Raipur News: दिवाली से पहले दुकानदारों पर टूटा बड़ा संकट, निगमकर्मी बनकर दुकानों में तोड़फोड़ का गंभीर आरोप
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में दीपावली से ठीक पहले तीन दुकानों में हुई कथित तोड़फोड़ ने व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। पंडरी मेन रोड पर रात के अंधेरे में कुछ लोगों द्वारा नगर निगम कर्मचारी बनकर दुकानों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। व्यापारियों का दावा है कि इस घटना में लाखों रुपये का सामान खराब हो गया और उनका कारोबार भी प्रभावित हुआ है। दूसरी ओर नगर निगम के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि विभाग की ओर से ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की गई।
यह मामला केवल दुकानों को हुए नुकसान तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में एक महत्वपूर्ण सवाल है—यदि किसी भवन को जर्जर घोषित किया गया है, तो क्या बिना स्पष्ट प्रक्रिया, तकनीकी जांच और प्रभावित दुकानदारों को जानकारी दिए इस तरह की तोड़फोड़ की जा सकती है?
पंडरी में रात की कार्रवाई से व्यापारियों को बड़ा नुकसान
घटना सोमवार रात करीब दो बजे शहीद हेमू कालाणी वार्ड के पंडरी मेन रोड की बताई जा रही है। दुकानदारों के मुताबिक, करीब पांच लोग मौके पर पहुंचे और खुद को नगर निगम से जुड़ा बताते हुए दुकानों की छत पर ड्रिलिंग और तोड़फोड़ शुरू कर दी।
व्यापारियों का आरोप है कि इस दौरान तीन दुकानों को नुकसान पहुंचा। उनका कहना है कि मौके पर मौजूद लोगों की गतिविधियां संदिग्ध लगीं, जिसके बाद उन्होंने दो लोगों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया।
दुकानदारों के अनुसार, इस घटना से करीब 5 से 7 लाख रुपये तक के सामान को नुकसान हुआ है। हालांकि वास्तविक नुकसान का आकलन जांच और दस्तावेजों के आधार पर होना बाकी है।
दीपावली के कारोबार पर पड़ा असर, मिठाई का स्टॉक खराब होने का दावा
इस घटना का सबसे बड़ा आर्थिक असर मिठाई कारोबार से जुड़े व्यापारियों पर पड़ने की बात कही जा रही है। बीकानेर स्वीट्स के संचालक विजय सिंह राजपुरोहित के मुताबिक, दीपावली के लिए दुकान में बड़ी मात्रा में सामान रखा गया था, जो कथित तोड़फोड़ के कारण खराब हो गया।
त्योहारी सीजन मिठाई और खाद्य कारोबारियों के लिए साल का महत्वपूर्ण समय होता है। दुकानदार पहले से कच्चा माल, तैयार उत्पाद, पैकेजिंग और कर्मचारियों पर खर्च करते हैं। ऐसे समय में दुकान को नुकसान पहुंचना केवल संपत्ति का नुकसान नहीं, बल्कि पूरे सीजन की कमाई और भविष्य के कारोबार पर असर डाल सकता है।
लोकनाथ पनीर डोसा के संचालक जमना प्रसाद गुप्ता ने भी दुकान में हुए नुकसान और कारोबार प्रभावित होने की बात कही है।
जर्जर भवन के नोटिस के बाद बढ़ा विवाद
मामले की पृष्ठभूमि में भवन की स्थिति को लेकर नगर निगम का एक नोटिस है। जानकारी के अनुसार, नगर निगम जोन-2 की ओर से 29 सितंबर को संबंधित भवन को जर्जर बताते हुए नोटिस जारी किया गया था।
दुकानदारों का कहना है कि वे भवन को जर्जर मानने के आधार पर सवाल उठा रहे थे। उन्होंने जोन-2 कार्यालय और निगम मुख्यालय में आवेदन देकर भवन की तकनीकी जांच कराने की मांग की थी।
व्यापारियों के मुताबिक, जांच पूरी होने और उनकी आपत्तियों पर सुनवाई होने से पहले ही रात में तोड़फोड़ कर दी गई। उनका यह भी कहना है कि वे किरायेदार के रूप में नियमित रूप से चेक और ऑनलाइन माध्यम से किराया देते रहे हैं तथा दुकान खाली करने को लेकर विवाद चल रहा था।
