सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि उसने किसी संशोधित Form 6 को मंजूरी नहीं दी; अदालत ने चुनाव आयोग से रिकॉर्ड मांगे हैं ताकि पता चल सके कि ऑनलाइन प्रक्रिया में बदलाव किसने और किस अधिकार के तहत किया।
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नई दिल्ली। मतदाता सूची में नाम जुड़वाने से जुड़े Form 6 को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। मामला उस अतिरिक्त घोषणा-पत्र से जुड़ा है, जिसे विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान ऑनलाइन Form 6 की प्रक्रिया में जोड़े जाने की बात सामने आई थी। इसमें आवेदक के साथ उसके माता-पिता या दादा-दादी का पिछली मतदाता सूची में नाम होने से संबंधित जानकारी मांगी गई थी।
5 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने किसी संशोधित Form 6 को मंजूरी नहीं दी है। अदालत ने चुनाव आयोग से संबंधित रिकॉर्ड मांगे हैं, ताकि यह देखा जा सके कि ऑनलाइन प्रक्रिया में वास्तव में क्या बदलाव हुआ और उसे किसने अधिकृत किया।
Form 6 में क्या बदलाव विवाद का कारण बना?
Form 6 का इस्तेमाल नए मतदाता के रूप में नाम दर्ज कराने के लिए किया जाता है। चुनाव आयोग के ऑनलाइन पोर्टल पर SIR से जुड़ा एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र दिखाई दिया था। इसमें आवेदक से यह बताने को कहा गया कि उसका या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम पिछली SIR मतदाता सूची में था या नहीं।
इस अतिरिक्त प्रक्रिया को लेकर सवाल इसलिए उठे क्योंकि वैधानिक Form 6, Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित है। कानून के अनुसार इन नियमों को बनाने की शक्ति केंद्र सरकार के पास है, चुनाव आयोग से परामर्श के बाद।
हालांकि चुनाव आयोग का कहना है कि वैधानिक Form 6 में बदलाव नहीं किया गया था, बल्कि SIR के दौरान एक अलग घोषणा-पत्र जोड़ा गया था। 26 सितंबर को आयोग ने कहा था कि SIR अवधि समाप्त होने के बाद नियमों के अनुसार सामान्य वैधानिक फॉर्म इस्तेमाल किए जाएंगे। बाद में SIR पूरा हो चुके राज्यों में ECINET से अतिरिक्त घोषणा-पत्र हटाया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने 5 अक्टूबर की सुनवाई में साफ किया कि अदालत ने किसी संशोधित Form 6 को मंजूरी नहीं दी है। अब चुनाव आयोग द्वारा रिकॉर्ड पेश किए जाने के बाद अदालत यह देखेगी कि बदलाव हुआ था या नहीं और यदि हुआ तो उसे किसने अधिकृत किया।
इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि अदालत ने Form 6 में हुए बदलाव को गैरकानूनी घोषित कर दिया है। मामला अभी न्यायिक जांच के अधीन है।
Form 6, Form 7 और Form 8 में क्या अंतर?
| फॉर्म | मुख्य उपयोग |
|---|---|
| Form 6 | पहली बार मतदाता के रूप में नाम दर्ज कराने के लिए |
| Form 7 | मतदाता सूची में किसी नाम पर आपत्ति या नाम हटाने के लिए |
| Form 8 | मौजूदा मतदाता का पता बदलने, विवरण सुधारने या EPIC से जुड़ी सेवाओं के लिए |
Form 6 उन नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है जो मतदाता सूची में पहली बार अपना नाम दर्ज कराना चाहते हैं। चुनाव आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल पर भी Form 6 को नए मतदाता पंजीकरण के लिए बताया गया है।
वहीं, Form 7 का इस्तेमाल किसी नाम को मतदाता सूची से हटाने या किसी प्रविष्टि पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए किया जाता है। Form 8 पहले से पंजीकृत मतदाता के पते में बदलाव, विवरण में सुधार और संबंधित EPIC सेवाओं के लिए उपयोग किया जाता है। चुनाव आयोग अपनी मतदाता सेवाओं में पंजीकरण और मौजूदा रिकॉर्ड में सुधार/स्थानांतरण को अलग-अलग प्रक्रियाओं के रूप में बताता है।
विवाद में आगे क्या होगा?
अब इस मामले में चुनाव आयोग द्वारा रिकॉर्ड उपलब्ध कराए जाने के बाद यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि ऑनलाइन Form 6 में जो अतिरिक्त प्रक्रिया दिखाई दी, उसका प्रशासनिक और कानूनी आधार क्या था तथा उसे किस स्तर पर अधिकृत किया गया था।



