Seva Setu: छत्तीसगढ़ में सुशासन की बड़ी पहल, 38 विभागों की 939 सेवाएं अब एक मंच पर
रायपुर, 20 अक्टूबर 2026। सरकारी दफ्तरों के चक्कर, अलग-अलग विभागों में आवेदन जमा करने की परेशानी और अपने काम की स्थिति जानने के लिए बार-बार पूछताछ—आम नागरिकों के लिए ये समस्याएं लंबे समय से प्रशासनिक व्यवस्था की बड़ी चुनौती रही हैं। छत्तीसगढ़ में इन मुश्किलों को कम करने के उद्देश्य से संचालित सेवा सेतु डिजिटल प्रशासन को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित इस व्यवस्था के तहत राज्य के 38 विभागों की 939 शासकीय सेवाएं एक मंच पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसका मकसद सिर्फ सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन करना नहीं, बल्कि नागरिकों और प्रशासन के बीच की दूरी घटाना तथा आवेदन प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है।
38 विभागों की 939 सेवाएं, हजारों केंद्रों का नेटवर्क
सेवा सेतु के मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि इस व्यवस्था का दायरा व्यापक है। राज्य में इसके संचालन के लिए 16,773 सेवा केंद्रों का नेटवर्क तैयार किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ऑनलाइन प्राप्त 55,13,672 आवेदनों पर कार्रवाई जारी है। वहीं, 21,582 अधिकारी-कर्मचारी इस व्यवस्था से जुड़कर सेवाओं के संचालन में भूमिका निभा रहे हैं।
इन आंकड़ों का महत्व केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार तक सीमित नहीं है। इतनी बड़ी संख्या में आवेदनों का प्रभावी निपटारा करना प्रशासनिक क्षमता, विभागों के बीच समन्वय और नागरिकों को समय पर सेवा उपलब्ध कराने की वास्तविक परीक्षा भी है।
प्रमाण पत्र से लाइसेंस तक, आवेदन प्रक्रिया होगी आसान
आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र, विवाह पंजीयन तथा गुमास्ता लाइसेंस जैसी सेवाओं के लिए सेवा सेतु के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। एक ही मंच पर कई सेवाएं उपलब्ध होने से नागरिकों को अलग-अलग विभागों की प्रक्रिया समझने और आवेदन जमा करने के लिए बार-बार कार्यालय जाने की जरूरत कम हो सकती है।
इसका लाभ विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों और दूरस्थ वनांचलों में रहने वाले लोगों को मिल सकता है। कई क्षेत्रों में सरकारी कार्यालय तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। ऐसे में आवेदन प्रक्रिया का डिजिटलीकरण यात्रा में लगने वाले समय और खर्च को कम करने में मददगार हो सकता है।
हालांकि, ऑनलाइन आवेदन की सुविधा तभी पूरी तरह उपयोगी साबित होगी, जब दस्तावेजों की जांच, आवेदन की प्रगति और अंतिम प्रमाण पत्र या स्वीकृति प्राप्त करने की प्रक्रिया भी सहज बनी रहे।
डिजिटल प्रशासन में असली कसौटी समय पर काम पूरा होना
सरकारी सेवाओं का ऑनलाइन होना सुशासन की दिशा में जरूरी कदम है, लेकिन इसकी सफलता का आकलन केवल उपलब्ध सेवाओं या पंजीकृत उपयोगकर्ताओं की संख्या से नहीं किया जा सकता। आम नागरिक के लिए सबसे अहम सवाल यह है कि उसका आवेदन कितने समय में पूरा होता है और समस्या आने पर उसे सहायता कहां मिलती है।
डिजिटल व्यवस्था में आवेदन की स्थिति देखने, संबंधित अधिकारी तक प्रकरण पहुंचाने और प्रक्रिया को व्यवस्थित करने की सुविधा जवाबदेही बढ़ाने में मदद कर सकती है। इसके साथ ही लंबित आवेदनों की निगरानी, स्पष्ट समय-सीमा और शिकायतों के प्रभावी समाधान पर भी ध्यान देना जरूरी है।
यदि आवेदन लंबे समय तक लंबित रहें या नागरिकों को बार-बार अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने पड़ें, तो ऑनलाइन व्यवस्था के बावजूद पुरानी परेशानियां बनी रह सकती हैं। इसलिए तकनीकी सुविधा के साथ प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधार भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
गांवों और वनांचलों में सेवा केंद्रों की अहम भूमिका
डिजिटल सेवाओं का लाभ हर नागरिक तक पहुंचाने में सेवा केंद्र महत्वपूर्ण कड़ी हैं। जिन लोगों को स्मार्टफोन, इंटरनेट, ऑनलाइन फॉर्म या दस्तावेज अपलोड करने की पर्याप्त जानकारी नहीं है, वे इन केंद्रों की मदद से आवेदन कर सकते हैं।
लेकिन इसके लिए सेवा केंद्रों पर प्रशिक्षित कर्मचारियों, विश्वसनीय इंटरनेट, स्पष्ट शुल्क व्यवस्था और नागरिकों के साथ सहयोगपूर्ण व्यवहार की जरूरत होगी। बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और डिजिटल प्रक्रियाओं से अपरिचित लोगों के लिए सहायता उपलब्ध कराना भी समावेशी प्रशासन का हिस्सा है।
डिजिटल सुविधा का अर्थ यह नहीं होना चाहिए कि जिन लोगों के पास इंटरनेट या तकनीकी जानकारी नहीं है, वे सरकारी सेवाओं से दूर हो जाएं। ऑनलाइन मंच और प्रत्यक्ष सहायता केंद्रों का बेहतर तालमेल ही इस पहल को व्यापक रूप से उपयोगी बना सकता है।
आगे की राह: आंकड़ों से आगे बढ़कर परिणामों पर जोर
सेवा सेतु का अगला महत्वपूर्ण चरण सेवाओं की गुणवत्ता और समयबद्ध निराकरण को मजबूत करना होगा। विभागवार लंबित आवेदनों की निगरानी, आवेदन निपटाने में लगने वाले औसत समय की समीक्षा और नागरिकों की शिकायतों पर कार्रवाई जैसे उपाय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बना सकते हैं।
यदि इन पहलुओं पर लगातार काम होता है, तो डिजिटल प्रशासन नागरिकों के समय और संसाधनों की बचत के साथ सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाने में भी मदद कर सकता है। इससे लोगों का भरोसा मजबूत होने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक नागरिक-केंद्रित बनाने की संभावना बढ़ेगी।
कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ में सेवा सेतु का विस्तार सरकारी सेवाओं को एक मंच पर लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसकी वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि नागरिकों को आवेदन से लेकर अंतिम निराकरण तक कितनी सहज, पारदर्शी और समयबद्ध सेवा मिलती है।




