NIT Raipur: 1,364 विद्यार्थियों को मिली डिग्री, सात नए रिसर्च सेंटर से छत्तीसगढ़ ने लगाई तकनीक और नवाचार में बड़ी छलांग
किसी तकनीकी संस्थान की असली पहचान केवल उसकी डिग्रियों या प्लेसमेंट के आंकड़ों से नहीं बनती, बल्कि इस बात से तय होती है कि वहां से निकलने वाले विद्यार्थी देश और समाज की समस्याओं का समाधान खोजने में कितनी भूमिका निभाते हैं। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) रायपुर का 17वां दीक्षांत समारोह इसी दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा। एक ओर 1,364 विद्यार्थियों ने अपनी शैक्षणिक यात्रा का अहम पड़ाव पूरा किया, तो दूसरी ओर संस्थान में सात अत्याधुनिक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की शुरुआत ने अनुसंधान और तकनीकी विकास के नए अवसर खोले।
3 नवंबर 2026 को रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर मेधावी विद्यार्थियों को 51 पदकों से सम्मानित किया गया। बीटेक कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग की छात्रा आत्मिका गांगेली को ओवरऑल टॉपर का सम्मान मिला।
लेकिन इस आयोजन का व्यापक महत्व केवल उपाधियां बांटने तक सीमित नहीं है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अंतरिक्ष अनुसंधान, महत्वपूर्ण खनिज, एयरोस्पेस और जनजातीय स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में स्थापित किए गए नए केंद्र यह संकेत देते हैं कि तकनीकी शिक्षा को भविष्य की जरूरतों से जोड़ने की दिशा में संस्थान अपनी क्षमता बढ़ा रहा है।
सात सेंटर ऑफ एक्सीलेंस: शोध को प्रयोगशाला से समाज तक पहुंचाने की चुनौती
संस्थान में शुरू किए गए सात केंद्र अलग-अलग क्षेत्रों की उन चुनौतियों पर काम करने के लिए बनाए गए हैं, जिनका संबंध देश की तकनीकी क्षमता और आर्थिक जरूरतों से है। इनमें इंडिया एआई छत्तीसगढ़ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन क्रिटिकल मिनरल्स, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन कम्प्यूटेशनल मैकेनिक्स, सेंटर ऑफ स्पेस एंड इंटरप्लेनेटरी एक्सप्लोरेशन (COSINE), मैराल सेंटर फॉर इनोवेशन इन रूरल एंड ट्राइबल हेल्थ, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर एयरोस्पेस एंड ऑटोनॉमस टेक्नोलॉजीज तथा सेंटर फॉर नैनोसाइंस एंड सस्टेनेबल एनर्जी टेक्नोलॉजीज शामिल हैं।
इनकी उपयोगिता को समझने के लिए इनके कार्यक्षेत्र पर नजर डालना जरूरी है। उदाहरण के तौर पर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग कृषि, स्वास्थ्य, उद्योग और प्रशासनिक सेवाओं में नई संभावनाएं पैदा कर सकता है। महत्वपूर्ण खनिजों पर अनुसंधान भारत की आयात निर्भरता घटाने और इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा तथा आधुनिक विनिर्माण के लिए जरूरी संसाधनों की उपलब्धता मजबूत करने में मददगार हो सकता है।
इसी तरह अंतरिक्ष और एयरोस्पेस अनुसंधान में नई तकनीक विकसित करने की संभावनाएं हैं, जबकि ग्रामीण एवं जनजातीय स्वास्थ्य से जुड़ा केंद्र दूरस्थ क्षेत्रों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए तकनीकी समाधान तलाश सकता है। सतत ऊर्जा और नैनोसाइंस पर शोध भविष्य में ऊर्जा दक्षता तथा पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों के विकास में योगदान दे सकता है।
हालांकि, किसी केंद्र का उद्घाटन अपने आप में शोध की सफलता नहीं है। उसकी वास्तविक उपलब्धि इस बात से मापी जाएगी कि वहां कितने उपयोगी शोध पूरे होते हैं, तकनीक का व्यावहारिक इस्तेमाल कितना बढ़ता है और उद्योगों तथा आम लोगों को उसका कितना लाभ मिलता है।
