भारत-पाकिस्तान सीमा से लगे क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों की भूमिका बढ़ा दी गई है। केंद्र सरकार के निर्देशों के तहत सीमावर्ती जिलों के जिलाधीश (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) अब घुसपैठियों, संदिग्ध ड्रोन गतिविधियों और नार्को तस्करी की पहचान एवं रोकथाम में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। इसका उद्देश्य सीमा पार से होने वाली अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।
अधिकारियों के अनुसार, सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय विकसित किया जाएगा। ड्रोन के जरिए हथियार, नकदी और मादक पदार्थों की तस्करी की बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए निगरानी तंत्र को और मजबूत बनाने पर जोर दिया गया है। साथ ही संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तत्काल सुरक्षा एजेंसियों तक पहुंचाने के लिए विशेष व्यवस्था भी की जा रही है।
सरकार का मानना है कि जिला स्तर पर प्रशासन और पुलिस की सक्रिय भागीदारी से राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिलेगी। सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है ताकि वे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति, ड्रोन या गतिविधि की सूचना तुरंत प्रशासन को दे सकें। यह पहल सीमा सुरक्षा, आंतरिक सुरक्षा और नार्को नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।


