CBSE में बड़ा नेतृत्व बदलाव: IAS Mandeep K Bhandari बने नए चेयरपर्सन, OSM के बाद भरोसा बहाल करना होगी बड़ी चुनौती
नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) को नया नेतृत्व मिल गया है। केंद्र सरकार ने 25 सितंबर 2026 को वरिष्ठ IAS अधिकारी मंदीप के. भंडारी को CBSE का नया चेयरपर्सन नियुक्त किया है। नियुक्ति को कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) ने मंजूरी दी है और इस पद को अस्थायी रूप से केंद्र सरकार के अतिरिक्त सचिव के स्तर और वेतनमान के अनुरूप अपग्रेड किया गया है।
मंदीप भंडारी 2001 बैच के AGMUT कैडर के IAS अधिकारी हैं। नियुक्ति से पहले वह जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल के प्रधान सचिव के तौर पर काम कर रहे थे और श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड के CEO का दायित्व भी संभाल रहे थे। प्रशासनिक स्तर पर जम्मू-कश्मीर में उनका अनुभव अब देश के सबसे बड़े स्कूली शिक्षा बोर्डों में से एक CBSE के कामकाज में इस्तेमाल होगा।
नियुक्ति का समय क्यों महत्वपूर्ण है?
मंदीप भंडारी को CBSE की कमान ऐसे समय मिली है, जब बोर्ड की परीक्षा और मूल्यांकन व्यवस्था में डिजिटल बदलाव को लेकर कई सवाल उठे हैं। 2026 की कक्षा 12 की परीक्षाओं में CBSE ने On-Screen Marking (OSM) व्यवस्था लागू की थी। बोर्ड के आधिकारिक परीक्षा परिपत्रों में फरवरी 2026 से OSM की शुरुआत, मॉक मूल्यांकन और मई में OSM से संबंधित जानकारी जारी किए जाने का रिकॉर्ड मौजूद है।
डिजिटल मूल्यांकन का उद्देश्य उत्तर पुस्तिकाओं की जांच को तकनीक आधारित बनाना और प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित करना था। लेकिन परीक्षा परिणाम के बाद उत्तर पुस्तिकाओं, पोर्टल संबंधी समस्याओं और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर शिकायतें सामने आईं। इसके बाद OSM से जुड़ी व्यवस्था और सेवाओं की खरीद को लेकर भी जांच की प्रक्रिया शुरू हुई। जून में तत्कालीन चेयरपर्सन राहुल सिंह को हटाया गया था और नेतृत्व में बदलाव किया गया।
यही वजह है कि नई नियुक्ति को केवल प्रशासनिक फेरबदल के तौर पर देखना पर्याप्त नहीं होगा। CBSE के सामने अब तकनीक अपनाने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करने की चुनौती है कि डिजिटल व्यवस्था छात्रों के लिए अधिक भरोसेमंद और जवाबदेह बने।
अब नए चेयरपर्सन के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या होगी?
CBSE का काम सिर्फ बोर्ड परीक्षा आयोजित करने तक सीमित नहीं है। परीक्षा कार्यक्रम, मूल्यांकन, परिणाम, पुनर्मूल्यांकन, संबद्ध स्कूलों की व्यवस्था और लाखों विद्यार्थियों से जुड़ी डिजिटल सेवाएं सीधे बोर्ड के कामकाज से जुड़ी हैं। ऐसे में किसी तकनीकी बदलाव की सफलता केवल इस बात से तय नहीं होती कि सिस्टम ऑनलाइन है या नहीं, बल्कि इससे होती है कि वह सटीक, सुरक्षित, पारदर्शी और संकट की स्थिति में तुरंत संभालने योग्य है या नहीं।
OSM के अनुभव ने इसी पहलू को सामने ला दिया है। CBSE की ओर से 2026 में स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध कराने और पोस्ट-रिजल्ट सुविधाओं से जुड़े अलग-अलग परिपत्र जारी किए गए थे। इससे यह स्पष्ट है कि मूल्यांकन के बाद छात्रों को अपनी उत्तर पुस्तिका देखने, सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन जैसी प्रक्रियाओं की सुविधा भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मंदीप भंडारी के सामने इसलिए आने वाले महीनों में तीन स्तरों पर काम महत्वपूर्ण रहेगा—डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था की विश्वसनीयता, शिकायतों के निपटारे की पारदर्शिता और परीक्षा से जुड़ी सेवाओं में तकनीकी स्थिरता।
CBSE में बार-बार नेतृत्व बदलाव का असर
इस साल CBSE में नेतृत्व स्तर पर कई बदलाव हुए हैं। ऐसे दौर में नए चेयरपर्सन के लिए सबसे अहम काम संस्थागत निरंतरता बनाए रखना होगा। बोर्ड जैसी बड़ी संस्था में नीतियों और तकनीकी प्रणालियों को बार-बार बदलने के बजाय यह देखना जरूरी होता है कि जो व्यवस्था लागू हो चुकी है, उसमें कमियां कहां हैं और उन्हें किस तरह व्यवस्थित तरीके से दूर किया जाए।
मंदीप भंडारी की प्रशासनिक पृष्ठभूमि को देखते हुए उनके सामने केवल परीक्षा प्रणाली नहीं, बल्कि पूरे संस्थागत तंत्र को स्थिर रखने की जिम्मेदारी होगी। खासकर तब, जब CBSE आने वाले परीक्षा चक्रों में डिजिटल प्रक्रियाओं का इस्तेमाल बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
आगे क्या बदलेगा?
नई नियुक्ति के बाद छात्रों, अभिभावकों और स्कूलों की नजर सबसे ज्यादा परीक्षा और मूल्यांकन से जुड़े फैसलों पर रहेगी। OSM व्यवस्था को लेकर सामने आई समस्याओं से सबक लेकर यदि तकनीकी निगरानी, शिकायत समाधान और उत्तर पुस्तिका संबंधी प्रक्रियाओं को और स्पष्ट किया जाता है, तो इसका असर केवल एक परीक्षा सत्र तक सीमित नहीं रहेगा।



