रायगढ़ में शर्मनाक अपराध! शादी का झांसा देकर नाबालिग को ले जाने का आरोप, ओडिशा से सुरक्षित बरामद
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में नाबालिग के लापता होने के मामले ने गंभीर रूप ले लिया, जब पुलिस जांच में उसे ओडिशा से बरामद किया गया। पुलिस के मुताबिक, 34 वर्षीय परमानंद कंवर पर 16 वर्षीय किशोरी को शादी का झांसा देकर अपने साथ ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म करने का आरोप है। आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
यह मामला केवल एक किशोरी के लापता होने और उसकी बरामदगी तक सीमित नहीं है। यह नाबालिगों की सुरक्षा, बहला-फुसलाकर ले जाने की घटनाओं और ऐसे मामलों में समय पर पुलिस कार्रवाई के महत्व को सामने लाता है।
रात में लापता हुई किशोरी, सुबह परिवार को नहीं मिली
मामला रायगढ़ जिले की रैरूमाखुर्द पुलिस चौकी क्षेत्र का है। पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, 25 सितंबर को किशोरी के पिता ने उसके लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
परिवार के सदस्य रात में खाना खाने के बाद अपने कमरों में सोने चले गए थे। 16 वर्षीय किशोरी भी अपने कमरे में सोई थी, लेकिन अगली सुबह वह वहां नहीं मिली। परिजनों ने आसपास तलाश की, मगर उसका कोई सुराग नहीं मिला।
इसके बाद पिता की शिकायत पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137(2) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। शुरुआती जांच का उद्देश्य किशोरी का पता लगाना और यह स्पष्ट करना था कि वह किन परिस्थितियों में घर से गई थी।
ओडिशा में मिला सुराग, पुलिस ने किशोरी को किया बरामद
जांच के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि किशोरी को ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले के हिमगीर थाना क्षेत्र के रेगारपानी, भोगराकछार निवासी परमानंद कंवर अपने साथ ले गया है।
सूचना के आधार पर पुलिस टीम ओडिशा पहुंची। आरोपी के घर से किशोरी को सुरक्षित बरामद कर लिया गया, हालांकि पुलिस के पहुंचने के समय आरोपी वहां मौजूद नहीं था।
किशोरी का बयान महिला पुलिस अधिकारी ने दर्ज किया। काउंसलिंग के बाद उसे उसके पिता के सुपुर्द कर दिया गया। पुलिस के अनुसार, किशोरी ने बयान में आरोप लगाया कि आरोपी शादी का झांसा देकर उसे बाइक से ओडिशा ले गया और वहां उसके साथ दुष्कर्म किया।
पीड़िता के बयान के आधार पर मामले में BNS की धारा 62(2)(ड) और पॉक्सो अधिनियम की धाराएं 4 और 6 जोड़ी गईं। इन धाराओं का संबंध यौन अपराधों और उनसे जुड़ी कानूनी कार्रवाई से है। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान साक्ष्यों के आधार पर होगी।
गांव की सड़क पर पकड़ा गया आरोपी
किशोरी की बरामदगी के बाद पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी रही। बाद में उसे उसके गांव की मुख्य सड़क पर पल्सर बाइक के साथ पकड़ लिया गया। पुलिस ने घटना में इस्तेमाल बाइक जब्त कर ली।
आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। मामले में अब आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
नाबालिगों से जुड़े मामलों में पॉक्सो कानून क्यों अहम है?
पॉक्सो अधिनियम बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देने के लिए बनाया गया है। कानून के तहत 18 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति को बच्चा माना जाता है। इसलिए किसी नाबालिग से जुड़े यौन अपराध के मामले में कथित सहमति या शादी का वादा अपने आप में कानूनी जिम्मेदारी से बचने का आधार नहीं बनता।
ऐसे मामलों में पीड़ित की उम्र, बयान, चिकित्सकीय और अन्य साक्ष्य तथा घटनाक्रम की परिस्थितियां जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं। कानून की प्रक्रिया का उद्देश्य न केवल आरोपी के खिलाफ आरोपों की जांच करना है, बल्कि बच्चे की सुरक्षा, गरिमा और निजता सुनिश्चित करना भी है।
यहां यह भी जरूरी है कि आरोपी के खिलाफ लगे आरोपों और न्यायालय में सिद्ध हुए अपराध के बीच अंतर रखा जाए। गिरफ्तारी और न्यायिक रिमांड अपने आप में दोषसिद्धि नहीं हैं।
परिवार और समाज के लिए क्या हैं इस घटना के सबक?
किशोरावस्था में भरोसे, भावनात्मक दबाव और रिश्तों से जुड़े फैसले संवेदनशील हो सकते हैं। हालांकि, ऐसी घटनाओं की जिम्मेदारी पीड़ित पर डालना गलत है। नाबालिगों की सुरक्षा के लिए परिवार, स्कूल और समुदाय को ऐसा वातावरण बनाने की जरूरत है, जहां बच्चे बिना डर अपनी परेशानी या किसी के दबाव के बारे में बता सकें।
ऐसे मामलों में कुछ कदम विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं:
- लापता होने पर तत्काल सूचना: नाबालिग के अचानक गायब होने पर पुलिस को तुरंत जानकारी देना जांच में मदद कर सकता है।
- बच्चे की निजता की रक्षा: पीड़ित की पहचान उजागर करने वाली तस्वीरें, नाम या अन्य विवरण सार्वजनिक नहीं किए जाने चाहिए।
- संवेदनशील पूछताछ और सहायता: प्रशिक्षित अधिकारियों की मदद, काउंसलिंग और परिवार का सहयोग पीड़ित की सुरक्षा तथा पुनर्वास के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- साक्ष्य आधारित जांच: डिजिटल जानकारी, गवाहों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच से मामले की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकती हैं।
अब आगे क्या होगा?
पुलिस की कार्रवाई के बाद मामले की अगली महत्वपूर्ण कड़ी साक्ष्यों की जांच और न्यायालय में कानूनी प्रक्रिया होगी। जांच में यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि पीड़िता का बयान और अन्य उपलब्ध सामग्री कानून के अनुरूप दर्ज तथा संरक्षित की जाए।
इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि नाबालिगों की सुरक्षा केवल पुलिस कार्रवाई पर निर्भर नहीं कर सकती। समय पर शिकायत, संवेदनशील व्यवहार और बच्चों के लिए सुरक्षित संवाद का माहौल भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
किशोरी की बरामदगी राहत की बात है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए आगे की जांच और पीड़िता की सुरक्षा तथा देखभाल पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। न्याय का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच के साथ पीड़ित को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना भी है।



