NCDC Meeting: छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए बड़ी उम्मीद, सहकारी संस्थाओं को मजबूत बनाने पर जोर
रायपुर,
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में किसानों की स्थिति केवल फसल उत्पादन से तय नहीं होती, बल्कि इस बात से भी तय होती है कि उन्हें अपनी उपज के लिए बाजार, उचित मूल्य, भंडारण और वित्तीय सुविधाएं कितनी आसानी से मिलती हैं। सहकारी संस्थाएं इन जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। इसी संदर्भ में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम की 93वीं महापरिषद बैठक में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व चर्चा का विषय बना है।
नई दिल्ली में आयोजित इस बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) के अध्यक्ष शशिकांत द्विवेदी ने राज्य की ओर से भाग लिया। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने की। इसमें सहकारी क्षेत्र की वित्तीय और संस्थागत क्षमता बढ़ाने तथा सहकारिता आधारित विकास को आगे ले जाने पर विचार-विमर्श हुआ।
सहकारिता से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल सकती है मजबूती
छत्तीसगढ़ जैसे कृषि प्रधान राज्य में सहकारी संस्थाओं का महत्व काफी व्यापक है। किसानों को कृषि उपज के विपणन, खाद-बीज की उपलब्धता, वित्तीय सहायता और सामूहिक संसाधनों के उपयोग में सहकारी व्यवस्था मदद पहुंचा सकती है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह व्यवस्था विशेष रूप से उपयोगी हो सकती है, क्योंकि अकेले बाजार तक पहुंच बनाना और बड़े निवेश की व्यवस्था करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहता है।
राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम की भूमिका ऐसी ही संस्थाओं को वित्तीय और विकास संबंधी सहायता उपलब्ध कराने से जुड़ी है। इसका उद्देश्य सहकारी संगठनों की क्षमता बढ़ाना और उन्हें आर्थिक गतिविधियों में अधिक सक्षम बनाना है।
NCDC की भूमिका और भविष्य की दिशा
राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम की स्थापना वर्ष 1963 में हुई थी। मार्कफेड अध्यक्ष शशिकांत द्विवेदी ने बैठक में कहा कि पिछले पांच वर्षों में निगम ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। उन्होंने सहकारिता क्षेत्र में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए छत्तीसगढ़ में किसानों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सहकारी समितियों को मजबूत करने की राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को भी सामने रखा।
हालांकि, सहकारी क्षेत्र की वास्तविक प्रगति का आकलन केवल संस्थागत बैठकों या योजनाओं की घोषणाओं से नहीं होगा। इसका असर तब दिखाई देगा, जब समितियों को समय पर वित्तीय सहायता मिले, उनके कामकाज में पारदर्शिता बढ़े और किसानों को उनकी सेवाओं का सीधा लाभ पहुंचे।
छत्तीसगढ़ के लिए किन क्षेत्रों में बन सकते हैं अवसर?
राज्य में सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने के लिए कृषि उपज के भंडारण, प्रसंस्करण, विपणन और मूल्य संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है। यदि स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण सुविधाएं विकसित होती हैं, तो किसानों को केवल कच्ची उपज बेचने पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और छोटे उद्यमों के अवसर भी बढ़ सकते हैं।
इसके साथ ही सहकारी समितियों के डिजिटल रिकॉर्ड, नियमित ऑडिट, पेशेवर प्रबंधन और जवाबदेही को मजबूत करना जरूरी है। वित्तीय सहायता तभी प्रभावी साबित होगी, जब उसका उपयोग स्पष्ट योजना और निगरानी के साथ हो।
बैठक से आगे अब जमीन पर परिणाम की अपेक्षा
93वीं बैठक में छत्तीसगढ़ की भागीदारी राज्य के सहकारी क्षेत्र की प्राथमिकताओं को राष्ट्रीय स्तर पर रखने का अवसर है। लेकिन किसानों के लिए इसका महत्व आने वाले समय में लिए जाने वाले फैसलों और उनके क्रियान्वयन से तय होगा।
यदि सहकारी संस्थाओं को पर्याप्त संसाधन, बेहतर प्रबंधन और बाजार से मजबूत जुड़ाव मिलता है, तो वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकती हैं। छत्तीसगढ़ के लिए चुनौती यही है कि सहकारिता को केवल संस्थागत ढांचे तक सीमित न रखकर किसानों की आय, स्थानीय रोजगार और ग्रामीण विकास से सीधे जोड़ा जाए।




