दिल्ली SIR: दावे-आपत्तियों की तारीख बढ़ी, अब 30 अक्टूबर तक मौका; 4 दिसंबर को आएगी फाइनल वोटर लिस्ट
नई दिल्ली: दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग ने महत्वपूर्ण बदलाव किया है। मतदाताओं को दावे और आपत्तियां दाखिल करने के लिए अब एक महीने का अतिरिक्त समय मिलेगा। पहले यह प्रक्रिया 30 सितंबर तक पूरी होनी थी, लेकिन संशोधित कार्यक्रम के अनुसार अब 30 अक्टूबर 2026 तक दावे और आपत्तियां दाखिल की जा सकेंगी। इसके बाद 4 दिसंबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब बड़ी संख्या में मतदाताओं के रिकॉर्ड की दोबारा जांच की जा रही है। समय बढ़ने का सीधा मतलब यह है कि जिन लोगों को अपने नाम, पते या पुराने रिकॉर्ड से जुड़े किसी अंतर के कारण स्पष्टीकरण देना है, उनके पास अब दस्तावेज जुटाने और अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए अधिक समय होगा।
नोटिस मिलना नाम कटने का अंतिम फैसला नहीं
SIR को लेकर सबसे ज्यादा भ्रम उन मतदाताओं के बीच है जिन्हें चुनाव अधिकारियों की ओर से नोटिस मिला है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि किसी मतदाता को नोटिस जारी होना अपने आप में उसका नाम मतदाता सूची से हटाने का निर्णय नहीं है। नोटिस का उद्देश्य रिकॉर्ड में सामने आई विसंगति या पुराने रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी का सत्यापन करना है।
ऐसे मामलों में मतदाता को निर्धारित प्रक्रिया के तहत जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने और अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर दिया जाता है। अंतिम निर्णय उचित सत्यापन और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही लिया जाना है।
30 अक्टूबर के बाद क्या होगा?
संशोधित कार्यक्रम के तहत 30 अक्टूबर तक प्राप्त दावे और आपत्तियों तथा जारी किए गए नोटिसों से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए 30 नवंबर 2026 तक का समय रखा गया है। इसके बाद पूरी प्रक्रिया के आधार पर अंतिम मतदाता सूची तैयार होगी और 4 दिसंबर को फाइनल इलेक्ट्रोल रोल प्रकाशित किया जाएगा।
इस बदलाव का व्यावहारिक महत्व खासतौर पर उन मतदाताओं के लिए है जिनके रिकॉर्ड का पुराने SIR रिकॉर्ड से मिलान नहीं हो पाया है। दिल्ली में 2002 की पिछली SIR सूची का इस्तेमाल रिकॉर्ड मिलान के लिए किया जा रहा है। ऐसे में नाम, उम्र, पारिवारिक विवरण या अन्य रिकॉर्ड में मामूली अंतर भी सत्यापन की जरूरत पैदा कर सकता है।
33 लाख से ज्यादा मतदाताओं को नोटिस
SIR के दौरान लाखों मतदाताओं के रिकॉर्ड में ऐसी विसंगतियां सामने आई हैं जिनके लिए सत्यापन की आवश्यकता बताई गई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार करीब 33.13 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें कई मामलों में मौजूदा विवरण का पुराने रिकॉर्ड से मिलान नहीं हो पाया या रिकॉर्ड में तार्किक असंगतियां पाई गईं।
यही वजह है कि इस पूरी प्रक्रिया को केवल नाम हटाने की कवायद के तौर पर देखना सही नहीं होगा। इसका मूल उद्देश्य मतदाता सूची में पात्र नागरिकों के नाम बनाए रखना और अपात्र, डुप्लीकेट या गलत प्रविष्टियों की पहचान करना है। दिल्ली के CEO की वेबसाइट पर SIR ड्राफ्ट रोल, नाम खोजने की सुविधा, ASDD सूची और नोटिस प्राप्त करने वालों की जानकारी भी उपलब्ध कराई गई है।
आम मतदाता के लिए अब सबसे जरूरी क्या?
अगर किसी व्यक्ति को नोटिस मिला है या उसका नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में नहीं मिल रहा है, तो उसे अंतिम तारीख का इंतजार नहीं करना चाहिए। सबसे पहले अपना नाम ड्राफ्ट रोल में जांचना, नोटिस में दिए गए कारण को समझना और जरूरत के अनुसार संबंधित दस्तावेज तैयार करना महत्वपूर्ण है।
विशेष रूप से पुराने रिकॉर्ड से जुड़े मामलों में दस्तावेजों की जानकारी और सही विवरण देना प्रक्रिया को आसान बना सकता है। वहीं जिन पात्र मतदाताओं का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है, उनके लिए दावा दाखिल करने का अवसर भी महत्वपूर्ण है।



