राजस्थान पंचायत चुनाव का बड़ा ऐलान: 4 चरणों में होगा मतदान, गांवों में तेज होगी सियासी हलचल
जयपुर: राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में चुनावी गतिविधियां अब तेज होने वाली हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी है और इसके साथ ही चुनाव आचार संहिता लागू हो गई है। मतदान चार चरणों में कराया जाएगा।
इन चुनावों का महत्व केवल पंच और सरपंच चुनने तक सीमित नहीं है। ग्राम पंचायत से लेकर पंचायत समिति और जिला परिषद तक चुने जाने वाले प्रतिनिधि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय विकास, बुनियादी सुविधाओं और योजनाओं के क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए आने वाले हफ्तों में गांवों की स्थानीय राजनीति काफी सक्रिय रहने वाली है।
पहले समझिए किस चुनाव की तारीख कब है
राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव चार चरणों में होंगे। इनके लिए मतदान 23 अक्टूबर, 29 अक्टूबर, 4 नवंबर और 14 नवंबर 2026 को निर्धारित है। मतदान का समय सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक रहेगा।
वहीं ग्राम पंचायत स्तर पर पंच और सरपंच के चुनाव अलग चरणों में होंगे। इन पदों के लिए मतदान और सरपंच पद की मतगणना उसी दिन होगी। तारीखें 25 अक्टूबर, 31 अक्टूबर, 6 नवंबर और 16 नवंबर हैं।
| चुनाव | चरण 1 | चरण 2 | चरण 3 | चरण 4 |
|---|---|---|---|---|
| जिला परिषद/पंचायत समिति | 23 अक्टूबर | 29 अक्टूबर | 4 नवंबर | 14 नवंबर |
| पंच/सरपंच | 25 अक्टूबर | 31 अक्टूबर | 6 नवंबर | 16 नवंबर |
8 अक्टूबर से शुरू होगी नामांकन प्रक्रिया
चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया भी जल्द शुरू हो जाएगी। जिला परिषद सदस्य और पंचायती राज संस्थाओं के लिए नामांकन 8 अक्टूबर 2026 से शुरू होने की जानकारी दी गई है। पहले चरण के नामांकन की अंतिम तारीख 13 अक्टूबर रखी गई है, जबकि आगे के चरणों के लिए अलग-अलग अधिसूचनाएं जारी होंगी।
इसका मतलब है कि संभावित उम्मीदवारों के पास तैयारी के लिए बहुत लंबा समय नहीं है। स्थानीय स्तर पर टिकट, आरक्षण, वार्ड समीकरण और समर्थकों को जुटाने की गतिविधियां अब तेजी पकड़ेंगी।
14,403 ग्राम पंचायतों में भी चुनाव
पंचायती राज चुनाव का दायरा काफी बड़ा है। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार प्रदेश की 14,403 ग्राम पंचायतों में सरपंच और वार्ड पंचों का चुनाव कराया जाएगा। इसके अलावा 41 जिला परिषदों और 457 पंचायत समितियों से जुड़े प्रतिनिधियों का भी चुनाव होगा।
चुनाव के बाद जिला परिषदों में जिला प्रमुख और पंचायत समितियों में प्रधान चुने जाएंगे। इस तरह ग्राम पंचायत से लेकर जिला स्तर तक स्थानीय शासन की नई राजनीतिक संरचना सामने आएगी।
महिलाओं की भागीदारी रहेगी खास
पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण के कारण इन चुनावों में महिला प्रतिनिधित्व एक महत्वपूर्ण पहलू रहेगा। उपलब्ध चुनाव कार्यक्रम संबंधी रिपोर्टों के अनुसार करीब 7,200 महिला सरपंच और लगभग 65 हजार महिला वार्ड पंच चुने जाने की व्यवस्था है। जिला परिषद और पंचायत समिति स्तर पर भी आरक्षण के अनुसार महिला प्रतिनिधियों की बड़ी भागीदारी होगी।
इसका असर केवल चुनावी प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं रहता। ग्रामीण निकायों में महिलाओं की भागीदारी से पानी, स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और स्थानीय सुविधाओं जैसे मुद्दों को राजनीतिक विमर्श में अधिक जगह मिलने की संभावना रहती है। हालांकि वास्तविक प्रभाव चुने गए प्रतिनिधियों की भूमिका और स्थानीय प्रशासन के साथ उनके कामकाज पर निर्भर करेगा।
ईवीएम और बैलेट पेपर से होगा मतदान
जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव में ईवीएम का इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं पंच और सरपंच के चुनाव बैलेट पेपर के जरिए होंगे। सरपंच पद के लिए मतदान के बाद उसी दिन मतगणना की व्यवस्था है।
यह व्यवस्था मतदाताओं के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि अलग-अलग स्तर के पदों के लिए मतदान की प्रक्रिया एक जैसी नहीं होगी। उम्मीदवारों और मतदाताओं को अपने संबंधित चरण और मतदान केंद्र की जानकारी पहले से जांचना जरूरी रहेगा।
आचार संहिता के साथ प्रशासनिक गतिविधियों पर असर
चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। चुनाव अवधि में सरकारी तबादलों समेत कई प्रशासनिक फैसलों पर प्रतिबंध और आयोग के निर्देश लागू रहेंगे।
राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए इसका अर्थ यह है कि चुनाव प्रचार के दौरान सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर निर्वाचन आयोग के नियमों का पालन करना होगा। चुनावी गतिविधियों में प्रशासनिक मशीनरी की निष्पक्षता बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होगा।
सुरक्षा के लिए बड़ा इंतजाम
राज्य में बड़े पैमाने पर मतदान को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी चुनाव प्रबंधन का अहम हिस्सा होगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार चुनाव के दौरान करीब 2.72 लाख पुलिसकर्मियों की तैनाती प्रस्तावित है।
इतने बड़े क्षेत्र में शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण होगा। खासकर दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में मतदान केंद्रों तक पहुंच, कानून-व्यवस्था और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी पर विशेष ध्यान देना पड़ेगा।
ग्रामीण राजनीति में अब शुरू होगा असली मुकाबला
पंचायत चुनावों की खासियत यह है कि यहां चुनावी मुद्दे अक्सर स्थानीय जरूरतों से सीधे जुड़े होते हैं। सड़क, पेयजल, बिजली, सिंचाई, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, रोजगार और सरकारी योजनाओं का लाभ जैसे सवाल मतदाताओं के फैसले को प्रभावित कर सकते हैं।
राज्य स्तर की राजनीति का असर स्थानीय चुनावों में दिखाई दे सकता है, लेकिन ग्राम पंचायत स्तर पर उम्मीदवार की व्यक्तिगत पहुंच, स्थानीय सामाजिक समीकरण और गांव के मुद्दे भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए इन चुनावों के नतीजों को केवल बड़े राजनीतिक दलों के प्रदर्शन के चश्मे से देखना ग्रामीण राजनीति की पूरी तस्वीर नहीं देगा।



