Online Radicalisation Case
नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर किसी संदिग्ध गतिविधि की शुरुआत किस तरह व्यापक नेटवर्क और आतंकी साजिश की जांच तक पहुंच सकती है, विजयवाड़ा का ऑनलाइन कट्टरपंथ मामला इसका एक उदाहरण बनकर सामने आया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने विजयवाड़ा की विशेष NIA अदालत में 9 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। एजेंसी का आरोप है कि प्रतिबंधित आतंकी संगठन ISIS से जुड़ी विचारधारा को ऑनलाइन माध्यमों से फैलाने और युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने की कोशिश की गई।
चार्जशीट में मोहम्मद रहमतुल्लाह शरीफ, मोहम्मद दानिश, मिर्जा सोहेल बेग, लकी अहमद, जीशान अब्दुल मजीद, मीर आसिफ अली, अब्दुल सलाम, शारुक खान और शेख फैज उर रहमान को आरोपी बनाया गया है। यह मामला RC-01/2026/NIA/VSKP के नाम से NIA के रिकॉर्ड में दर्ज है।
जांच की शुरुआत एक स्थानीय मामले से हुई थी
यह मामला शुरुआत में विजयवाड़ा-II टाउन पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ था। NIA के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, 22 मार्च 2026 को विजयवाड़ा पुलिस ने मोहम्मद रहमतुल्लाह शरीफ को पकड़ा था, जिसके बारे में एजेंसी के रिकॉर्ड में सोशल मीडिया के माध्यम से कट्टरपंथी बनाए जाने का उल्लेख है। बाद में मामला NIA के पास पहुंचा और जांच का दायरा विजयवाड़ा से बाहर कई राज्यों तक फैल गया।
जुलाई में NIA ने इस मामले में 9 राज्यों में 20 ठिकानों पर तलाशी ली थी। इन कार्रवाइयों में डिजिटल उपकरण जब्त किए गए, जिनकी फॉरेंसिक जांच को नेटवर्क की गतिविधियों और आपसी संपर्कों की कड़ियां जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण माना गया।
यही डिजिटल सुराग इस मामले की जांच का अहम हिस्सा हैं। पारंपरिक आतंकी नेटवर्क में जहां आमने-सामने मुलाकात और भौतिक संपर्क महत्वपूर्ण होते थे, वहीं ऑनलाइन नेटवर्क में सोशल मीडिया अकाउंट, चैट, डिजिटल डिवाइस और संपर्कों का पैटर्न जांचकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण सबूत बन सकते हैं।
Instagram और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर युवाओं को प्रभावित करने का आरोप
NIA के मुताबिक, आरोपियों ने Instagram सहित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल युवाओं को प्रभावित और कट्टरपंथी बनाने के लिए किया। एजेंसी का आरोप है कि ऑनलाइन संपर्क के जरिए युवाओं को हिंसक चरमपंथी गतिविधियों की ओर आकर्षित करने की कोशिश की गई।
यह पहलू इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ऑनलाइन कट्टरपंथ का असर किसी एक शहर या इलाके तक सीमित नहीं रहता। जुलाई की कार्रवाई के दौरान NIA ने आंध्र प्रदेश के अलावा तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, राजस्थान और दिल्ली में भी तलाशी ली थी।
जांच का यह विस्तार बताता है कि एजेंसी केवल व्यक्तिगत आरोपों की जांच नहीं कर रही थी, बल्कि आरोपित डिजिटल संपर्कों के जरिए बने व्यापक नेटवर्क को समझने की कोशिश कर रही थी।
‘खिलाफत’ स्थापित करने की साजिश का आरोप
NIA का आरोप है कि आरोपी भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से हिंसक जिहाद के जरिए भारत में खिलाफत स्थापित करने की साजिश से जुड़े थे।
एजेंसी के मुताबिक, युवाओं को प्रभावित करने के साथ-साथ उन्हें हिंसक गतिविधियों के लिए तैयार करने की कोशिश की गई। जांच में कथित तौर पर विस्फोटक तैयार करने और हथियार चलाने की ट्रेनिंग से संबंधित गतिविधियों की भी बात सामने आई है।
