एशियन गेम्स 2026: भारत का हॉकी में धमाका, शूटिंग में फिर आया पदक; 15 मेडल के साथ जारी है अभियान
एशियन गेम्स 2026: जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन गेम्स में 24 सितंबर का दिन भारतीय खेलों के लिए दो अलग तस्वीरें लेकर आया। एक तरफ भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने दक्षिण कोरिया को 8-2 से हराकर पूल चरण में अपनी स्थिति मजबूत की, वहीं शूटिंग में अनंतजीत सिंह नरूका और परिनाज धालीवाल की जोड़ी ने मिश्रित स्कीट स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर भारत के पदकों की संख्या 15 कर दी।
भारत के खाते में अब एक स्वर्ण, छह रजत और आठ कांस्य पदक हैं। इनमें शूटिंग का योगदान सबसे बड़ा है और अकेले इसी खेल से भारत को आठ पदक मिल चुके हैं।
हॉकी में शुरुआत से ही भारत ने बनाया दबाव
दक्षिण कोरिया के खिलाफ भारतीय टीम ने मुकाबले को शुरुआती मिनटों से ही अपने नियंत्रण में रखने की कोशिश की। भारत ने पहले क्वार्टर में लगातार गोल कर बढ़त बनाई और इसके बाद कोरियाई डिफेंस पर दबाव बनाए रखा।
मैच में शिलानंद लाकरा, सुखजीत सिंह, हरमनप्रीत सिंह, अभिषेक, दिलप्रीत सिंह और रजिंदर सिंह ने भारत के गोल में योगदान दिया। दिलप्रीत और अभिषेक ने दो-दो गोल किए, जबकि कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलकर स्कोरबोर्ड पर भारत की बढ़त और मजबूत की।
दक्षिण कोरिया ने मुकाबले के दौरान दो गोल किए, लेकिन भारतीय आक्रमण की गति को रोक नहीं सका। अंतिम सीटी बजने तक स्कोर 8-2 रहा।
इस जीत का महत्व केवल बड़े अंतर से जीतने तक सीमित नहीं है। एशियन गेम्स हॉकी में हर पूल मैच आगे के चरणों के लिए लय और आत्मविश्वास बनाने का अवसर होता है। भारत का अगला पूल मुकाबला जापान से है।
शूटिंग ने फिर बढ़ाया भारत का पदक खाता
दिन की दूसरी बड़ी उपलब्धि शूटिंग रेंज से आई। अनंतजीत सिंह नरूका और परिनाज धालीवाल ने मिश्रित टीम स्कीट के फाइनल में कांस्य पदक हासिल किया।
भारतीय जोड़ी ने क्वालिफिकेशन में 138 अंक के साथ चौथे स्थान पर रहते हुए पदक दौर में जगह बनाई थी। फाइनल में भारत ने 44 का स्कोर किया। चीन ने 52 के विश्व रिकॉर्ड स्कोर के साथ स्वर्ण और दक्षिण कोरिया ने 51 अंक के साथ रजत पदक जीता।
इस पदक के साथ शूटिंग में भारत के पदकों की संख्या आठ हो गई है—चार रजत और चार कांस्य। यानी मौजूदा एशियन गेम्स में भारत की पदक तालिका को मजबूत करने में निशानेबाजी की भूमिका लगातार बनी हुई है।
15 पदकों की तस्वीर क्या बताती है?
24 सितंबर को उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भारत के 15 पदकों में एक स्वर्ण, छह रजत और आठ कांस्य शामिल हैं। महिला क्रिकेट टीम ने भारत को एकमात्र स्वर्ण दिलाया है। शूटिंग के अलावा भारत ने भारोत्तोलन, वुशु, बैडमिंटन, रोइंग, सॉफ्ट टेनिस और मिश्रित मार्शल आर्ट्स में भी पदक जीते हैं।
| खेल | स्वर्ण | रजत | कांस्य | कुल |
|---|---|---|---|---|
| शूटिंग | 0 | 4 | 4 | 8 |
| क्रिकेट | 1 | 0 | 0 | 1 |
| भारोत्तोलन | 0 | 1 | 0 | 1 |
| वुशु | 0 | 1 | 0 | 1 |
| बैडमिंटन | 0 | 0 | 1 | 1 |
| रोइंग | 0 | 0 | 1 | 1 |
| सॉफ्ट टेनिस | 0 | 0 | 1 | 1 |
| MMA | 0 | 0 | 1 | 1 |
| कुल | 1 | 6 | 8 | 15 |
यह वितरण एक महत्वपूर्ण बात दिखाता है—भारत का प्रदर्शन किसी एक खेल तक सीमित नहीं है, लेकिन शूटिंग अभी स्पष्ट रूप से सबसे बड़ा पदक स्रोत बनी हुई है। वहीं हॉकी में पदक अभी नहीं, बल्कि टूर्नामेंट के आगे के नॉकआउट चरणों में तय होगा।
आगे की चुनौती पदकों की संख्या से ज्यादा पदकों का रंग बदलने की
भारत के लिए अब अगला चरण केवल पदक संख्या बढ़ाने का नहीं, बल्कि रजत और कांस्य को स्वर्ण में बदलने की चुनौती का भी है। शूटिंग में लगातार पदक मिलना इस बात का संकेत है कि भारतीय निशानेबाज अलग-अलग प्रारूपों में प्रतिस्पर्धी बने हुए हैं। हालांकि, हर स्पर्धा में पदक की गारंटी नहीं होती। उदाहरण के तौर पर 10 मीटर एयर पिस्टल में भारतीय पुरुष टीम फाइनल के लिए क्वालिफाई नहीं कर सकी, जिससे यह भी स्पष्ट होता है कि मजबूत पदक रिकॉर्ड के बावजूद अलग-अलग इवेंट में प्रदर्शन में उतार-चढ़ाव संभव है।
हॉकी में भी यही बात लागू होती है। दक्षिण कोरिया पर बड़ी जीत उत्साह बढ़ाने वाली है, लेकिन आगे के मैचों में निरंतर प्रदर्शन ही भारत की वास्तविक स्थिति तय करेगा।



