सुबह ओम का जाप: तनाव से नींद तक मिल सकते हैं ये बड़े फायदे, जानिए विज्ञान क्या कहता है
सुबह की शुरुआत अगर कुछ मिनट शांत बैठकर सांस और आवाज पर ध्यान केंद्रित करने से हो, तो दिन का मानसिक माहौल बदल सकता है। भारतीय परंपरा में ‘ॐ’ का उच्चारण लंबे समय से ध्यान और साधना का हिस्सा रहा है। अब आधुनिक शोध भी यह समझने की कोशिश कर रहा है कि इस तरह की ध्वनि-आधारित ध्यान प्रक्रिया शरीर और मस्तिष्क पर किस तरह असर डाल सकती है।
हालांकि इसे किसी बीमारी का “चमत्कारी इलाज” मानना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा, लेकिन उपलब्ध अध्ययनों में ओम-चैंटिंग और संबंधित ध्यान तकनीकों से तनाव, चिंता, नींद की गुणवत्ता और ऑटोनोमिक नर्वस सिस्टम से जुड़े कुछ संकेतकों में सुधार देखा गया है।
सिर्फ आवाज नहीं, सांस और ध्यान का भी असर
ओम का जाप करते समय व्यक्ति सामान्यतः गहरी सांस लेता है और उसे नियंत्रित तरीके से बाहर छोड़ते हुए ध्वनि का उच्चारण करता है। इस प्रक्रिया में तीन चीजें एक साथ काम करती हैं—धीमी सांस, लगातार ध्वनि और ध्यान का एक बिंदु पर टिकना।
यही वजह है कि इसके प्रभाव को केवल ‘ओम’ की आवाज से जोड़ना पूरी तस्वीर नहीं है। ध्यान और धीमी श्वास से जुड़ी प्रक्रियाएं शरीर के तनाव-प्रतिक्रिया तंत्र को शांत करने में मदद कर सकती हैं।
2025 में प्रकाशित एक नैरेटिव रिव्यू ने ओम-चैंटिंग पर उपलब्ध शोधों की समीक्षा करते हुए तनाव, ब्लड प्रेशर, विश्राम और ऑटोनोमिक गतिविधि सहित कई संभावित प्रभावों की ओर संकेत किया, हालांकि शोधकर्ताओं ने आगे बड़े और बेहतर नियंत्रित अध्ययनों की जरूरत भी बताई है।
तनाव और बेचैनी में क्यों मिल सकती है राहत?
आज लगातार नोटिफिकेशन, काम का दबाव और नींद की अनियमितता दिमाग को लंबे समय तक ‘अलर्ट मोड’ में रख सकती है। ऐसे में कुछ मिनट शांत बैठकर एक ही ध्वनि पर ध्यान लगाना विचारों की गति को धीमा करने में मदद कर सकता है।
एक अध्ययन में 12 मिनट की समूह-चैंटिंग के बाद प्रतिभागियों में कोर्टिसोल और स्वयं बताई गई चिंता में कमी देखी गई। हालांकि यह अध्ययन सामान्य ‘चैंटिंग’ पर था, इसलिए इसके परिणामों को हर व्यक्ति और हर स्थिति पर सीधे लागू करना उचित नहीं है।
ओम पर किए गए एक छोटे fMRI अध्ययन में भी चैंटिंग के दौरान मस्तिष्क के कुछ लिम्बिक क्षेत्रों की गतिविधि में कमी देखी गई। यह क्षेत्र भावनात्मक प्रतिक्रिया और तनाव से संबंधित प्रक्रियाओं में भूमिका निभाते हैं। लेकिन अध्ययन में केवल 12 स्वस्थ प्रतिभागी थे, इसलिए इसे अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।
दिल और नर्वस सिस्टम पर क्या असर पड़ सकता है?
