छपरा (सारण). मौसम का मिजाज इन दिनों लगातार बदल रहा है — सुबह करीब 10 बजे से तेज धूप निकल रही है, तो बीच-बीच में हल्की बारिश भी हो जाती है। मौसम के इसी उतार-चढ़ाव का सीधा असर अब लोगों की सेहत पर दिखने लगा है। सर्दी, खांसी और बुखार की शिकायत लेकर बड़ी संख्या में मरीज सदर अस्पताल पहुंच रहे हैं, जिससे अस्पताल प्रशासन भी सतर्क हो गया है।
पिछले चार-पांच दिनों में तेजी से बढ़े मरीज
अस्पताल सूत्रों के मुताबिक बीते चार-पांच दिनों में ओपीडी के मेडिसिन और चाइल्ड वार्ड में मरीजों की संख्या में खासा इजाफा हुआ है। कई मरीजों को दो-तीन दिन तक लगातार तेज बुखार रहने के बाद ही जांच कराने की नौबत आ रही है। इनमें से कुछ मरीज डेंगू की आशंका को लेकर भी अपनी जांच करवा रहे हैं, हालांकि अभी तक यह साफ नहीं है कि इनमें कितने मामले वास्तव में डेंगू के निकले हैं।
सुबह साढ़े आठ बजे से ही लगने लगी कतार
शनिवार को यह भीड़ खासतौर पर देखने को मिली। सुबह 8:30 बजे से ही सदर अस्पताल के ओपीडी में मरीजों की आवाजाही बढ़ गई थी और महज आधे घंटे में यानी सुबह नौ बजे तक दोनों रजिस्ट्रेशन काउंटरों पर लंबी-लंबी कतारें लग गईं। पहुंचने वाले ज्यादातर मरीज वायरल इंफेक्शन, सर्दी, खांसी और बुखार की शिकायत लेकर आए थे। दिन में जहां ओपीडी में भीड़ रही, वहीं रात होते-होते कई मरीज इमरजेंसी वार्ड का रुख करने लगे। स्कूल से लौटने वाले बच्चों पर भी तेज धूप और बदलते मौसम का असर साफ नजर आ रहा है।
अस्पताल प्रशासन अलर्ट, जांच केंद्र 24 घंटे चालू
बढ़ती मरीजों की संख्या को देखते हुए सदर अस्पताल प्रबंधन ने भी अपनी व्यवस्था दुरुस्त की है। अस्पताल के प्रबंधक राजेश्वर प्रसाद के अनुसार, ओपीडी में तैनात सभी चिकित्सकों को तय समय पर ड्यूटी पर मौजूद रहने का निर्देश दिया गया है। मरीजों का पहले नियमानुसार रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है, उसके बाद उन्हें संबंधित विभाग में भेजा जा रहा है, ताकि इलाज में देरी न हो।
राजेश्वर प्रसाद ने यह भी बताया कि अस्पताल का जांच केंद्र चौबीसों घंटे काम कर रहा है, जबकि दवा काउंटर सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक मरीजों को दवाएं उपलब्ध करा रहा है। उनके मुताबिक फिलहाल जरूरी दवाओं का पर्याप्त स्टॉक अस्पताल में मौजूद है, और जिन दवाओं की कमी महसूस हो रही है, उन्हें एक-दो दिनों के भीतर मंगवाने की प्रक्रिया चल रही है।
मोहल्लों में जमा पानी बना बीमारी की जड़
बीमारी बढ़ने की एक बड़ी वजह शहर के कई मोहल्लों में अब भी बना जलजमाव माना जा रहा है। हाल में हुई बारिश के बाद कई खाली जमीनों पर पानी जमा हो गया था, जो अब तक पूरी तरह नहीं निकल पाया है। हवाई अड्डा मोहल्ले में तो अलग-अलग बड़े नालों के जरिए बाढ़ का पानी भी जमा हो गया था। नगर निगम की टीम मोटर लगाकर इस पानी को निकालने में जुटी है, लेकिन कई इलाकों की खाली जमीनों पर पानी अब भी बना हुआ है। तेज धूप की वजह से यह ठहरा हुआ पानी अब सड़ने लगा है, जिससे आसपास के मोहल्ले में दुर्गंध फैल रही है।
डेंगू-मलेरिया की आशंका से सहमे स्थानीय लोग
जमा पानी और उससे उठ रही बदबू ने स्थानीय निवासियों की चिंता बढ़ा दी है। लोगों को डर है कि कहीं यह हालात डेंगू और मलेरिया जैसी मच्छरजनित बीमारियों को न्योता न दे दें। दरअसल जिन इलाकों में लंबे समय से पानी जमा है, वहां मच्छरों का प्रकोप भी लगातार बढ़ता जा रहा है — और यही वजह है कि तेज बुखार वाले कई मरीज डेंगू की आशंका में खुद जांच करवाने पहुंच रहे हैं।
मेयर ने बनाई टीम, प्रभावित इलाकों में छिड़काव शुरू
हालात को देखते हुए नगर निगम की मेयर लक्ष्मी नारायण गुप्ता ने जलनिकासी की समस्या सुलझाने के लिए एक विशेष टीम का गठन किया है। जिन इलाकों में कई दिनों से पानी जमा है, वहां ब्लीचिंग पाउडर समेत अन्य जरूरी सामग्री का छिड़काव भी शुरू करा दिया गया है, ताकि मच्छरों की पैदावार रोकी जा सके और संक्रमण को फैलने से पहले काबू में लाया जा सके।
निष्कर्ष
सारण में इस वक्त मौसम की बेरुखी और शहर के जलनिकासी तंत्र, दोनों मिलकर लोगों की सेहत पर भारी पड़ रहे हैं। अस्पताल प्रशासन जहां मरीजों को बेहतर इलाज देने की कोशिश में जुटा है, वहीं नगर निगम जलजमाव खत्म करने में लगा है। लेकिन जब तक मौसम पूरी तरह स्थिर नहीं होता और जलजमाव की समस्या पूरी तरह हल नहीं होती, तब तक सदर अस्पताल के ओपीडी में मरीजों की यह भीड़ बने रहने की आशंका है। ऐसे में विशेषज्ञ लोगों से सतर्क रहने और बुखार के लक्षण दिखते ही जल्द जांच कराने की सलाह दे रहे हैं।



