देश में लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों और सरकार की नई नीतियों का असर अब पेट्रोल-डीजल की मांग पर पड़ता दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा, सख्त उत्सर्जन नियम और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के बढ़ते उपयोग के कारण आने वाले वर्षों में पेट्रोल और डीजल की खपत में गिरावट देखी जा सकती है। महंगे कच्चे तेल की वजह से आम लोगों और परिवहन क्षेत्र पर भी आर्थिक दबाव बढ़ा है।
Ministry of Petroleum and Natural Gas की नीतियों के तहत स्वच्छ ऊर्जा और हरित परिवहन को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार CNG, एथेनॉल मिश्रित ईंधन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर फोकस कर रही है, जिससे पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम करने की कोशिश हो रही है। वहीं, कई शहरों में पुराने डीजल वाहनों पर सख्ती और प्रदूषण नियंत्रण नियमों ने भी मांग को प्रभावित किया है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं और EV सेक्टर तेजी से बढ़ता रहा, तो देश के ऊर्जा बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों और माल परिवहन में फिलहाल पेट्रोल-डीजल की मजबूत पकड़ बनी हुई है, लेकिन भविष्य में वैकल्पिक ईंधनों का दायरा लगातार बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।


