हूती हमलों के बाद सऊदी अरब का बड़ा पलटवार, यमन में एयरस्ट्राइक से बढ़ा युद्ध का खतरा
यमन का पुराना संघर्ष एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। पिछले दिनों सऊदी अरब के शहरों और हवाई अड्डों पर हूती हमलों के बाद अब सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन में जवाबी सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है। 8 अक्टूबर को हूती-नियंत्रित इलाकों में हवाई हमलों की खबर सामने आई, जिनमें लाल सागर के तट पर स्थित होदेइदाह और यमन के अन्य हिस्सों को निशाना बनाए जाने की जानकारी है।
यह घटनाक्रम इसलिए गंभीर है क्योंकि संघर्ष अब केवल सीमित सैन्य ठिकानों तक नहीं रह गया है। मिसाइल, ड्रोन, एयरपोर्ट और ऊर्जा ढांचे जैसे संवेदनशील ठिकाने इसकी चपेट में आ रहे हैं। इससे यमन के साथ-साथ लाल सागर, खाड़ी क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय विमानन तथा ऊर्जा बाजारों पर भी दबाव बढ़ रहा है।
एयरपोर्ट और संचार ढांचे बने नए निशाने
हूती हमलों के बाद सऊदी अरब की कार्रवाई यमन के पश्चिमी हिस्सों में केंद्रित दिखाई दे रही है। रिपोर्टों के अनुसार होदेइदाह इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास धमाकों की आवाजें सुनी गईं। सना के पश्चिमी क्षेत्र और रायमाह प्रांत में संचार सुविधाओं को भी निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। यारिम में एक सैन्य ठिकाने पर हमले की बात भी स्थानीय लोगों के हवाले से सामने आई है।
हालांकि, युद्ध के बीच आने वाली ऐसी सूचनाओं को लेकर सावधानी जरूरी है। दोनों पक्ष अक्सर अपनी सैन्य कार्रवाई के दायरे और नुकसान को अलग-अलग तरीके से पेश करते हैं। इसलिए किसी विशेष ठिकाने को हुए नुकसान या सैन्य हताहतों के आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि के बिना अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
सऊदी अरब तक पहुंच चुके हैं हूती हमले
इस बार तनाव की गंभीरता का सबसे बड़ा संकेत यह है कि हूती हमलों का असर सऊदी अरब के महत्वपूर्ण नागरिक ठिकानों तक पहुंचा है।
7 अक्टूबर को सऊदी अधिकारियों ने बताया कि रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट और अबहा एयरपोर्ट पर हुए हमलों में तीन लोगों की मौत हुई और 36 लोग घायल हुए। हूतियों ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली थी।
इसके बाद 8 अक्टूबर को रियाद में फिर विस्फोटों की खबर सामने आई। किंग खालिद एयरपोर्ट पर हमले के कारण उड़ान संचालन प्रभावित हुआ।
यही वह बिंदु है जहां संघर्ष की प्रकृति बदलती दिख रही है। जब किसी देश के एयरपोर्ट और नागरिक विमानन व्यवस्था सीधे खतरे में आती है, तो सैन्य प्रतिक्रिया के साथ-साथ आर्थिक और कूटनीतिक दबाव भी तेजी से बढ़ता है।
भारत पर भी पड़ रहा है सीधा असर
मध्य-पूर्व का यह संकट भारत से बहुत दूर नहीं है। 8 अक्टूबर को दिल्ली से रियाद जा रही एयर इंडिया की उड़ान को सुरक्षा स्थिति के कारण वापस दिल्ली लौटना पड़ा। इसके बाद एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने रियाद के लिए उड़ानों को 10 अक्टूबर तक निलंबित करने की जानकारी दी।
इसका असर केवल यात्रियों तक सीमित नहीं रहता। सऊदी अरब में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं। हवाई संपर्क बाधित होने पर यात्रियों, व्यापारिक गतिविधियों और क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों पर तुरंत प्रभाव पड़ सकता है।
अगर हवाई सुरक्षा की स्थिति लंबे समय तक खराब रहती है, तो एयरलाइंस को वैकल्पिक रूट अपनाने पड़ सकते हैं, जिससे यात्रा समय और परिचालन लागत दोनों बढ़ सकते हैं।
असली खतरा सिर्फ युद्ध नहीं, तेल और समुद्री व्यापार भी है
यमन का भौगोलिक महत्व इस संघर्ष को स्थानीय युद्ध से कहीं बड़ा बना देता है। लाल सागर और बाब-अल-मंदेब क्षेत्र वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण रास्ते हैं। यहां तनाव बढ़ने का मतलब जहाजों की सुरक्षा, बीमा लागत और ऊर्जा आपूर्ति पर अतिरिक्त दबाव हो सकता है।