हालांकि भवन मालिक की भूमिका और कथित तोड़फोड़ में उसकी संलिप्तता को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
नगर निगम ने कार्रवाई से किया इनकार, पुराने नोटिस की जांच शुरू
मामले में नगर निगम का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। प्रभारी जोन-2 कमिश्नर पीडी धृतलहरे ने कहा है कि नगर निगम रात के समय इस तरह की कार्रवाई नहीं करता और विभाग के किसी कर्मचारी ने दुकानों में तोड़फोड़ नहीं की है।
उन्होंने बताया कि भवन को जर्जर घोषित करने के लिए नोटिस किस आधार पर जारी किया गया था, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। नोटिस पर पूर्व जोन कमिश्नर के हस्ताक्षर होने की बात भी सामने आई है। वर्तमान प्रभारी अधिकारी ने पुराने रिकॉर्ड और नोटिस जारी करने की प्रक्रिया की जांच कराने की बात कही है।
नगर निगम के इस इनकार के बाद मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू जुड़ गया है। अब यह पता लगाना जरूरी है कि रात में पहुंचे लोग कौन थे, क्या उनका किसी सरकारी विभाग से संबंध था और यदि नहीं, तो उन्होंने किस अधिकार के आधार पर दुकानों में तोड़फोड़ की?
दो लोगों को पुलिस के हवाले किया, अब जांच की जिम्मेदारी अहम
व्यापारियों ने मौके से दो लोगों को पकड़कर पुलिस के हवाले करने की बात कही है। घटना में एफआईआर दर्ज होने की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
ऐसे मामले में पुलिस के लिए केवल पकड़े गए लोगों से पूछताछ करना पर्याप्त नहीं होगा। घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, ड्रिलिंग और तोड़फोड़ में इस्तेमाल उपकरणों तथा संबंधित लोगों के बीच हुए संवाद की जांच जरूरी है।
इसके साथ ही नगर निगम के नोटिस, भवन की तकनीकी स्थिति और दुकानदारों द्वारा दिए गए आवेदनों का रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा होना चाहिए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि कार्रवाई किसी आधिकारिक आदेश के तहत हुई थी या निजी विवाद के चलते किसी ने सरकारी कार्रवाई का रूप देने की कोशिश की।
व्यापारियों के अधिकार और भवन सुरक्षा, दोनों की निष्पक्ष जांच जरूरी
किसी भवन को जर्जर घोषित करना केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं है। यदि भवन वास्तव में खतरनाक स्थिति में है, तो वहां काम करने वाले दुकानदारों, कर्मचारियों और आम नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। लेकिन इसके लिए तकनीकी आधार, स्पष्ट आदेश और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन भी उतना ही जरूरी है।
दूसरी तरफ, यदि किसी भवन को लेकर किरायेदार और मालिक के बीच विवाद है, तो उसका समाधान कानूनी तरीके से होना चाहिए। किसी भी पक्ष को अपनी मर्जी से दुकान या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का अधिकार नहीं है।
रायपुर के पंडरी का यह मामला अब तीन स्तरों पर जवाब मांग रहा है—भवन वास्तव में कितना सुरक्षित है, रात में तोड़फोड़ करने वाले लोग कौन थे और व्यापारियों के आर्थिक नुकसान की जिम्मेदारी किसकी बनती है?
दीपावली से पहले कारोबारियों को हुए नुकसान के दावे के बीच निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों की पहचान जरूरी है। जांच के नतीजे ही तय करेंगे कि इस घटना के पीछे प्रशासनिक कार्रवाई, निजी विवाद या किसी अन्य वजह की भूमिका थी।




