सामाजिक न्याय और अधिकारिता के क्षेत्र में बीते एक साल में रिकॉर्ड ₹11,810 करोड़ खर्च किए गए हैं। भारत सरकार का कहना है कि इस बड़े निवेश का मुख्य उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों को सशक्त बनाना, नशा मुक्ति अभियान को तेज करना और दिव्यांग, बुजुर्ग व वंचित समुदायों के लिए कल्याणकारी योजनाओं को मजबूत करना है। सरकार का मानना है कि सामाजिक सुरक्षा और पुनर्वास कार्यक्रमों में निवेश से दीर्घकाल में आर्थिक और सामाजिक स्थिरता बढ़ेगी।
खास तौर पर नशा मुक्ति अभियान, छात्रवृत्ति योजनाएं, कौशल विकास कार्यक्रम और पुनर्वास केंद्रों के विस्तार पर जोर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, इन योजनाओं का मकसद युवाओं को नशे से दूर रखना, शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ाना और सामाजिक असमानताओं को कम करना है। यह खर्च देशभर में जागरूकता अभियान और स्थानीय स्तर पर सेवाओं को मजबूत करने में भी लगाया गया है।
read also: CG में हाथी का कहर: किशोरी को कुचलकर उतारा मौत के घाट, गांव में दहशत का माहौल
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में सामाजिक न्याय पर बढ़ता खर्च लंबे समय में मानव संसाधन विकास और आर्थिक प्रगति को गति देगा। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में इन योजनाओं के प्रभाव को और व्यापक बनाया जाए ताकि समाज के सबसे कमजोर वर्गों तक लाभ पहुंच सके।


