कबीरधाम में सिंचाई ढांचे को मजबूती: पांच जल परियोजनाओं
रायपुर, 24 सितंबर 2026। कबीरधाम जिले में खेती के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ाने और पुराने सिंचाई ढांचे को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण कार्यों को मंजूरी दी है। जल संसाधन विभाग की स्वीकृतियों में जलाशयों की मरम्मत, नहरों की लाइनिंग, जीर्णोद्धार, गेट उन्नयन और पक्की संरचनाओं के निर्माण जैसे काम शामिल हैं। इन कार्यों के पूरा होने के बाद विभागीय अनुमान के अनुसार करीब 375 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिल सकेगी।
यह स्वीकृति केवल नई संरचनाएं बनाने तक सीमित नहीं है। प्रस्तावित कार्यों का बड़ा हिस्सा मौजूदा जलाशयों और नहर प्रणालियों को दुरुस्त करने से जुड़ा है। इसका सीधा मतलब है कि जहां पानी संग्रह और वितरण की व्यवस्था पहले से मौजूद है, वहां उसकी उपयोगिता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
पांच परियोजनाओं पर अलग-अलग काम
कबीरधाम के नरसिंहपुर जलाशय के शीर्ष कार्य और नहरों की मरम्मत के लिए 1 करोड़ 71 लाख 47 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। काम पूरा होने के बाद लगभग 45 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है।
पंडरिया विकासखंड के कामठी जलाशय की नहरों की लाइनिंग के लिए 4 करोड़ 82 लाख 98 हजार रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे करीब 112 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलने की बात कही गई है। नहर लाइनिंग का महत्व इसलिए भी है क्योंकि इससे जल वितरण के दौरान होने वाले रिसाव को कम करने में मदद मिल सकती है।
इसी क्षेत्र के मोहपार जलाशय में शीर्ष कार्य, नहरों के जीर्णोद्धार और लाइनिंग के लिए 4 करोड़ 99 लाख 15 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। परियोजना पूरी होने पर लगभग 95 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचाई के दायरे में आने की उम्मीद है।
सहसपुर लोहारा विकासखंड में दमऊनाला व्यपवर्तन की नहर लाइनिंग के लिए 3 करोड़ 76 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस काम से करीब 75 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलने का अनुमान है।
वहीं छिरहा डायवर्सन में गेट उन्नयन, नहर लाइनिंग और पक्की संरचनाओं के निर्माण के लिए 1 करोड़ 31 लाख 72 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इससे लगभग 48 हेक्टेयर क्षेत्र को लाभ मिलने की जानकारी दी गई है।
किसानों के लिए क्यों अहम है नहरों की लाइनिंग?
सिंचाई परियोजना की सफलता केवल जलाशय में पानी उपलब्ध होने से तय नहीं होती। पानी खेत तक कितनी मात्रा में और कितनी नियमितता से पहुंचता है, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है। पुरानी या क्षतिग्रस्त नहरों में रिसाव और टूट-फूट के कारण उपलब्ध पानी का एक हिस्सा खेतों तक पहुंचने से पहले ही कम हो सकता है।
ऐसे में नहरों की लाइनिंग और पक्की संरचनाओं का निर्माण जल वितरण व्यवस्था को मजबूत करने में मदद कर सकता है। इसका प्रभाव केवल एक फसल तक सीमित नहीं रहता। यदि सिंचाई सुविधा अधिक भरोसेमंद होती है तो किसान फसल चयन, बुवाई के समय और रबी सीजन की खेती को लेकर बेहतर योजना बना सकते हैं।
छत्तीसगढ़ सरकार ने 2026-27 के बजट में जल संसाधन विभाग के लिए ₹3,500 करोड़ का प्रावधान किया है, जिससे राज्य में सिंचाई और जल संसाधन से जुड़े कार्यों को व्यापक स्तर पर बढ़ाने की नीति का संकेत मिलता है।
असली असर काम पूरा होने और पानी पहुंचने पर निर्भर
कबीरधाम में इन स्वीकृतियों का वास्तविक लाभ तभी सामने आएगा जब निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता और समयसीमा के साथ पूरे हों। खासकर नहरों की लाइनिंग और जलाशय के शीर्ष कार्यों में तकनीकी गुणवत्ता महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि निर्माण में कमी आने पर भविष्य में मरम्मत की जरूरत फिर पैदा हो सकती है।
इसके अलावा सिंचाई क्षमता बढ़ने के बाद जल प्रबंधन भी उतना ही जरूरी होगा। उपलब्ध पानी का संतुलित उपयोग, नहरों का नियमित रखरखाव और किसानों तक समय पर पानी की पहुंच इन परियोजनाओं के दीर्घकालिक परिणाम तय करेंगे।
कबीरधाम में पहले भी सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार को किसानों के लिए महत्वपूर्ण प्राथमिकता के रूप में सामने रखा गया है। ऐसे में मौजूदा जलाशयों और नहर नेटवर्क को मजबूत करने वाली ये स्वीकृतियां जिले की सिंचाई व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से बेहतर करने की कड़ी के रूप में देखी जा सकती हैं।