हूती हमलों में सऊदी ऊर्जा प्रतिष्ठानों को भी निशाना बनाए जाने के दावे सामने आए हैं। 3 अक्टूबर को रियाद स्थित अरामको सुविधा पर मिसाइल और ड्रोन हमले का दावा हूतियों ने किया था, हालांकि उस समय सऊदी अधिकारियों या अरामको की ओर से हमले की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई थी।
बाजार पहले ही इस तनाव को लेकर संवेदनशील हो चुका है। 8 अक्टूबर को ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया, जबकि क्षेत्रीय समुद्री मार्गों में व्यवधान की आशंकाओं ने तेल कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बनाया।
भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए लंबे समय तक ऊंची कच्चे तेल की कीमतें चिंता का विषय बन सकती हैं। इसका असर परिवहन लागत से लेकर महंगाई और चालू खाते के दबाव तक दिखाई दे सकता है।
संघर्ष की जड़ 2014 में है
यमन का संकट अचानक पैदा नहीं हुआ। 2014 में हूतियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया और देश के बड़े हिस्से में अपना प्रभाव मजबूत किया। इसके बाद मार्च 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप शुरू किया।
इसके बाद वर्षों तक संघर्ष चलता रहा। 2022 में एक युद्धविराम ने हिंसा को काफी हद तक कम किया, लेकिन स्थायी राजनीतिक समाधान नहीं निकल सका। अब 2026 में संघर्ष फिर तेज हो गया है और पिछले कुछ महीनों में स्थिति तेजी से बिगड़ी है।
हूतियों को ईरान के साथ जोड़ा जाता है, जबकि सऊदी अरब यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करता है। हालांकि इस पूरे संघर्ष को केवल सऊदी अरब बनाम ईरान के टकराव के रूप में देखना अधूरा होगा। यमन के भीतर राजनीतिक, क्षेत्रीय और सैन्य हित भी इस संघर्ष को प्रभावित करते हैं।
सबसे बड़ा सवाल: क्या संघर्ष फिर क्षेत्रीय युद्ध बनेगा?
यही आने वाले दिनों की सबसे महत्वपूर्ण चिंता है।
सऊदी अरब पहले ही बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चला रहा है। दूसरी ओर हूती संगठन सऊदी शहरों, एयरपोर्ट और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाने की क्षमता दिखा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने पिछले दिनों हूती सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमले किए हैं।
अगर हमले और जवाबी हमले इसी गति से जारी रहते हैं तो तीन जोखिम तेजी से बढ़ सकते हैं—
पहला, यमन में मानवीय संकट और विस्थापन बढ़ सकता है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार हालिया संघर्ष में 2 लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं।
दूसरा, बाब-अल-मंदेब और लाल सागर में समुद्री यातायात प्रभावित हो सकता है।
तीसरा, बाहरी देशों की सैन्य भागीदारी बढ़ने से संघर्ष का दायरा यमन की सीमाओं से बाहर जा सकता है।
अब कूटनीति की भूमिका और महत्वपूर्ण
सैन्य कार्रवाई से किसी पक्ष को तत्काल सामरिक लाभ मिल सकता है, लेकिन यमन के लंबे संकट का स्थायी समाधान केवल हवाई हमलों से संभव नहीं दिखता। देश में राजनीतिक विभाजन, क्षेत्रीय शक्तियों की प्रतिस्पर्धा और अलग-अलग सशस्त्र गुटों की मौजूदगी ने स्थिति को बेहद जटिल बना दिया है।
इसलिए आने वाले दिनों में सिर्फ यह देखना महत्वपूर्ण नहीं होगा कि सऊदी अरब कितने हमले करता है या हूती कितने मिसाइल और ड्रोन दागते हैं। ज्यादा अहम सवाल यह होगा कि क्या दोनों पक्षों के बीच किसी नए राजनीतिक संवाद की जमीन बनती है।
फिलहाल तस्वीर चिंताजनक है। एयरपोर्ट से लेकर ऊर्जा प्रतिष्ठानों तक हमले पहुंच चुके हैं और जवाबी कार्रवाई भी तेज हो गई है। यदि तनाव को सीमित करने की कोशिश सफल नहीं होती, तो यमन का संघर्ष एक बार फिर पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा, तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बड़ा संकट बन सकता है।