हालांकि इन आरोपों का अंतिम परीक्षण अदालत में होना बाकी है। चार्जशीट में लगाए गए आरोपों को दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता; अदालत में साक्ष्यों और बचाव पक्ष के तर्कों के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया होगी।
गुप्त बातचीत के लिए ऐप तैयार करने का आरोप
इस मामले का तकनीकी पहलू भी जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण है। NIA के अनुसार, आरोपियों ने आपस में संवाद को सुरक्षित और गुप्त रखने के उद्देश्य से एक सिक्योर कम्युनिकेशन एप्लिकेशन तैयार करने और उसका परीक्षण करने की कोशिश की।
साइबर सुरक्षा के नजरिए से यह पहलू अहम है। किसी आतंकी नेटवर्क के लिए सुरक्षित संचार व्यवस्था तैयार करना केवल मैसेज भेजने का मामला नहीं होता; इससे जांच एजेंसियों के लिए नेटवर्क के सदस्यों, उनके संपर्क और गतिविधियों की पहचान मुश्किल बनाने की कोशिश हो सकती है।
इसीलिए ऐसे मामलों में जब्त मोबाइल फोन, कंप्यूटर, स्टोरेज डिवाइस और ऑनलाइन अकाउंट की फॉरेंसिक जांच अहम हो जाती है।
11 आरोपी और एक नाबालिग पहले ही गिरफ्तार
NIA से जुड़ी रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में अब तक 11 आरोपियों और कानून से संघर्षरत एक नाबालिग को गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि वर्तमान चार्जशीट में नौ लोगों को आरोपी बनाया गया है। इसका अर्थ है कि जांच अभी समाप्त नहीं हुई है और अन्य संदिग्धों की भूमिका को लेकर भी पड़ताल जारी है।
जुलाई की राष्ट्रव्यापी तलाशी के दौरान भी NIA ने कहा था कि डिजिटल उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए जब्त किया गया है और उनसे आगे की जानकारी मिलने की उम्मीद है।
इससे संकेत मिलता है कि चार्जशीट दाखिल होने के बावजूद इस मामले में जांच का अगला चरण डिजिटल साक्ष्यों और अन्य संदिग्ध संपर्कों पर केंद्रित रह सकता है।
किन कानूनों के तहत कार्रवाई हुई?
चार्जशीट में आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। शुरुआती मामले में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66F सहित कई प्रावधान भी लगाए गए थे।
NIA के अनुसार, जांच में आरोपित गतिविधियों के अलग-अलग पहलुओं को देखते हुए आतंकवाद, आतंकी संगठन से जुड़ाव, साजिश और ऑनलाइन गतिविधियों से संबंधित कानूनी प्रावधानों का इस्तेमाल किया गया है।
इस मामले का बड़ा पहलू क्या है?
विजयवाड़ा मामले की सबसे महत्वपूर्ण बात केवल नौ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट नहीं है। इसका बड़ा पहलू ऑनलाइन कट्टरपंथ और डिजिटल नेटवर्क की जांच है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की वैश्विक पहुंच ने विचारों और संदेशों को बेहद तेजी से फैलाना संभव बनाया है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती यह है कि किसी सामान्य ऑनलाइन बातचीत और संगठित कट्टरपंथी नेटवर्क के बीच अंतर डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर स्थापित किया जाए।
इसी कारण आने वाले समय में ऐसे मामलों में डिजिटल फॉरेंसिक, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग, संदिग्ध ऑनलाइन संपर्कों की तकनीकी जांच और अंतरराष्ट्रीय डिजिटल कनेक्शन जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बने रह सकते हैं।
विजयवाड़ा केस में NIA की कार्रवाई यह भी दिखाती है कि स्थानीय स्तर पर शुरू हुई जांच डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर कई राज्यों तक फैले नेटवर्क की जांच में बदल सकती है। जुलाई में 20 स्थानों पर हुई तलाशी और अब नौ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट इस जांच की अगली महत्वपूर्ण कड़ी है।



