धान खरीदी में कथित गड़बड़ी से जुड़े एक मामले में समिति प्रबंधक द्वारा अदालत में दी गई अजीबोगरीब दलील चर्चा का विषय बन गई है। प्रबंधक ने लगभग 23 लाख रुपये मूल्य के धान की कमी को लेकर सफाई देते हुए दावा किया कि गोदाम में रखा धान चूहों ने खा लिया था। मामले की सुनवाई के दौरान यह तर्क अदालत को संतोषजनक नहीं लगा और इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया गया।
मामला तब सामने आया जब संबंधित जांच में धान के स्टॉक में भारी कमी पाई गई। अधिकारियों ने कमी के लिए जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई शुरू की, जिसके खिलाफ समिति प्रबंधक ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान प्रबंधक ने धान की कमी के पीछे चूहों द्वारा नुकसान पहुंचाने का कारण बताया, लेकिन अदालत ने इस दलील को तथ्यात्मक और व्यावहारिक आधार पर कमजोर माना।
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हाई कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में धान की कमी को केवल चूहों द्वारा नुकसान पहुंचाने से नहीं जोड़ा जा सकता। अदालत ने प्रबंधक की याचिका खारिज करते हुए संबंधित कार्रवाई में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। कोर्ट के इस फैसले को सरकारी भंडारण और धान खरीदी व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


