Supreme Court of India ने अरावली पर्वतमाला की परिभाषा तय करने को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि इस प्रक्रिया में विशेषज्ञों के साथ आम जनता की राय भी शामिल की जानी चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण और पारिस्थितिकी से जुड़े ऐसे संवेदनशील मामलों में केवल प्रशासनिक निर्णय पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि वैज्ञानिक और सामाजिक दृष्टिकोण भी जरूरी है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि अरावली क्षेत्र की स्पष्ट परिभाषा तय करना पर्यावरण संरक्षण, खनन गतिविधियों पर नियंत्रण और अवैध निर्माण रोकने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने सुझाव दिया कि इस काम के लिए गठित पैनल में पर्यावरण विशेषज्ञ, भूवैज्ञानिक, वन अधिकारी और स्थानीय समुदायों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए, ताकि संतुलित और व्यावहारिक समाधान सामने आ सके।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अरावली पर्वतमाला उत्तर भारत के कई राज्यों के पर्यावरण संतुलन में अहम भूमिका निभाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसकी सीमाएं और परिभाषा स्पष्ट हो जाती है, तो अवैध खनन और अतिक्रमण पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।





