डूसू चुनाव में ABVP की जीत पर नितिन नबीन ने दी बधाई, कहा- युवाओं के भरोसे को दर्शाता है परिणाम
नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव 2026 के नतीजों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने केंद्रीय पैनल की चार में से तीन सीटों पर जीत दर्ज की। ABVP के यश डबास ने अध्यक्ष, रिया छाबड़ी ने सचिव और लक्ष्य राज सिंह ने संयुक्त सचिव पद पर जीत हासिल की। उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन विजयी रहे।
नतीजे सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने ABVP को बधाई दी। सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने इस परिणाम को युवाओं के सकारात्मक और रचनात्मक छात्र राजनीति में भरोसे से जोड़ते हुए कहा कि यह ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना और ‘विकसित भारत’ के विजन में योगदान देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने विजयी उम्मीदवारों के साथ चुनाव में काम करने वाले सभी लोगों को भी शुभकामनाएं दीं।
DUSU चुनाव में क्या रहा परिणाम
इस बार अध्यक्ष पद पर ABVP के यश डबास को 24,576 वोट मिले, जबकि NSUI के विजय शंकर मीणा को 22,523 वोट प्राप्त हुए। इस तरह अध्यक्ष पद पर जीत का अंतर 2,053 वोट रहा। उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय दीपांशु शौकीन ने जीत दर्ज की।
परिणामों का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि चार केंद्रीय पदों में से एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गई। इससे यह संकेत मिलता है कि DUSU चुनाव में छात्र संगठनों के साथ-साथ व्यक्तिगत उम्मीदवार और स्थानीय छात्र मुद्दे भी चुनावी मुकाबले को प्रभावित कर सकते हैं। यह केवल चुनावी आंकड़ा है; इसके आधार पर छात्रों की व्यापक राजनीतिक प्राथमिकताओं के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
छात्र राजनीति में मुद्दों की भूमिका अहम
2026 के DUSU चुनाव से पहले छात्र आवास और सुरक्षित रहने की व्यवस्था प्रमुख मुद्दों में शामिल रही। सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद छात्र आवास, हॉस्टल की उपलब्धता और निजी PG व्यवस्था को लेकर बहस तेज हुई थी। विभिन्न छात्र संगठनों ने अपने-अपने अभियानों में इन मुद्दों को जगह दी।
ऐसे में नई DUSU टीम के सामने चुनावी जीत के बाद सबसे बड़ी चुनौती घोषणाओं को छात्र हित से जुड़े ठोस काम में बदलने की होगी। हॉस्टल, छात्र आवास, सुरक्षा और विश्वविद्यालय स्तर की सुविधाओं जैसे मुद्दे आने वाले कार्यकाल में छात्रसंघ की प्राथमिकताओं को प्रभावित कर सकते हैं।
नितिन नबीन के बयान का राजनीतिक संदर्भ

नितिन नबीन ने ABVP की जीत को ‘राष्ट्र प्रथम’ और ‘विकसित भारत’ की सोच से जोड़कर देखा है। यह उनकी राजनीतिक प्रतिक्रिया है। दूसरी ओर, चुनाव का वास्तविक महत्व इस बात से भी तय होगा कि निर्वाचित छात्र प्रतिनिधि विश्वविद्यालय में छात्रों से जुड़े रोजमर्रा के मुद्दों पर किस तरह काम करते हैं।
DUSU देश के सबसे चर्चित छात्रसंघ चुनावों में से एक है और लंबे समय से छात्र राजनीति तथा व्यापक राजनीतिक गतिविधियों के बीच संबंध का महत्वपूर्ण उदाहरण रहा है। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ का इतिहास भी बताता है कि यहां की छात्र राजनीति समय के साथ राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श से जुड़ती रही है।
अब नई टीम के सामने चुनावी अभियान से आगे बढ़कर छात्रों के बीच किए गए वादों पर काम करने की जिम्मेदारी होगी। आने वाले महीनों डूसू चुनाव में ABVP की जीत पर नितिन नबीन ने दी बधाई, कहा- युवाओं के भरोसे को दर्शाता है परिणाम
नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव 2026 के नतीजों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने केंद्रीय पैनल की चार में से तीन सीटों पर जीत दर्ज की। ABVP के यश डबास ने अध्यक्ष, रिया छाबड़ी ने सचिव और लक्ष्य राज सिंह ने संयुक्त सचिव पद पर जीत हासिल की। उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन विजयी रहे।
नतीजे सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने ABVP को बधाई दी। सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने इस परिणाम को युवाओं के सकारात्मक और रचनात्मक छात्र राजनीति में भरोसे से जोड़ते हुए कहा कि यह ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना और ‘विकसित भारत’ के विजन में योगदान देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने विजयी उम्मीदवारों के साथ चुनाव में काम करने वाले सभी लोगों को भी शुभकामनाएं दीं।
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DUSU चुनाव में क्या रहा परिणाम
इस बार अध्यक्ष पद पर ABVP के यश डबास को 24,576 वोट मिले, जबकि NSUI के विजय शंकर मीणा को 22,523 वोट प्राप्त हुए। इस तरह अध्यक्ष पद पर जीत का अंतर 2,053 वोट रहा। उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय दीपांशु शौकीन ने जीत दर्ज की।
परिणामों का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि चार केंद्रीय पदों में से एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गई। इससे यह संकेत मिलता है कि DUSU चुनाव में छात्र संगठनों के साथ-साथ व्यक्तिगत उम्मीदवार और स्थानीय छात्र मुद्दे भी चुनावी मुकाबले को प्रभावित कर सकते हैं। यह केवल चुनावी आंकड़ा है; इसके आधार पर छात्रों की व्यापक राजनीतिक प्राथमिकताओं के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
छात्र राजनीति में मुद्दों की भूमिका अहम
2026 के DUSU चुनाव से पहले छात्र आवास और सुरक्षित रहने की व्यवस्था प्रमुख मुद्दों में शामिल रही। सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद छात्र आवास, हॉस्टल की उपलब्धता और निजी PG व्यवस्था को लेकर बहस तेज हुई थी। विभिन्न छात्र संगठनों ने अपने-अपने अभियानों में इन मुद्दों को जगह दी।
ऐसे में नई DUSU टीम के सामने चुनावी जीत के बाद सबसे बड़ी चुनौती घोषणाओं को छात्र हित से जुड़े ठोस काम में बदलने की होगी। हॉस्टल, छात्र आवास, सुरक्षा और विश्वविद्यालय स्तर की सुविधाओं जैसे मुद्दे आने वाले कार्यकाल में छात्रसंघ की प्राथमिकताओं को प्रभावित कर सकते हैं।
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नितिन नबीन के बयान का राजनीतिक संदर्भ
नितिन नबीन ने ABVP की जीत को ‘राष्ट्र प्रथम’ और ‘विकसित भारत’ की सोच से जोड़कर देखा है। यह उनकी राजनीतिक प्रतिक्रिया है। दूसरी ओर, चुनाव का वास्तविक महत्व इस बात से भी तय होगा कि निर्वाचित छात्र प्रतिनिधि विश्वविद्यालय में छात्रों से जुड़े रोजमर्रा के मुद्दों पर किस तरह काम करते हैं।
DUSU देश के सबसे चर्चित छात्रसंघ चुनावों में से एक है और लंबे समय से छात्र राजनीति तथा व्यापक राजनीतिक गतिविधियों के बीच संबंध का महत्वपूर्ण उदाहरण रहा है। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ का इतिहास भी बताता है कि यहां की छात्र राजनीति समय के साथ राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श से जुड़ती रही है।



