Kawardha Cyber Fraud: LIC पॉलिसी के नाम पर 69 लाख की सनसनीखेज ठगी, RBI अधिकारी बनकर बिछाया जाल; दिल्ली से आरोपी गिरफ्तार
कवर्धा: बीमा पॉलिसी में निवेश करने वाले लोगों को निशाना बनाकर साइबर ठग अब सरकारी संस्थाओं और वित्तीय नियामकों की पहचान का इस्तेमाल कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में ऐसा ही एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां बंद पड़ी LIC पॉलिसी की रकम वापस दिलाने का भरोसा देकर एक व्यक्ति से 69 लाख रुपये से अधिक की ठगी कर ली गई। आरोपियों ने खुद को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग का अधिकारी बताकर पीड़ित का विश्वास जीता। मामले की जांच करते हुए कबीरधाम साइबर पुलिस ने दिल्ली से एक आरोपी मोहम्मद जैद खान को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के मुताबिक, इस धोखाधड़ी में कुल 69,37,518 रुपये की रकम शामिल है। मामले में एक अन्य आरोपी की तलाश जारी है। यह घटना बताती है कि साइबर अपराधी अब केवल फर्जी लिंक या ओटीपी के जरिए ही नहीं, बल्कि कानूनी और वित्तीय प्रक्रियाओं का डर दिखाकर भी लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं।
बंद बीमा पॉलिसी को बनाया ठगी का हथियार
इस मामले में आरोपियों ने पीड़ित की बंद पड़ी बीमा पॉलिसी को ठगी का आधार बनाया। उन्होंने संपर्क कर दावा किया कि पॉलिसी की पुरानी रकम वापस दिलाई जा सकती है। इसके लिए कथित तौर पर अलग-अलग औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।
शुरुआत में पॉलिसी रिकवरी का भरोसा दिया गया, लेकिन बाद में NOC, बैंक संबंधी प्रक्रिया और न्यायालयीन औपचारिकताओं के नाम पर पैसे मांगे जाने लगे।
ऐसे मामलों में ठग एक बार में बड़ी रकम मांगने के बजाय छोटी-बड़ी किस्तों में भुगतान करवाते हैं। इससे पीड़ित को लगता है कि उसकी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। धीरे-धीरे जमा कराई गई रकम लाखों रुपये तक पहुंच जाती है।
RBI और उपभोक्ता आयोग के नाम का इस्तेमाल
इस ठगी में सबसे गंभीर पहलू सरकारी और वित्तीय संस्थाओं की पहचान का कथित दुरुपयोग है। RBI और राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग जैसे नामों का इस्तेमाल करके आरोपियों ने अपनी बात को विश्वसनीय बनाने की कोशिश की।
आम नागरिकों के लिए यह समझना जरूरी है कि किसी संस्था का नाम लेकर फोन करने वाला व्यक्ति उसका अधिकृत अधिकारी नहीं हो जाता। विशेष रूप से यदि कोई व्यक्ति पॉलिसी का पैसा वापस दिलाने के बदले पहले शुल्क, NOC फीस या कानूनी प्रक्रिया के नाम पर निजी बैंक खाते में रकम जमा करने को कहता है, तो सतर्क हो जाना चाहिए।
बीमा पॉलिसी से संबंधित भुगतान और शिकायत की प्रक्रिया की पुष्टि हमेशा संबंधित बीमा कंपनी के आधिकारिक माध्यम से करनी चाहिए।
बैंक ट्रांजेक्शन और तकनीकी जांच से दिल्ली तक पहुंची पुलिस
पीड़ित की शिकायत मिलने के बाद कबीरधाम साइबर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने संदिग्ध बैंक खातों में हुए लेन-देन और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया। इसी जांच के दौरान दिल्ली निवासी मोहम्मद जैद खान का नाम सामने आया।
इसके बाद पुलिस की विशेष टीम दिल्ली-एनसीआर पहुंची। पांच दिनों तक तलाश और पतासाजी करने के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह एक लाइफ इंश्योरेंस कंपनी में काम करता था और एक अन्य सहयोगी के साथ मिलकर बंद बीमा पॉलिसियों की रकम वापस दिलाने का झांसा देता था। ठगी के लिए कथित तौर पर फर्जी बैंक खातों और मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किया जाता था।
फिलहाल दूसरे आरोपी की तलाश की जा रही है। पुलिस ठगी की रकम के लेन-देन और इसमें इस्तेमाल किए गए अन्य माध्यमों की भी जांच कर रही है।
बीमा पॉलिसी धारकों के लिए क्यों गंभीर है यह मामला?
इस घटना का महत्व केवल 69 लाख रुपये की ठगी तक सीमित नहीं है। बड़ी संख्या में लोग वर्षों तक बीमा पॉलिसियों में पैसा जमा करते हैं। कई बार पॉलिसी बंद होने, प्रीमियम नहीं भर पाने या मैच्योरिटी संबंधी जानकारी के अभाव में उन्हें अपनी रकम वापस पाने की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होती।
साइबर अपराधी इसी जानकारी की कमी का फायदा उठाते हैं। वे खुद को अधिकारी बताकर कानूनी शब्दों का इस्तेमाल करते हैं और लोगों को यह विश्वास दिलाते हैं कि भुगतान किए बिना उनकी रकम वापस नहीं मिलेगी।
ऐसे मामलों में सबसे बड़ा खतरा यह है कि पीड़ित अपनी जमा पूंजी वापस पाने की उम्मीद में उल्टा अपनी बची हुई रकम भी गंवा सकता है।
LIC पॉलिसी के नाम पर ठगी से बचने के लिए अपनाएं ये सावधानियां
- बंद पड़ी पॉलिसी की रकम वापस पाने के लिए किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर पैसे जमा न करें।
- RBI या किसी सरकारी आयोग का अधिकारी बताने वाले व्यक्ति की पहचान स्वतंत्र रूप से सत्यापित करें।
- NOC, टैक्स, कानूनी फीस या पॉलिसी रिकवरी के नाम पर निजी बैंक खातों में भुगतान करने से बचें।
- किसी अनजान व्यक्ति के साथ OTP, बैंक डिटेल, पासवर्ड या अन्य गोपनीय जानकारी साझा न करें।
- पॉलिसी की स्थिति जानने के लिए संबंधित बीमा कंपनी के आधिकारिक कार्यालय या प्रमाणित माध्यम का इस्तेमाल करें।
- संदिग्ध लेन-देन होने पर तुरंत बैंक और साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।
जांच के आगे बढ़ने के साथ खुल सकते हैं ठगी के और राज
दिल्ली से एक आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब जांच का अगला महत्वपूर्ण पहलू दूसरे सहयोगी की पहचान, फर्जी बैंक खातों के नेटवर्क और ठगी की रकम के अंतिम इस्तेमाल का पता लगाना है। यदि इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां सामने आती हैं, तो यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपी केवल इसी मामले में सक्रिय थे या दूसरे राज्यों के लोगों को भी इसी तरीके से निशाना बनाया गया।
कवर्धा का यह मामला बीमा पॉलिसी धारकों के लिए एक जरूरी चेतावनी है। अपनी मेहनत की कमाई वापस पाने की जल्दबाजी में किसी अनजान व्यक्ति पर भरोसा करना भारी पड़ सकता है। याद रखें, पॉलिसी का पैसा दिलाने के नाम पर पहले रकम मांगने वाला व्यक्ति भरोसेमंद है या नहीं, इसकी जांच किए बिना कोई भुगतान न करें।




