भी दोनों देशों के रिश्तों की दिशा तय करेंगे। अगस्त में दोनों देशों के बीच संभावित उच्चस्तरीय बातचीत को लेकर आई रिपोर्टों में गंगा जल संधि के अलावा ऊर्जा सहयोग और व्यापार प्रतिबंधों से जुड़े विषयों को भी संभावित एजेंडे का हिस्सा बताया गया था।
भारत और बांग्लादेश के बीच सड़क, रेल, नदी और बंदरगाह आधारित संपर्क पहले से ही क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसलिए राजनीतिक रिश्तों में लंबे समय तक तनाव रहने का असर केवल राजनयिक संवाद पर नहीं, बल्कि व्यापारिक गतिविधियों और सीमा क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
नवंबर का संभावित दौरा क्यों महत्वपूर्ण होगा?
सितंबर में BRICS बैठक से तारिक रहमान की अनुपस्थिति के बाद अब नवंबर का संभावित दौरा दोनों देशों के लिए एक अलग अवसर हो सकता है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार नई दिल्ली और ढाका नवंबर के दूसरे हिस्से में तारीख तलाश रहे हैं।
अगर यह बैठक होती है तो इसका महत्व केवल इस बात में नहीं होगा कि दोनों प्रधानमंत्रियों की मुलाकात हुई। ज्यादा महत्वपूर्ण यह होगा कि बातचीत से कौन से व्यावहारिक मुद्दे आगे बढ़ते हैं—गंगा जल संधि, व्यापार, संपर्क, ऊर्जा सहयोग और दोनों देशों के बीच राजनीतिक विश्वास जैसे विषयों पर क्या कोई ठोस प्रक्रिया शुरू होती है।
भारत ने फरवरी में ही स्पष्ट किया था कि वह बांग्लादेश के साथ दीर्घकालिक संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।
अब चुनौती यह है कि दोनों देशों की राजनीतिक प्राथमिकताओं और संवेदनशील मुद्दों के बीच ऐसा संवाद कैसे तैयार किया जाए जिसमें मतभेदों के बावजूद व्यावहारिक सहयोग आगे बढ़ सके।
आगे क्या?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि भारत यात्रा होगी या नहीं, बल्कि यह है कि यात्रा की तारीख और एजेंडा पर दोनों पक्ष कब सहमत होते हैं। नवंबर में संभावित बैठक होने की स्थिति में गंगा जल संधि की दिसंबर समय-सीमा इसे और महत्वपूर्ण बना देगी।