1,364 डिग्रियां और 51 पदक: नई जिम्मेदारियों की शुरुआत
इस दीक्षांत समारोह में कुल 1,364 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 976 स्नातक, 283 स्नातकोत्तर और 105 पीएचडी विद्यार्थी शामिल रहे। उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए 25 स्वर्ण पदक, 25 रजत पदक और एक संस्थान स्वर्ण पदक दिया गया।
कंप्यूटर साइंस की छात्रा आत्मिका गांगेली का ओवरऑल टॉपर बनना विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का विषय है। लेकिन आज के रोजगार बाजार में केवल अच्छे अंक या डिग्री पर्याप्त नहीं हैं। तकनीकी क्षेत्र तेजी से बदल रहा है और कंपनियां ऐसे युवाओं की तलाश कर रही हैं, जिनके पास विषय की मजबूत समझ के साथ समस्या सुलझाने, टीम में काम करने और नई तकनीक सीखने की क्षमता भी हो।
दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने युवाओं से विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ऊर्जा, आपूर्ति श्रृंखला, स्वास्थ्य, रोजगार और कृषि जैसे क्षेत्रों में देश के सामने कई चुनौतियां हैं। युवाओं को इन चुनौतियों को नए समाधान विकसित करने के अवसर के रूप में देखना चाहिए।
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कौशल आधारित और व्यावहारिक शिक्षा के उद्देश्य का भी उल्लेख किया। तकनीकी शिक्षा की उपयोगिता तभी बढ़ेगी, जब कक्षा में सीखा गया ज्ञान वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान में इस्तेमाल हो सके।
प्लेसमेंट के आंकड़े क्या बताते हैं?
संस्थान की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 के बैच को कुल 821 प्लेसमेंट ऑफर मिले और सर्वोच्च वार्षिक पैकेज 60 लाख रुपये रहा। ये आंकड़े संस्थान की रोजगार संबंधी उपलब्धियों की तस्वीर पेश करते हैं, लेकिन किसी भी शैक्षणिक संस्थान के प्रदर्शन का मूल्यांकन केवल सबसे बड़े पैकेज से नहीं किया जाना चाहिए।
विद्यार्थियों के लिए यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि कितने छात्रों को नौकरी मिली, किन क्षेत्रों में अवसर उपलब्ध हुए, औसत वेतन कितना रहा और किन शाखाओं में रोजगार की स्थिति कैसी रही। प्लेसमेंट ऑफर और नियुक्त विद्यार्थियों की संख्या में अंतर भी हो सकता है, इसलिए विस्तृत प्लेसमेंट रिपोर्ट से ही पूरी स्थिति समझी जा सकती है।
संस्थान के निदेशक प्रो. एन. वी. रमण राव ने बताया कि संस्थान के 18 संकाय सदस्यों और चार विद्यार्थियों को स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय की विश्व के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में स्थान मिला है। संस्थान ने टाइम्स हायर एजुकेशन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 के 1201 से 1400 वाले समूह में भी जगह बनाई है। इसके अलावा संस्थान के इनक्यूबेशन केंद्र को भारत इनक्यूबेटर अवॉर्ड 2025 से सम्मानित किए जाने की जानकारी दी गई।
ये उपलब्धियां शोध, नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में संस्थान की गतिविधियों को दर्शाती हैं। आने वाले समय में इन प्रयासों को और मजबूत करने के लिए उद्योगों के साथ साझेदारी, पेटेंट, स्टार्टअप और शोध के व्यावसायिक उपयोग पर ध्यान देना होगा।
महत्वपूर्ण खनिज और ऊर्जा अनुसंधान में भारत के लिए अवसर
रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की जरूरत पर जोर दिया। वहीं, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी ने कोयले की मूल्य श्रृंखला को आधुनिक तकनीक से अधिक उपयोगी बनाने और कम उत्सर्जन वाली तकनीकों पर अनुसंधान की आवश्यकता बताई।
भारत के लिए महत्वपूर्ण खनिजों का विषय इसलिए भी अहम है, क्योंकि आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी, स्वच्छ ऊर्जा और कई उन्नत तकनीकों के निर्माण में इनकी भूमिका बढ़ रही है। ऐसे में घरेलू स्तर पर खोज, प्रसंस्करण और बेहतर उपयोग की तकनीक विकसित करना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है।
ऊर्जा के क्षेत्र में भी केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। संसाधनों का कुशल उपयोग, प्रदूषण कम करने वाली तकनीक और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर अनुसंधान भविष्य की जरूरत हैं। एनआईटी रायपुर जैसे संस्थान इन क्षेत्रों में वैज्ञानिक क्षमता विकसित करने में योगदान दे सकते हैं।
तकनीक के दौर में बुनियादी ज्ञान की अहमियत
समारोह की अध्यक्षता करते हुए बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष डॉ. सुरेश हावरे ने विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक के साथ मूलभूत वैज्ञानिक और तकनीकी सिद्धांतों की समझ मजबूत रखने की सलाह दी। यह बात आज के तकनीकी दौर में विशेष महत्व रखती है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन के कारण कई काम करने के तरीके बदल रहे हैं। लेकिन किसी तकनीक का प्रभावी उपयोग करने के लिए उसके पीछे के गणित, विज्ञान, इंजीनियरिंग और नैतिक पहलुओं को समझना जरूरी है। केवल किसी नए सॉफ्टवेयर या टूल का इस्तेमाल सीख लेना दीर्घकालिक विशेषज्ञता की गारंटी नहीं है।
युवाओं के सामने अब दोहरी जिम्मेदारी है—एक ओर लगातार बदलती तकनीक के साथ खुद को अपडेट रखना और दूसरी ओर अपने मूल विषय की समझ को गहरा करना। यही क्षमता उन्हें केवल नौकरी पाने वाला नहीं, बल्कि नए समाधान तैयार करने वाला पेशेवर बना सकती है।
छत्तीसगढ़ के लिए इस आयोजन का बड़ा अर्थ
एनआईटी रायपुर में सात नए शोध केंद्रों की शुरुआत छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा और तकनीकी अनुसंधान के लिए अवसर पैदा कर सकती है। यदि इन केंद्रों में स्थानीय उद्योगों, विश्वविद्यालयों, स्टार्टअप और सरकारी संस्थानों के साथ प्रभावी सहयोग विकसित होता है, तो राज्य के विद्यार्थियों को अपने ही क्षेत्र में उन्नत शोध और नवाचार का अवसर मिल सकता है।
ग्रामीण और जनजातीय स्वास्थ्य, महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा तथा अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे विषय छत्तीसगढ़ की भौगोलिक और आर्थिक परिस्थितियों से भी जुड़े हैं। इन क्षेत्रों में स्थानीय समस्याओं को ध्यान में रखकर शोध किया जाए, तो उसका लाभ राज्य के दूरस्थ इलाकों तक पहुंच सकता है।
अब संस्थान के सामने चुनौती है कि उद्घाटन के बाद इन केंद्रों को सक्रिय शोध, प्रशिक्षित मानव संसाधन, उद्योग सहयोग और उपयोगी तकनीकी परिणामों से जोड़ा जाए। विद्यार्थियों के लिए भी यह जरूरी होगा कि वे इन अवसरों का लाभ लेकर शोध, उद्यमिता और रोजगार के नए रास्ते तलाशें।
एनआईटी रायपुर का 17वां दीक्षांत समारोह एक ओर विद्यार्थियों की उपलब्धियों का उत्सव रहा, तो दूसरी ओर संस्थान के भविष्य की शोध दिशा का संकेत भी बना। आने वाले वर्षों में इन सात केंद्रों का वास्तविक योगदान ही बताएगा कि यह पहल छत्तीसगढ़ को तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में कितनी आगे ले जा पाती है।




