नई दिल्ली। राष्ट्रीय पोषण माह 2026 की शुरुआत 9 सितंबर से हो गई है। इस वर्ष अभियान की थीम “हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी” रखी गई है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार, अभियान का उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों को पोषण, स्वास्थ्य, देखभाल और बच्चों के शुरुआती विकास से जोड़ना है। इस दौरान संतुलित आहार, पर्याप्त प्रोटीन, अलग-अलग खाद्य समूहों और स्थानीय खाद्य पदार्थों के उपयोग पर जोर दिया जा रहा है। अभियान का फोकस गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, बच्चों, किशोरों और उनके परिवारों पर रहेगा।
आंगनवाड़ी केंद्रों की भूमिका पर जोर
राष्ट्रीय पोषण माह 2026 में आंगनवाड़ी केंद्रों को समुदाय आधारित पोषण और बाल विकास का प्रमुख केंद्र बनाने पर जोर दिया गया है। सरकार का उद्देश्य है कि परिवार इन केंद्रों को केवल भोजन या पंजीकरण से जुड़ी जगह न मानें, बल्कि स्वास्थ्य और पोषण संबंधी जानकारी के विश्वसनीय माध्यम के रूप में भी उपयोग करें।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से बच्चों के पोषण, गर्भवती महिलाओं की देखभाल, स्तनपान, पूरक आहार और शुरुआती शिक्षा से जुड़ी जानकारी परिवारों तक पहुंचाई जाती है।
इस अभियान में स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। इसका अर्थ है कि बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी केवल सरकारी विभागों तक सीमित न रहकर परिवार, पंचायत और समाज की भी साझा जिम्मेदारी बने।
इस वर्ष की थीम क्या है?
इस वर्ष राष्ट्रीय पोषण माह की केंद्रीय थीम “हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी” है। थीम के माध्यम से लोगों से आंगनवाड़ी केंद्रों की गतिविधियों और सेवाओं में सहयोग करने की अपील की गई है।
थीम का उद्देश्य पोषण, देखभाल और बच्चों के शुरुआती विकास में सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करना है। परिवारों को यह समझाने का प्रयास किया जा रहा है कि बच्चों का स्वास्थ्य केवल बीमारी के समय इलाज कराने से नहीं, बल्कि रोजाना के भोजन और देखभाल से भी जुड़ा है।
सरकार ने अभियान में आहार की विविधता, प्रोटीन युक्त भोजन और स्थानीय खाद्य पदार्थों को शामिल करने पर विशेष ध्यान दिया है।
संतुलित आहार क्यों जरूरी?
संतुलित आहार में शरीर की जरूरत के अनुसार प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन, खनिज और फाइबर शामिल होते हैं। केवल पेट भरना पर्याप्त नहीं है; भोजन में विभिन्न पोषक तत्वों का होना भी जरूरी है।
रोज के भोजन में दाल, चना, राजमा, हरी सब्जियां, मौसमी फल, साबुत अनाज, दूध या दही और पर्याप्त पानी शामिल किया जा सकता है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य पदार्थों का उपयोग कम लागत में पोषण बढ़ाने में मदद कर सकता है।
भोजन में विविधता होने से शरीर को अलग-अलग पोषक तत्व मिलते हैं। बच्चों, किशोरों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए पोषण की जरूरत अलग होती है, इसलिए उनके भोजन पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थ
राष्ट्रीय पोषण माह में पर्याप्त प्रोटीन लेने पर जोर दिया जा रहा है। प्रोटीन शरीर की वृद्धि, मांसपेशियों के विकास और ऊतकों की मरम्मत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
शाकाहारी भोजन में दालें, चना, राजमा, सोयाबीन, पनीर, दूध, दही, मूंगफली और अन्य मेवे प्रोटीन के अच्छे स्रोत हो सकते हैं। गैर-शाकाहारी लोग अंडे, मछली और मांस से भी प्रोटीन प्राप्त करते हैं।
बच्चों के भोजन में केवल दूध या बिस्कुट पर निर्भर रहने के बजाय दाल, खिचड़ी, अंडा, पनीर, फल और सब्जियों को शामिल करना बेहतर है। किसी विशेष बीमारी या पोषण संबंधी समस्या में डॉक्टर या पोषण विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।
बच्चों और किशोरों पर विशेष ध्यान
अभियान में बच्चों और किशोरों के पोषण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बढ़ती उम्र में शरीर और मस्तिष्क के विकास के लिए पर्याप्त ऊर्जा और पोषक तत्व जरूरी होते हैं।
बच्चों को नियमित अंतराल पर पौष्टिक भोजन देना चाहिए। पैकेट वाले खाद्य पदार्थ, अधिक चीनी वाले पेय और अत्यधिक तले हुए भोजन का सेवन सीमित करना उपयोगी हो सकता है।
किशोरों में पढ़ाई, खेल और शारीरिक विकास के कारण पोषण की जरूरत बढ़ जाती है। उनके भोजन में प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों का संतुलन होना चाहिए।
गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए पोषण
गर्भावस्था के दौरान महिला और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए संतुलित आहार जरूरी होता है। इस समय भोजन में दालें, हरी सब्जियां, फल, दूध या दही, साबुत अनाज और डॉक्टर की सलाह के अनुसार आयरन तथा अन्य सप्लीमेंट शामिल किए जाते हैं।
स्तनपान कराने वाली माताओं को पर्याप्त भोजन और पानी लेना चाहिए। मां का स्वास्थ्य बेहतर रहने से वह शिशु की बेहतर देखभाल कर सकती है।
गर्भवती महिलाओं को किसी भी सप्लीमेंट या दवा का सेवन डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी की सलाह से करना चाहिए। आंगनवाड़ी और स्वास्थ्य केंद्रों से मिलने वाली सेवाओं का लाभ लेना जरूरी है।
स्थानीय खाद्य पदार्थों का उपयोग
राष्ट्रीय पोषण माह में स्थानीय और पारंपरिक खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है। मोटे अनाज, दालें, हरी सब्जियां, मौसमी फल और स्थानीय अनाज कम लागत में पोषण देने में मदद कर सकते हैं।
बाजरा, ज्वार, रागी, कोदो और कुटकी जैसे अनाज कई क्षेत्रों में आसानी से उपलब्ध होते हैं। इन्हें रोटी, खिचड़ी, दलिया या अन्य व्यंजनों में शामिल किया जा सकता है।
स्थानीय भोजन का उपयोग परिवारों के बजट पर कम दबाव डालता है और पारंपरिक खान-पान को भी बढ़ावा देता है। हालांकि, भोजन साफ-सफाई के साथ तैयार करना और सुरक्षित पानी का उपयोग करना जरूरी है।
स्वस्थ जीवनशैली में व्यायाम भी जरूरी
पोषण के साथ नियमित शारीरिक गतिविधि भी स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बच्चों और वयस्कों को अपनी क्षमता के अनुसार रोजाना सक्रिय रहने की आदत बनानी चाहिए।
तेज चलना, योग, खेल, साइकिल चलाना और घरेलू शारीरिक गतिविधियां शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकती हैं। लंबे समय तक लगातार बैठने और स्क्रीन देखने से बचना भी जरूरी है।
पर्याप्त नींद, साफ-सफाई, तनाव प्रबंधन और तंबाकू तथा शराब से दूरी भी स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा हैं। किसी भी व्यायाम या डाइट में बड़ा बदलाव करने से पहले स्वास्थ्य स्थिति का ध्यान रखना चाहिए।
अभियान में समुदाय की भागीदारी
राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान आंगनवाड़ी केंद्रों, पंचायतों और स्थानीय समुदायों के माध्यम से जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इनमें पोषण संवाद, स्वास्थ्य जांच, बच्चों की वृद्धि की निगरानी और परिवारों को भोजन संबंधी जानकारी देना शामिल हो सकता है।
परिवारों को सलाह दी जा रही है कि वे बच्चों के वजन और विकास पर ध्यान दें। यदि बच्चे का वजन नहीं बढ़ रहा हो, वह लगातार कमजोर या बीमार रहता हो, तो स्वास्थ्यकर्मी से सलाह लेनी चाहिए।
FAQs
1. राष्ट्रीय पोषण माह 2026 की थीम क्या है?
राष्ट्रीय पोषण माह 2026 की थीम “हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी” है।
2. राष्ट्रीय पोषण माह कब शुरू हुआ?
राष्ट्रीय पोषण माह 2026 का शुभारंभ 9 सितंबर 2026 को वाराणसी में किया गया।
3. अभियान का मुख्य उद्देश्य क्या है?
अभियान का उद्देश्य पोषण, स्वास्थ्य, देखभाल और बच्चों के शुरुआती विकास में आंगनवाड़ी केंद्रों और समुदाय की भूमिका मजबूत करना है।
4. भोजन में कौन-से प्रोटीन स्रोत शामिल करें?
दाल, चना, राजमा, सोयाबीन, पनीर, दूध, दही, अंडे, मछली और मेवे प्रोटीन के अच्छे स्रोत हो सकते हैं।
5. स्वस्थ जीवनशैली के लिए किन आदतों पर ध्यान दें?
संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, साफ-सफाई, सुरक्षित पानी और तंबाकू-शराब से दूरी पर ध्यान देना चाहिए।
निष्कर्ष
राष्ट्रीय पोषण माह 2026 का उद्देश्य पोषण को केवल सरकारी योजना न मानकर हर परिवार और समुदाय की साझा जिम्मेदारी बनाना है। “हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी” थीम के तहत आंगनवाड़ी केंद्रों को बच्चों, किशोरों, गर्भवती महिलाओं और परिवारों के पोषण तथा स्वास्थ्य से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। संतुलित आहार में पर्याप्त प्रोटीन, विविध खाद्य समूह और स्थानीय खाद्य पदार्थों को शामिल करना जरूरी है। इसके साथ नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और स्वच्छता भी स्वस्थ जीवनशैली के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
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