ओम का उच्चारण लंबे समय तक करने के दौरान सांस की गति धीमी हो सकती है। इससे शरीर के ऑटोनोमिक नर्वस सिस्टम पर प्रभाव पड़ने की संभावना पर वैज्ञानिकों ने अध्ययन किया है।
एक छोटे अध्ययन में ओम चैंटिंग के बाद हार्ट रेट वैरिएबिलिटी यानी HRV से जुड़े बदलाव देखे गए। HRV शरीर के ऑटोनोमिक नियंत्रण को समझने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक संकेतक है।
यहां सावधानी जरूरी है: इसका अर्थ यह नहीं है कि ओम का जाप अकेले हृदय रोग या हाई ब्लड प्रेशर को ठीक कर देता है।
एक अलग randomized controlled trial में हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों पर ओम चैंटिंग और योग निद्रा के संयोजन का अध्ययन किया गया। दो महीने के अभ्यास के बाद तनाव, चिंता, नींद और कुछ ऑटोनोमिक मापदंडों में सुधार देखा गया।
इसलिए इसे बेहतर तरीके से पूरक अभ्यास के रूप में समझना चाहिए, न कि डॉक्टर की सलाह या निर्धारित दवाओं के विकल्प के रूप में।
नींद की गुणवत्ता में भी हो सकता है फायदा
रात की खराब नींद का संबंध अक्सर तनाव और लगातार चलने वाले विचारों से होता है। ध्यान आधारित अभ्यास सोने से पहले मानसिक उत्तेजना कम करने में मदद कर सकते हैं।
ओम चैंटिंग और योग निद्रा के संयुक्त अध्ययन में प्रतिभागियों की नींद की गुणवत्ता में सुधार दर्ज किया गया था। हालांकि यहां भी यह याद रखना जरूरी है कि अध्ययन में केवल ओम का अलग से प्रभाव नहीं, बल्कि दोनों तकनीकों का संयुक्त प्रभाव देखा गया था।
इसलिए अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय से अनिद्रा है, तो केवल जाप शुरू करने के बजाय उसके कारण—जैसे तनाव, दवाएं, स्लीप एपनिया या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं—की चिकित्सकीय जांच भी जरूरी हो सकती है।
एकाग्रता के बारे में क्या कहता है शोध?
ध्यान का मूल उद्देश्य ही मन को किसी एक वस्तु, सांस, मंत्र या ध्वनि पर टिकाना है। नियमित अभ्यास से व्यक्ति को अपने ध्यान को भटकने से वापस लाने की आदत विकसित हो सकती है।
ओम-चैंटिंग पर उपलब्ध शोध में मस्तिष्क की गतिविधि और भावनात्मक प्रसंस्करण से जुड़े बदलावों के संकेत मिले हैं। लेकिन यह कहना कि इससे हर व्यक्ति की स्मरण शक्ति या बुद्धि में निश्चित रूप से ‘जबरदस्त’ बढ़ोतरी होगी, उपलब्ध प्रमाणों से अधिक बड़ा दावा होगा।
सुबह कितनी देर करना उचित है?
इसके लिए कोई सार्वभौमिक ‘10 मिनट’ का वैज्ञानिक नियम नहीं है। शुरुआत में 5–10 मिनट शांत वातावरण में अभ्यास करना पर्याप्त हो सकता है। सहज लगने पर अवधि धीरे-धीरे बढ़ाई जा सकती है।
एक सरल तरीका यह हो सकता है:
- आरामदायक स्थिति में बैठें।
- रीढ़ को सहज रूप से सीधा रखें।
- सामान्य से थोड़ी धीमी और गहरी सांस लें।
- सांस छोड़ते हुए आराम से ‘ॐ’ का उच्चारण करें।
- आवाज की कंपन और सांस पर ध्यान रखें।
- कुछ मिनट बाद सामान्य सांस लेते हुए शांत बैठें।
बहुत तेज आवाज में या सांस को जबरदस्ती रोककर अभ्यास करने की जरूरत नहीं है।
सबसे जरूरी बात: इसे इलाज न समझें
ओम का जाप मानसिक शांति और रिलैक्सेशन की एक सरल तकनीक हो सकता है। उपलब्ध शोध इसके संभावित लाभों की ओर संकेत करता है, लेकिन अभी बड़े, लंबे समय तक चलने वाले और बेहतर नियंत्रित अध्ययनों की जरूरत है। 2025 की समीक्षा ने भी आगे अधिक मजबूत क्लिनिकल रिसर्च की आवश्यकता बताई है।
अगर किसी व्यक्ति को हाई ब्लड प्रेशर, गंभीर चिंता, अवसाद, अनिद्रा या हृदय संबंधी बीमारी है, तो जाप को उपचार का विकल्प बनाना उचित नहीं है। डॉक्टर द्वारा दी गई दवा या उपचार को बिना सलाह बंद नहीं करना चाहिए।
निष्कर्ष
सुबह का ओम जाप किसी जादुई उपाय की तरह नहीं, बल्कि ध्वनि, नियंत्रित श्वास और ध्यान का संयोजन समझना ज्यादा वैज्ञानिक दृष्टिकोण है। नियमित अभ्यास कुछ लोगों में तनाव कम करने, मानसिक विश्राम बढ़ाने और नींद की गुणवत्ता सुधारने में मदद कर सकता है।



